उर्दू रामायणः रंजो हसरत की घटा सीता के दिल पर छा गई....

रामायण

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    • Author, नारायण बारेठ
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए

राजस्थान के बीकानेर में दीपावली पर उर्दू में रामायण का पाठ किया जाता है. इसमें छंद की जगह शेरो-शायरी में रामायण के प्रमुख प्रसंगों का बखान किया जाता है.

1935 में मौलवी बादशाह हुसैन राणा लखनवी ने जब उर्दू ज़बान में रामायण पेश किया तो उनकी बड़ी तारीफ़ हुई. अब हर साल बीकानेर में पर्यटन लेखक संघ और महफ़िल-ए-अदब की ओर से इसके वाचन और पाठ का आयोजन किया जाता है.

मौलवी के हाथों लिखी नौ पन्नों की छोटी सी रामायण में वनवास की तस्वीर प्रस्तुत की गई है.

उर्दू रामायण में राम के वनवास का कुछ यूँ बखान किया गया है-

"किस क़दर पुरलुत्फ़ है अंदाज तुलसीदास का, ये नमूना है गुसाई के लतीफ़ अंदाज़ का

नक्शा रामायण में किस खूबी से खींचा, राम के चौदह साल वनवास का

ताज़पोशी की ख़ुशी में एक क़यामत हो गई, कैकेई को राम से अदावत हो गई

सुबह होते-होते घर-घर इसका चर्चा हो गया, जिसने किस्सा सुना उसको अचम्भा हो गया!"

स्रोता

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इस आयोजन से जुड़े बीकानेर के डॉ. जिया उल हसन क़ादरी इस रामायण की खूबी का बखान करते हुए कहते हैं, "इस रामायण को आप 25 मिनट में पढ़ सकते हैं, इसमें राम के अभिषेक का विवरण है.''

उन्होंने कहा, ''साथ ही इसमें राम के वनवास से लेकर जंगल में उनके दुश्वार जीवन और रावण से लड़ाई के वृतांत को प्रभावशाली ढंग से पेश किया गया है."

क़ादरी कहते हैं, "इसकी भाषा बहुत सरल है और कोई अनपढ़ आदमी भी इसे समझ सकता है."

बीकानेर के शायर असद अली असद कहते हैं, "उस दौर में भी राणा लखनवी की लिखी इस रामायण को बहुत मान मिला और बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में इसे सराहा गया."

उर्दू में रामायण का वाचन

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असद कहते हैं, "ये उर्दू में लिखी रामायण अब और भी ज़्यादा प्रासंगिक है. आप सोचिए एक मौलवी ने सालों पहले ये रामायण लिखी और आज भी उसका वाचन कोई इस्लाम का अक़ीदतमंद करता है. यह हमारी गंगा जमुनी तहजीब की गवाही देता है. उर्दू रामायण में राम वनवास की घड़ी पर सीता के मनोभाव को बहुत मार्मिक ढंग से पेश किया गया है. रंजो हसरत की घटा सीता के दिल पर छा गई,गोया जूही की कली ओस से मुरझा गई."

हर साल जब दीपावली के मौके पर इसका आयोजन किया जाता है, तो सभी धर्मों के लोग एक साथ बैठते हैं और रामायण सुनते हैं.

ये वो लम्हा होता है जब मजहब और जाति बिरादरी के फासले मिट जाते हैं, क्योंकि कोई नहीं कहता खुदा बड़ा है या ईश्वर.

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