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जीएसटी काउंसिल के बड़े फैसलों का ऐलान
गुड्स एंड सर्विसेज़ टैक्स जीएसटी को लेकर उठ रहे सवालों और आलोचनाओं के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसकी समीक्षा और बदलाव की बात कही थी.
शुक्रवार को दिल्ली में जीएसटी काउंसिल की बैठक हुई, कई घंटों तक चली बैठक में कई अहम फ़ैसले लिए गए. बैठक के बाद केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने जीएसटी के दायरे में छोटे व्यापारियों के लिए छूट का ऐलान किया. पढ़ें, जीएसटी पर बड़े फ़ैसले:
- डेढ़ करोड़ रुपये तक के टर्नओवर वाले कारोबारियों को हर महीने जीएसटी रिटर्न भरने से छूट. तीन महीने में भर सकेंगे जीएसटी.
- एक करोड़ तक की कमाई वाले रेस्तरां मालिकों को अब 5 फ़ीसदी टैक्स देना होगा.
- रिवर्स चार्ज से व्यापारियों में भ्रम फैला. रिवर्स चार्ज की व्यवस्था 31 मार्च 2018 तक स्थगित.
- निर्यातकों को दुनिया के बाज़ार में प्रतियोगिता करनी होती है, इस मुद्दे पर बनी एक कमेटी की सिफ़ारिश में कहा गया कि निर्यातकों का क्रेडिट काफ़ी ब्लॉक हुआ है. 10 अक्तूबर से निर्यातकों को जुलाई, अगस्त का रिफंड दिए जाने का फ़ैसला किया गया. कमेटी ने एक समाधान सुझाया है, जीएसटी में छूट नहीं है, इसलिए हर निर्यातक के लिए ई वॉलेट बनेगा. अप्रैल 2018 से ई वॉलेट व्यवस्था पर काम शुरू करने की कोशिश होगी.
- कलेक्शन के पैटर्न में टैक्स का बड़ा हिस्सा बड़े प्लेयर्स से आता है. मझोले व्यापारियों में बड़ा हिस्सा मिलों से आता है और छोटे व्यापारियों पर टैक्स भरने का दबाव ज़्यादा है. इस दबाव को कम करने की कोशिश होगी.
- कम्पोज़िशन स्कीम के तहत सीमा बढ़ाई गई है, इसकी सीमा 75 लाख रुपए से बढ़ाकर 1 करोड़ रुपए की गई है. इस स्कीम में ट्रेडिंग ( एक करोड़ के टर्नओवर पर एक प्रतिशत , मैन्यूफ़ैक्चरिंग को 2 प्रतिशत और रेस्त्रां को पांच फ़ीसदी टैक्स देना पड़ेगा.)
- एक करोड़ रुपए से ज़्यादा के टर्न ओवर वाले रेस्त्रां पर लगने वाले कर ढांचे में बदलाव पर विचार किया जाएगा.
जीएसटी काउंसिल की बैठक में कई चीज़ों की टैक्स दरें घटाने का फ़ैसला किया गया है.
- खाखरा पर टैक्स दर 12 से 5% किया गया, बिना ब्रांड वाले नमकीन पर टैक्स 12 % से 5 %, बिना ब्रांड वाली आयुर्वेदिक दवाओं पर भी 12 से पांच % किया गया, बच्चों के फ़ुड पैकेट पर 18 से 5% कर दिया गया है.
- मार्बल और ग्रेनाइट को छोड़कर फर्श में इस्तेमाल होने वाले पत्थरों पर लगने वाले टैक्स 28 % से घटाकर 18% किया गया, कई स्टेशनरी उत्पादों पर टैक्स 28 से 18% किया गया.
- डीज़ल इंजन के पार्ट्स पर टैक्स की दर 28 फ़ीसदी से घटाकर 18% की गई है. इसके अलावा ज़री वाले काम पर टैक्स कम किया गया है.
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