ग्राउंड रिपोर्ट: हापुड़ में उन्मादी भीड़ से कैसे बचा हिंदू-मुस्लिम जोड़ा

- Author, अभिमन्यु कुमार साहा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, हापुड़ से
वो नज़रें चुराते हुए कोतवाली से निकले थे ताकि उन्हें कोई देख न ले और फिर से वे दोनों उन्मादी भीड़ के हत्थे न चढ़ जाएं, इस डर से दोनों के क़दम तेज़ी से भागने लगते हैं. उनकी सुरक्षा में पुलिस तो थी, पर उनकी आंखों में डर साफ़ नज़र आ रहा था.
एक बार फिर वे दोनों भाग रहे थे, एक ऐसी जगह की तलाश में जहां उनके प्यार के बीच कोई धर्म आड़े न आए.
उत्तर प्रदेश के हापुड़ में भीड़ के हमले से बचे बिहार के सीतामढ़ी के नवविवाहित दंपत्ति सोमवार को शहर छोड़कर चले गए हैं.

रविवार को कुछ हिंदू संगठनों के लोगों ने देवलोक कॉलोनी स्थित उनके किराए के घर पर हमला बोल दिया था और कथित रूप से मारने की कोशिश की थी.
लड़की हिंदू और लड़का मुसलमान. हमलावर भीड़ में लड़की के मां-बाप और बहन भी शामिल थे. वे सीतामढ़ी से हापुड़ पहुंचे थे. स्थानीय लोगों का आरोप है कि उनके मां-बाप स्थानीय हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं को लेकर लड़के को सबक सिखाने पहुंचे थे.
वो लड़का और लड़की को मंदिर ले जाकर शुद्धिकरण कराना चाहते थे. वो लड़के को हिंदू बनाना चाहते थे. भीड़ लड़की के धर्म परिवर्तन पर ग़ुस्से में थी.

'पुलिस नहीं आती तो हम मार दिए जाते'
शहर छोड़ने से पहले पीड़ित लड़के ने बीबीसी को बताया, "वे लोग मेरा कॉलर पकड़ कर हाथापाई कर रहे थे. मारने-काटने की धमकी दे रहे थे. हर बात में धर्म की दुहाई दे रहे थे."
"वे कह रहे थे- तुम हिंदू बन जाओ, लड़की को मुस्लिम क्यों बनाए. मैंने कहा-ऐसा कुछ नहीं हुआ है आप लड़की से पूछ सकते हैं. अगर पुलिस नहीं आती तो हम मार दिए जाते."
लड़का आगे बताता है, "वे हमें मंदिर में ले जाकर हमारा शुद्धिकरण कराना चाहते थे. वे पुलिसवालों को भी अलग हटने की बात कर रहे थे, बोल रहे थे कि ये हमारे धर्म का मामला है."

'अपनी मर्ज़ी से किया धर्म परिवर्तन'
शादी कर मुसीबत में पड़े लड़के ने एमटेक किया है तो वहीं लड़की ने बीएससी तक पढ़ाई की है.
दोनों की मुलाकात दो साल पहले हुई थी. बीते अगस्त की 25 तारीख को दोनों ने गाज़ियाबाद की एक मस्जिद में निकाहनामा पढ़ा.
इसके तीन दिन बाद गाज़ियाबाद निबंधन कार्यालय में शादी को क़ानूनी जामा पहनाया गया.
लड़की घटनाक्रम को याद करते हुए कहती है, "रविवार की सुबह कुछ लोग मेरे घर आए. नाम पूछा और धमकी देने लगे, चाकू दिखाया और गाली-गलौच की. उन लोगों के साथ मेरे मां-बाप और बहन भी थी. वो पुलिस के साथ भी गाली-गलौच कर रहे थे."
"भीड़ जबरन मेरा हाथ खींच रही थी. पुलिस ने किसी तरह हम लोगों को वहां से निकाला. वे लोग कह रहे थे- तुम हमारे समाज को गंदा कर रही हो, तुमको मार देंगे. मैंने अपनी मर्ज़ी से धर्म परिवर्तन किया है और अपने पति के साथ रहना चाहती हूं."

'भीड़ मामले को हिंदू-मुस्लिम रंग देना चाहती थी'
सोमवार को उस इलाक़े में सन्नाटा पसरा था. सड़कें ख़ाली नज़र आ रही थीं. लोग घरों में क़ैद थे. इक्का-दुक्का लोग सड़कों पर नज़र आ रहे थे.
घटना स्थल के क़रीब रहने वाले प्रेम कुमार शर्मा ने बीबीसी को बताया कि 'विरोध करने वालों में कुछ हिंदू संगठन के लोग शामिल थे, जबकि लड़के और लड़की ने क़ानूनी रूप से शादी की है.'
वो आगे बताते हैं, "भीड़ मामले को हिंदू-मुस्लिम रंग देना चाहती थी. वो लड़के को मारना चाहती थी, इसी बीच पुलिस पहुंच गई और लाठीचार्च करके भीड़ को हटाया."
घटना स्थल से 600 मीटर दूर रहने वाले कृष्णा शर्मा ने बीबीसी को बताया, "पुलिस अगर समय पर नहीं पहुंचती तो शायद उन दोनों बच्चों को मार दिया जाता. अलग-अलग हिंदू संगठनों के लोग इसे जबरन लव जिहाद करार दे रहे थे."
"दोनों बच्चे काफी दिनों से मोहल्ले में रह रहे थे और उनका किसी के साथ दुर्भावनापूर्ण व्यवहार नहीं था. यह हिंदू संगठनों की सीधी गुंडागर्दी थी."

पुलिस ने स्वीकारी लाठीचार्ज की बात
बीबीसी को घटना से संबंधित कुछ वीडियो मिले हैं जिसमें घटना स्थल पर पुलिस लाठीचार्ज करती नज़र आ रही है.
हापुड़ के पुलिस अधीक्षक हेमंत कुटियाल ने लाठीचार्ज की बात को स्वीकार किया.
उन्होंने कहा, "मामला हिंदू लड़की और मुस्लिम लड़के के साथ रहने का था. जांच में पता चला कि दोनों ने मर्ज़ी से कोर्ट मैरेज की है. लोग इसका विरोध कर रहे थे. वो जबरन लड़की को अपने साथ ले जाना चाहते थे. दंपत्ति को सुरक्षित निकालने के लिए लोगों पर बल का प्रयोग किया गया था."
स्थानीय मीडिया के मुताबिक लाठीचार्ज के विरोध में हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं के साथ भाजपा सांसद राजेंद्र अग्रवाल और क्षेत्रीय विधायक विजयपाल धरने पर बैठ गए.

सांसद-विधायक ने पुलिस पर कार्रवाई की मांग की
धरने पर बैठे क्षेत्रीय भाजपा विधायक विजयपाल ने स्थानीय मीडिया से बात करते हुए कार्यकर्ताओं पर पुलिसिया लाठीचार्ज का विरोध किया और लाठीचार्ज में लिप्त पुलिस अधिकारियों के निलंबन तक धरने पर बैठे रहने की बात कही.
रविवार देर शाम सांसद राजेंद्र अग्रवाल समेत कई अन्य नेताओं ने कार्रवाई करने वाले अफ़सर सर्किल ऑफ़िस पवन कुमार और कोतवाली प्रभारी समरजीत सिंह के तबादले के आश्वासन के बाद धरना समाप्त किया.
रात होते-होते कार्रवाई करने वाले सर्किल अफ़सर पवन कुमार को पिलखुवा का सीओ बनाकर तबादला कर दिया गया है. वहीं, कोतवाली प्रभारी समरजीत सिंह को गाज़ियाबाद भेजने की सूचना है.

कोई कार्रवाई नहीं
प्रभारी पद से हटाए जाने के बाद समरजीत सिंह ने बीबीसी को बताया कि लड़की के मुकरने के बाद उनके माता-पिता सीतामढ़ी लौट चुके हैं. उन्होंने कहीं भी अपनी बेटी की गुमशुदगी की शिकायत या प्राथमिकी दर्ज नहीं की है.
उन्होंने आगे कहा, "रविवार को हुई घटना में किसी भी पक्ष से किसी तरह की कोई शिकायत नहीं की गई है. लड़का-लड़की को सुरक्षित थाने में रखा गया और फिर सोमवार को दोनों अपनी मर्ज़ी से सुरक्षित जगह चले गए हैं."
पुलिस के सूत्रों के मुताबिक मामले में किसी तरह की कोई एफ़आईआर दर्ज नहीं की गई है और न ही किसी की गिरफ्तारी हुई है.
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