हिंदू युवक के लिए मस्जिद में हो रहा चंदा

    • Author, रघुनाथ प्रसाद साहू
    • पदनाम, खड़गपुर से, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए

पश्चिम बंगाल के खड़गपुर शहर के पुरातन बाज़ार स्थित समाज संघ क्लब की ओर से इस साल मुहर्रम जुलूस नहीं निकाला गया.

यह किसी सांप्रदायिक तनाव या प्रशासकीय निर्णय के विरोध के कारण नहीं बल्कि कैंसर पीड़ित एक हिंदू युवक के इलाज में आर्थिक मदद देने के लिए किया गया.

पीस कमिटी के सचिव और पेशे से टेलर मोहम्मद बिलाल का कहना है कि अबीर भुइयां उर्फ बाबिन के कैंसर की ख़बर सुनकर उन्होंने मुहर्रम की बैठक में इस साल जुलूस न निकालकर उस पैसे को हिंदू युवक बाबिन के इलाज के लिए देने का प्रस्ताव रखा तो ज़्यादातर लोग उससे सहमत हो गए.

जुमे की नमाज़ के बाद भी उनके इलाज के लिए चंदा इकट्ठा किया गया जो अभी भी जारी है.

15 लाख का ख़र्च

बिलाल ने बताया कि बाबिन को 36 हज़ार रुपये दिए गए हैं और कोलकाता के ठाकुरपुकुर अस्पताल में उनकी कीमोथेरेपी की जा रही है. उनका कहना है कि मानवता की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है और वे लोग इससे काफी खुश हैं.

उधर, अस्पताल में इलाज करवा रहे अबीर उर्फ बाबिन का कहना है कि साल 2012 में उन्हें पहली बार कैंसर हुआ जो कि इलाज के बाद ठीक हो गया फिर इस साल दोबारा बीमारी के उभरने पर डॉक्टरों ने बोन मैरो ट्रांसप्लांटेशन करने के लिए कहा है.

इसमें सिर्फ ऑपरेशन के लिए 12 लाख और कुल ख़र्च 15 लाख रुपये बताया गया जो कि उनके लिए मुमकिन नहीं था. ऊपर से एक साल के भीतर माता-पिता और दादी के गुज़र जाने के बाद वह मानसिक और आर्थिक रूप से टूट चुके थे, लेकिन ऐन वक्त पर मुस्लिम समुदाय और स्थानीय लोगों के प्रयास से वह अभिभूत हैं.

सौहार्द्र की और भी हैं मिसालें

बाबिन का कहना है कि उन्हें इलाके के लगभग 20 हज़ार मुसलमानों की दुआ मिल गई है उम्मीद है कि दवा भी ज़रूर असर करेगी. बाबिन की चार साल पहले शादी हुई थी और अब उनकी पत्नी गर्भवती है.

पश्चिमी मेदिनीपुर ज़िला पुलिस मोहर्रम जूलुस न निकालकर हिंदू युवक के लिए अपनी परंपरा कुर्बान करने वाले समाज संघ क्लब के लोगों को पुरस्कृत करेगी.

समाज संघ क्लब सदस्यों का कहना है कि लोग जूलुस निकालकर पुरस्कृत होते हैं लेकिन उन्हें जूलुस न निकालकर नेक काम के लिए पहचान मिली है यह काबिले तारिफ़ है.

पुरातन बाज़ार इलाके में सांप्रदायिक सौहार्द्र की और भी कई मिसालें हैं. यहां दुर्गा पूजा भी आयोजित की जाती है और वहीं मस्जिद भी है जहां नमाज़ पढ़न के साथ मुहर्रम जुलूस भी निकाला जाता है.

शानदार मदद

स्थानीय निवासी रंजन अश का कहना है, "यहां के लोग भाईचारे के साथ रहते हैं और तीन साल पहले दुर्घटना में उसकी बेटी घायल हो गई थी, उस वक्त वे ड्यूटी पर थे उसके आने के पहले मुस्लिम समुदाय के लोगों ने बेटी को अस्पताल ले जाकर इलाज करवा दिया था."

इसके अलावा मुकेश नामक युवक की बीमारी के समय भी उसे मदद दी गई थी. पीस कमिटी के सचिव बिलाल का कहना है कि बीते साल गुटीय लड़ाई के समय उनके भाई और भतीजे को उपद्रवियों ने कौशल्या इलाके में हमला कर घायल कर दिया था पर उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज नहीं कराई. हालांकि, पुलिस ने ख़ुद ही कार्रवाई की.

बिलाल का कहना है कि कुछ मुट्ठी भर लोग माहौल बिगाड़ने का काम करते हैं और ऐसे लोगों से सावधान रहने की ज़रूरत है.

स्थानीय टीएमसी पार्षद तुषार चौधरी का कहना है कि यहां के धार्मिक उत्सव दोनों समुदायों के लोग मिलकर मनाते हैं और इस साल हिंदू युवक के लिए मुस्लिम समुदाय के लोगों ने जिस तरह आगे बढ़कर मदद की वह शानदार है.

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