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'ताजमहल को मुसलमान ने बनवाया, इसलिए हो रहा है नज़रअंदाज़'
दुनियाभर में प्रेम के प्रतीक के रूप में प्रसिद्ध ताजमहल को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आधिकारिक पर्यटन स्थलों की सूची से बाहर किए जाने की ख़बरें अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी जगह बना रही हैं.
सोमवार को ऐसी ख़बरें सामने आई थी कि उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने राज्य के पर्यटक स्थलों की सूची वाली एक बुकलेट जारी की है जिसमें ताजमहल को जगह नहीं दी गई है.
इसके बाद, कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी से लेकर समाजवादी पार्टी के नेता आज़म ख़ान तक ने योगी सरकार की कड़ी आलोचना की थी.
इस मामले पर हो-हल्ला मचने के बाद उत्तर प्रदेश की पर्यटन मंत्री रीता बहुगुणा जोशी ने इस मसले पर सफाई देते हुए कहा था, ''बुकलेट में धार्मिक स्थलों की तस्वीरें प्रकाशित की गई हैं, क्योंकि ताजमहल एक पर्यटन स्थल है इसलिए उसकी तस्वीर प्रकाशित नहीं की गई. इस मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए.''
रीता बहुगुणा जोशी ने आगे कहा, ''उनकी सरकार ताजमहल के विकास को लेकर प्रतिबद्ध है. विश्व बैंक के सहयोग से संचालित प्रो-पुअर टुरिज्म योजना के तहत 156 करोड़ रुपये से ताजमहल का विकास किया जाएगा.''
अंतरराष्ट्रीय मीडिया में चर्चा
हालांकि उत्तर प्रदेश सरकार जब तक इस मुद्दे पर अपनी सफाई देती तब तक यह ख़बर पूरी दुनिया में फैल चुकी थी, और अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने भी इस पर लेख प्रकाशित कर दिए.
अमरीका के प्रमुख अख़बार 'द वाशिंगटन पोस्ट' ने एक लेख प्रकाशित किया है. इस लेख का शीर्षक है, क्या भारत में ताजमहल की अनदेखी इसलिए हो रही है क्योंकि उसे मुसलमान ने बनवाया है
इस लेख में लिखा गया है, ''वायु प्रदूषण की वजह से पीले पड़ते ताजमहल की हालत और ज्यादा ख़राब होने लगी है, भारतीय राज्य उत्तर प्रदेश की हिंदुत्ववादी सरकार में ताजमहल अपने पुनर्निर्माण के लिए फंड की कमी से जूझ रहा है. इसकी वजह ताजमहल का निर्माण मुसलमान शासक द्वारा किया जाना बताया जा रहा है.''
लेख में आगे लिखा गया है, ''भारत में पर्यटन का बड़ा केंद्र रहे ताजमहल को वहां की राज्य सरकार ने पर्यटक स्थलों की बुकलेट से बाहर कर दिया है.''
इसी तरह, ऑस्ट्रेलिया की समाचार वेबसाइट 'द ऑस्ट्रेलियन' ने 'Taj Mahal sidelined for being too muslim' शीर्षक के साथ लिखा है, 'भारत में ताजमहल को नज़रअंदाज किया जा रहा है, उत्तर प्रदेश में कट्टर हिंदुत्ववादी सरकार के मुख्यमंत्री का मानना है कि ताजमहल भारतीय संस्कृति को प्रतिबिंबित नहीं करता.'
अखबार लिखता है, ''ताजमहल का निर्माण 17वीं शताब्दी में मुगल शासक शाहजहां ने करवाया था. हाल ही में उत्तर प्रदेश की सत्ता में काबिज होने के कुछ हफ्तों बाद ही योगी आदित्यनाथ सरकार ने इस मुस्लिम विरासत को दरकिनार कर दिया है.''
ब्रिटेन से प्रकाशित होने वाले समाचार पत्र द टेलीग्राफ ने भी ताजमहल के मुद्दे को जगह दी है. द टेलीग्राफ लिखता है, ''इसमें कोई अतिश्योक्ति नहीं कि ताजमहल इस ग्रह पर मौजूद सबसे खूबसूरत इमारतों में से एक है. साल 2007 में इसे विश्व के सात अजूबों में भी शामिल किया जा चुका है, लेकिन जिस शहर आगरा में ताजमहल है वहां की राज्य सरकार को शायद ऐसा नहीं लगता.''
इस लेख में उन देशों की सूची भी प्रकाशित की गई है जहां सबसे ज्यादा पर्यटन स्थल हैं. इस सूची में इटली सबसे ऊपर है, जबकि 35 पर्यटन स्थलों के साथ भारत का छठे स्थान पर मौजूद है.
लेख में बताया गया है कि ताजमहल को साल 1983 में यूनेस्को की विश्व धरोहरों में शामिल कर लिया गया था.
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