नज़रिया: कांग्रेस को डेडलाइन! क्या है हार्दिक पटेल की मजबूरी?

हार्दिक पटेल

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    • Author, प्रशांत दयाल
    • पदनाम, वरिष्ठ पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए

ऐसी संभावनाएं लगाई जा रही थीं कि गुजरात में पाटीदार आरक्षण आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल कांग्रेस को अपना समर्थन दे सकते हैं लेकिन शनिवार को उन्होंने एक ट्वीट कर चौंका दिया.

उन्होंने कांग्रेस को अल्टीमेटम देते हुए ट्वीट किय, "कांग्रेस पाटीदारों को संवैधानिक आरक्षण कैसे देगी, उस मुद्दे पर अपना स्टैंड 3 नवंबर तक क्लियर कर दे, नहीं तो अमित शाह जैसा मामला सूरत में होगा."

जब कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी अहमदाबाद आए तब होटल ताज में हार्दिक पटेल की मुलाक़ात को लेकर काफ़ी विवाद हुआ. हार्दिक की मुलाकात हुई या नहीं हुई इस पर विवाद हुआ. मेरी जानकारी के अनुसार हार्दिक राहुल गांधी से मिले थे.

तभी हार्दिक ने राहुल के आगे अपनी बात रखते हुए कहा था कि अगर वह कांग्रेस में आते हैं तो उनकी पहली मांग को स्पष्ट रूप से बताया जाए कि पाटीदारों को आरक्षण कैसे मिलेगा. उसके लिए क्या संवैधानिक रास्ते होंगे, इस पर हार्दिक ने पूछा था.

राहुल गांधी

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हार्दिक का अगला कदम

बीजेपी ने भी पाटीदारों को ईबीसी के तहत आरक्षण दिया था लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उसको ख़ारिज कर दिया. हार्दिक ने 3 नवंबर तक का वक्त कांग्रेस को दिया है. असल में वह चाहते हैं कि पाटीदारों को आरक्षण को लेकर बीजेपी ने जिस तरह 'मूर्ख' बनाया वैसे ही कांग्रेस न बना पाए.

क़ानूनी तौर पर आरक्षण किस तरह मिल पाएगा इसकी स्पष्टता हार्दिक की पहली प्राथमिकता है. इसमें कोई दो राय नहीं है कि पाटीदारों के युवा नेता हार्दिक पटेल की मुश्किलें बढ़ चुकी हैं.

उनको लग रहा है कि बीजेपी उनके समाज को आरक्षण नहीं दे रही है और अगर कांग्रेस भी नहीं दे पाई तो उनके लिए समस्याएं खड़ी हो जाएंगी.

इसकी बड़ी वजह यह है कि उन्होंने पहले से ही बीजेपी के ख़िलाफ़ रहने का तय कर लिया है और वह जमकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह और बीजेपी के ख़िलाफ़ बोल रहे हैं.

हार्दिक पटेल

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तीसरा मोर्चा बनाएंगे?

इस सूरत में भी अगर कांग्रेस कोई रास्ता नहीं दिखा सकती है तो उनके लिए यह मुश्किल होना ज़ाहिर सी बात है कि वह कहां जाएं.

पिछले दस दिनों से हार्दिक पटेल गुजरात में चुनावों के मद्देनज़र सभाएं और रैलियां कर रहे हैं और जिस तादाद में लोग उनके साथ आ रहे हैं तो उससे ऐसी संभावनाएं ज़रूर लगाई जा सकती हैं कि वह एक तीसरे मोर्चे की तैयारी में हैं.

बीजेपी कुछ नहीं कर पाई है और अगर कांग्रेस भी कोई भरोसा नहीं दे पाती है तो वह पाटीदारों की एक नई पार्टी बना सकते हैं.

(बीबीसी संवाददाता आदर्श राठौर से बातचीत पर आधारित)

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