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अरविंद केजरीवाल की कार दिल्ली सचिवालय के बाहर से चोरी
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की कार दिल्ली सचिवालय के बाहर से चोरी हो गई है. समाचार एजेंसी पीटीआई ने दिल्ली पुलिस के हवाले से इस ख़बर की पुष्टि की है.
2015 के विधानसभा चुनावों तक केजरीवाल इस वैगन-आर कार इस्तेमाल कर रहे थे. इन दिनों आम आदमी पार्टी के एक कार्यकर्ता इसे यूज कर रहे थे.
नीले रंग की ये छोटी कार अरविंद केजरीवाल के आम आदमी वाली छवि से मैच करती थी.
पुलिस के एक सीनियर अधिकारी ने बताया, "कार दिल्ली सचिवालय के बाहर खड़ी थी. दोपहर एक बजे के करीब किसी ने इसे वहां से उठा लिया."
क़िस्सा कार का...
2013 में दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद यह कार भी राजनीतिक चर्चाओं का हिस्सा बन गई थी.
सरकार चलाने में 'आम आदमी' का सहयोग, पारदर्शिता और भ्रष्टाचार विरोधी रुख़ के वादे को उनके पहले ही चुनाव में अच्छा समर्थन मिला था और कांग्रेस के सहयोग से अरविंद केजरीवाल मुख्यमंत्री बन गए थे.
उस दौर में जिन चीज़ों ने केजरीवाल को 'आम मुख्यमंत्री' के तौर पर स्थापित किया, उनमें यह कार भी थी. केजरीवाल शपथ लेने भी इसी कार से गए थे. इसी कार से सचिवालय भी जाते रहे.
कार से जुड़ी पांच बातें
- यह कार आम आदमी पार्टी के एक समर्थक कुंदन शर्मा ने पार्टी को दान में दी थी. कुंदन तब लंदन में सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे. इंडिया अगेंस्ट करप्शन से जुड़े थे. यह कार उनकी पत्नी श्रद्धा शर्मा के नाम थी. निर्भया मामले पर पार्टी के रुख से प्रभावित होकर उन्होंने पार्टी नेता दिलीप पांडे को ईमेल लिखकर कार दान में देने की इच्छा जताई.
- इस कार का नंबर था डीएल 9सी जी 9769. गाड़ी के रजिस्ट्रेशन की तारीख़ थी 5 अगस्त 2005. यानी यह कार 12 साल पुरानी थी.
- लिखित में रिसीविंग हासिल करके कुंदन ने यह कार डोनेट कर दी. लेकिन तब तक उन्हें नहीं मालूम था कि इसका इस्तेमाल ख़ुद केजरीवाल करेंगे.
- लेकिन फिर एक समाचार चैनल पर जब यह कार दिखाई दी और कैमरा नज़दीक गया तो उसमें आगे टंगा पेंडेंट भी दिख गया. कुंदन के छह वर्षीय बेटे ने इसे पहचान लिया. तब उन्हें पता चला कि केजरीवाल उनकी कार का इस्तेमाल कर रहे हैं.
- केजरीवाल की गाड़ी ज़्यादा चर्चाओं में उनके रेल भवन वाले धरने के बाद आई थी. 20 जनवरी 2014 को अफ़सरों और दिल्ली पुलिस की ओर से सहयोग न मिलने के ख़िलाफ़ केजरीवाल इसी गाड़ी में बैठकर प्रदर्शन करने जा रहे थे. लेकिन उन्हें बीच में ही रोक लिया गया. केजरीवाल वहीं धरने पर बैठ गए. रात बीत गई और एक नीली रजाई ओढ़कर दिल्ली का मुख्यमंत्री सड़क पर ही सो गया. ये तस्वीरें अगले दिन कई अखबारों के पहले पन्ने पर छपीं.
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