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नज़रिया: '...तो भाजपा नेता रोमांस के दुश्मन हैं?'
- Author, ज़ुबैर अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता दिल्ली
भारतीय जनता पार्टी के नेताओं को ताज महल से इतनी नफ़रत क्यों? ताज महल तो रोमांस का एक स्मारक माना जाता है.
क्या भाजपा नेता एंटी-रोमांस हैं? क्या शाह जहाँ का अपनी पत्नी मुमताज़ महल से प्यार देश की संस्कृति का हिस्सा नहीं?
दुनिया भर से हर साल दो लाख और देश के कोने-कोने से 40 लाख पर्यटक इस स्मारक को देखने आते हैं. नए शादीशुदा जोड़े स्मारक से जुड़े रोमांस को महसूस करने आते हैं.
इस विरासत की सुंदरता पर टिपण्णी करते हुए रवीन्द्र नाथ टैगोर ने कहा था ये, "समय की गाल पर बहते आंसुओं की तरह है."
स्मारक के 1648 में बनने के बाद से ही इसकी शोहरत होने लगी थी. औरंगज़ेब के सम्राट बनने के कुछ साल पहले और कुछ साल बाद तक भारत की यात्रा पर आए एक फ्रांसिस यात्री फ्रांसवा बर्नियर ने इस इमारत की बढ़ती हुई शोहरत का ज़िक्र किया था और जब वो आगरा जाकर इस स्मारक को अपनी आँखों से देखा तो हैरान रह गया.
ब्रिटेन की लेडी डायना की ताज महल में ली गयी तस्वीर काफी प्रसिद्ध हुई. संयुक्त राष्ट्र के यूनेस्को के ज़रिए वर्ल्ड हेरिटेज साइट में शामिल किए गए ताज महल और भारत के नाम एक ही सांस में लिए जाते हैं.
ताज महल एक बार फिर सुर्ख़ियों में है. ताज महल का ज़िक्र करते हुए भारतीय जनता पार्टी के विधायक संगीत सोम ने इसे 'भारतीय संस्कृति पर कलंक' बताते हुए इसके निर्माण करने वाले मुग़ल सम्राट को ग़द्दार कहा.
इतिहास को बदलने का दावा
इस महीने के शुरू में उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार की पर्यटन विभाग की एक बुकलेट में शामिल नहीं किए जाने पर बहस देखने को मिली थी.
इस पर मेरठ शहर में बोलते हुए संगीत सोम ने कहा, "बहुत से लोग इस बात से चिंतित हैं कि ताज महल को यूपी टूरिज्म बुकलेट की सूची से हटा दिया गया है, किस इतिहास की बात कर रहे हैं हम?"
उन्होंने आगे कहा, "जिस शख़्स ने ताज महल बनवाया था उसने अपने पिता को क़ैद कर दिया. वो हिन्दुओं का क़त्ले आम करना चाहता था." उन्होंने दावा किया कि वो इस इतिहास को बदल डालेंगे.
यूपी सरकार के ताज महल के साथ "सौतेला बर्ताव" करने पर काफ़ी हंगामा हुआ. बाद में राज्य की पर्यटन मंत्री रीता बहुगुणा जोशी ने सफ़ाई देते हुए कहा था कि ताज महल "हमारी संस्कृति का हिस्सा है जो दुनिया के सब से मशहूर पर्यटन स्थलों में शुमार किया जाता है."
संगीत सोम के बयान के बाद अब भाजपा ने सफ़ाई के तौर पर कहा कि ये सोम के "निजी विचार थे."
लेकिन सोशल मीडिया पर इस बयान को लेकर काफी तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं. जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह और दूसरे कई लोगों ने चुटकी लेते हुए पूछा कि क्या अब लाल क़िले से 15 अगस्त को प्रधानमंत्री के भाषण नहीं होंगे? लाल क़िला भी शाहजहाँ ने बनवाया था.
सोशल मीडिया पर बहस
मुस्लिम नेता असदुद्दीन ओवैसी ने ट्विटर पर सवाल किया कि लाल क़िला भी "ग़द्दार" ने बनवाया था तो क्या प्रधानमंत्री अब वहां से तिरंगा झंडा नहीं फहराएंगे?
लेकिन कई सियासी विशेषज्ञों के विचार में ताज महल के ख़िलाफ़ बयान राजनीति से ज़्यादा कुछ नहीं. उनके अनुसार आर्थिक विकास के अभाव में लोगों की भावनाओं को भड़काने से पार्टी के नेताओं को लगता है कि गुजरात में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव में फ़ायदा होगा.
ताज महल से भाजपा नेताओं को नफ़रत हो या न हो ये अब राज़ की बात नहीं कि वो मुग़लों के काल को देश के इतिहास के पन्नों से मिटाना चाहते हैं. ताज महल इस इतिहास का एक अटूट हिस्सा है.
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