आर्थिक तरक्की में भारत की तेज़ छलांग, चीन सुस्त

मोदी और शी जिनपिंग

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भारत की अर्थव्यवस्था में आई गिरावट के कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आर्थिक नीतियों की जमकर आलोचना हो रही है. यह आलोचना न केवल विपक्षी खेमे से बल्कि भारतीय जनता पार्टी के भीतर से भी होने लगी है. लेकिन वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की ताज़ा रिपोर्ट मोदी सरकार को कुछ राहत पहुंचा सकती है.

मोदी तब से निशाने पर हैं जब जून महीने में ख़त्म हुई पहली तिमाही (अप्रैल-जुलाई 2017) में आर्थिक वृद्धि दर का आंकड़ा 5.7 फ़ीसदी रहा और इस तरह ये पिछले तीन साल में सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है.

कई अर्थशास्त्री अर्थव्यवस्था में इस गिरावट के लिए नोटबंदी और जीएसटी को लागू करने में हुई खामियों को गिनाते हैं. पिछले साल 8 नवंबर को भारत के दो बड़े नोटों (500 और 1000 रुपये) को रातों-रात कर बंद कर दिया गया था. मोदी सरकार के इस क़दम की उनके विरोधी तीखी आलोचना करते हैं.

मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों को लेकर देश में जारी राजनीतिक हंगामे के बीच वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम ने अपनी रिपोर्ट जारी की है. इसमें भारत को 137 देशों की सूची में 40वीं रैंक दी गई है. भारत ने रैंकिंग में तेज़ छलांग लगाई है. तीन साल पहले भारत यहां 71वें नंबर पर था.

कुछ ख़ास सालों में प्रतिस्पर्द्धा रैंकिंग में भारत और चीन

हालांकि वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम की रिपोर्ट मोदी के आलोचकों की सोच से बिल्कुल अलग है. वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुछ अच्छे क़दम उठाए हैं, जिनसे भारत को अपनी रैंक सुधारने में मदद मिली है.

नरेंद्र मोदी

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इस रिपोर्ट में कहा गया है कि देश के आधारभूत ढांचे में सुधार, शिक्षा और प्रशिक्षण में बेहतरी, तकनीकी तैयारी, स्कूलों में इंटरनेट का प्रसार और सार्वजनिक खर्चों में निपुणता के कारण भारत को 137 देशों की सूची में अच्छे अंक मिले हैं.

वर्ल्ड बैंक के हाल के संस्करण वैश्विक आर्थिक प्रॉस्पेक्ट्स के मुताबिक प्रदिद्वंद्विता में सुधार के कारण भारत दुनिया की चौथी तेज गति से बढ़ती अर्थव्यवस्था बन गया है.

हालांकि इस रिपोर्ट में यह आशंका भी जताई गई है कि कुछ ऐसी चीज़ें हैं जिनसे निवेशकों का उत्साह कम हो सकता है. ये चीज़ें हैं- भ्रष्टाचार की मजबूत जड़ें, वित्तीय विकल्पों की कमी और अस्थिर टैक्स सिस्टम.

भारत

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चीन से तेज़ है भारत

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत चीन के मुक़ाबले तेजी से बढ़ा रहा है. वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम वैश्विक प्रतिस्पर्द्धा रैंकिंग में भारत ने पिछले चार सालों में 20 अंक हासिल किए हैं जबकि चीन जहां था लगभग वहीं है. इस सूची में चीन भले 27वें नंबर पर है लेकिन उसकी रैंक स्थिर है.

2017 में उम्मीद की जा रही है कि भारत की अर्थव्यवस्था 7.2 फ़ीसदी की दर से आगे बढ़ेगी और चीन की 6.9 फ़ीसदी की आर्थिक वृद्धि दर को पीछे छोड़ देगी. Tradingeconomics.com के मुताबिक अगर ऐसा होता है तो भारत की लंबी अवधि की वृद्धि दर 6.12% से आगे होगी.

रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने संसाधानों के इस्तेमाल के तौर पर निचले स्तर से शुरुआत की थी. ऐसे में भारत संसाधनों के सही इस्तेमाल और तकनीक के ज़रिए अपनी उत्पादकता को सुधार सकता है.

दूसरी तरफ़ चीन ने संसाधनों के उच्च स्तरीय इस्तेमाल से शुरुआत की थी.

भारत

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इस रैंक में स्विटज़रलैंड पहले, अमरीका दूसरे और सिंगापुर तीसरे नंबर पर है. पाकिस्तान इस रैंक में 115वें नंबर पर है.

वहीं, शुक्रवार को यूरोपीय कमीशन के अध्यक्ष ज्यां उंकर ने कहा कि भारत के अलावा 5.7 फ़ीसदी की वृद्धि दर को कोई भी आर्थिक मंदी नहीं कहेगा. उन्होंने कहा कि यूरोप की अर्थव्यवस्था में जो वृद्धि दर है उसके मुक़ाबले भारत की वृद्धि दर काफ़ी अच्छी है.

उन्होंने नई दिल्ली में आयोजित इंडिया यूरोपियन यूनियन बिज़नेस फोरम में कहा कि यूरोप की दो फ़ीसदी आर्थिक वृद्धि दर के मुक़ाबले 5.7 फ़ीसदी वृद्धि दर काफ़ी अच्छी है.

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