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प्रेस रिव्यू: 'राजस्थान के अलवर में मुस्लिम परिवार की 51 गाय पुलिस ने छीनीं'
राजस्थान के अलवर ज़िले में एक मुस्लिम परिवार की 51 गाय कथित तौर पर पुलिस ने छीन लीं और इन्हें एक गौशाला के सुपुर्द कर दिया. ये ख़बर टाइम्स ऑफ इंडिया अख़बार में छपी है.
अख़बार के मुताबिक़ कुछ हिंदू कार्यकर्ताओं की शिकायत पर पुलिस ने इन गायों को गांव की गौशाला के हवाले कर दिया है. सुब्बा ख़ान ने कहा है कि उनके पास 17 बछड़े हैं और बोतल से दूध पिलाकर वो किसी तरह उन्हें ज़िंदा रखे हुए हैं.
अख़बार कहता है कि पिछले दस दिनों से ये परिवार अपनी गाय वापस पाने के लिए संघर्ष कर रहा है.
दूसरी ओर, पुलिस ने इस मामले में किसी भी भूमिका से इनकार किया है. अखबार के मुताबिक किशनगढ़ बास के थानाध्यक्ष ने कहा है कि पुलिस ने नहीं बल्कि गांव वालों ने गायों को गौशाला के हवाले किया. उन्होंने कहा कि कुछ ग्रामीणों ने इस मामले में एसडीएम क पत्र लिखा है.
घाटी में चरमपंथ
'जनसत्ता' में छपी एक ख़बर के अनुसार केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद अपने आखिरी दौर में है और आतंकवादी भागते फिर रहे हैं. वो कश्मीर घाटी में चरमपंथियों को मारे जाने के संबंध में सवालों का जवाब दे रहे थे.
अख़बार में छपी ख़बर के अनुसार उन्होंने कहा, "वो भागते फिर रहे हैं और जबरदस्त दबाव में हैं. मुझे यकीन है कि यह जम्मू और कश्मीर में आतंकवाद का आखिरी चरण होने जा रहा है."
हाफिज़ सईद
'टाइम्स ऑफ इंडिया' में छपी एक ख़बर के अनुसार पाकिस्तान सरकार ने जमात-उद-दावा के प्रमुख हाफ़िज़ सईद को नज़रबंद कर के रखने के फैसले के जारी रखने संबंधी अपनी याचिका वापस ले ली है. भारत हाफ़िज़ सईद को 2008 के मुंबई हमलों का मास्टरमाइंड मानते हैं जिसमें 174 लोग मारे गए थे.
अख़बार के अनुसार इसी साल जनवरी में हाफिज़ सईद और उनके चार सहयोगियों को पाकिस्तान की पंजाब सरकार ने चरमपंथरोधी कानून के तहत 90 दिनों के लिए हिरासत में लिया था जिसके बाद से अब तक उन्हें नज़रबंद रखा गया था.
पंजाब सरकार के गृह विभाग का कहना है कि सरकार को चरमपंथरोधी कानून के तहत उन्हें और नज़रबंद कर के रखने की कोई ज़रूरत नहीं है.
राज्य सरकारों की चिंता
'हिंदुस्तान टाइम्स' में छपी एक ख़बर के अनुसार केंद्र सरकार अब राज्यों को केंद्रीय राजस्व का उनका हिस्सा तीन महीने में एक बार ट्रांसफर करेगी. अगले वित्त वर्ष से शुरू होने वाली इस व्यवस्था के कारण राज्य सरकारें चिंता में पड़ गई हैं.
फिलहाल हर महीने की शुरुआत में राज्य सरकारों को केंद्रीय राजस्व का 42 फीसदी हिस्सा मिलता है जो हर महीने की पहली तारीख को उनके खाते में पहुंच जाता है और इसे वेतन और पेंशन देने, प्रशासनिक काम और कर्ज़ का ब्याज चुकाने में किया जाता है.
अख़बार ने वित्त मंत्रालय में सूत्रों के हवाले से लिखा है कि राजस्व ट्रांसफर करने की अपनी प्रतिबद्धता पूरा करने के लिए कई बार केंद्र को कर्ज़ लेना होता है. लेकिन अगर राज्यों को धन देने के तरीके में थोड़ा बदलाव किया जाए तो इससे जीएसटी के लागू होने से मिले राजस्व के बेहतर इस्तेमाल में मदद मिलेगी.
पूर्व राष्ट्रपति की किताब
'दैनिक जागरण' में छपी एक ख़बर के अनुसार पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अपनी आत्मकथा के तीसरे खंड 'द कोएलिशन ईयर्स 1996-2012' में लिखा है कि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सीताराम केसरी ने प्रधानमंत्री बनने की अपनी महत्वाकांक्षा को पूरा करने के लिए इंद्र कुमार गुजराल की सरकार को गिराया था.
अख़बार के अनुसार प्रणब मुखर्जी ने लिखा है कि 1997 में संयुक्त मोर्चे की इंद्र कुमार गुजराल सरकार से डीएमके को कैबिनेट से बाहर नहीं करने के फैसले के बाद समर्थन वापस ले लिया था, लेकिन इसके पीछे प्रधानमंत्री बनने की उनकी अपनी महत्वाकांक्षा थी.
प्रणव मुखर्जी ने लिखा है, "उन्होंने भाजपा-विरोधी लहर का लाभ उठाना चाहा और गैर-भाजपा सरकार का प्रमुख बनकर अपनी महत्वाकांक्षा को पाने का प्रयास किया."
पटाखों पर बैन और संघ
'इंडियन एक्सप्रेस' में छपी एक ख़बर के अनुसार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर कार्यवाह सुरेश भैयाजी जोशी का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के दिल्ली-एनसीआर में पटाखों की बिक्री पर लगाई रोक से संघ पूरी तरह सहमत नहीं है और इस पर संतुलित विचार होना चाहिए.
उनका कहना है संघ मानता है कि सभी पटाखे प्रदूषण फैलाने वाले नहीं होते इसीलिए प्रदूषण फैलाने वाले पटाखों पर ही रोक लगाई जानी चाहिए.
अख़बार के अनुसार भैयाजी जोशी ने कहा, "दीप जलेंगे तो कल कोई कहेगा इसमें भी कोई समस्या है तो क्या उस पर भी विचार करना पड़ेगा."
'हिंदुस्तान टाइम्स' में छपी एक अन्य ख़बर के अनुसार दिल्ली से सटे फरीदाबाद में में गोमांस ले जाने के शक में कथित गौरक्षकों ने 5 लोगों को बुरी तरह पीटा.
आरोप है कि गौरक्षकों ने ऑटो ड्राइवर आज़ाद को भी पीटा जिनके ऑटो में चार लोग सफर कर रहे थे.
आज़ाद बताते हैं, "उन्होंने हमसे 'गोमाता की जय' कहने के लिए कहा." आज़ाद का आरोप है कि पुलिस के आने के बाद गौरकक्षकों ने उन्हें पीटना नहीं छोड़ा.
अख़बार लिखता है कि बाद में पुलिस जांच में सामने आया कि ये मांस भैंस का था. पुलिस अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज़ कर लिया है और उनकी तलाश कर रही है.
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