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BHU की छात्राओं का प्रदर्शन जारी, विरोध में मुंडवाए सिर
- Author, समीरात्मज मिश्र
- पदनाम, वाराणसी से, बीबीसी हिंदी के लिए
काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) की छात्राओं का विरोध प्रदर्शन लगातार दूसरे दिन भी जारी है.
विश्वविद्यालय परिसर के भीतर गुरुवार को एक छात्रा से कथित छेड़खानी ने बीएचयू की छात्राओं में आक्रोश भर दिया है.
बीएचयू की एक छात्रा आकांक्षा गुप्ता का कहना है, "छेड़खानी की घटना एक दिन की नहीं है. ये आए दिन होती रहती है."
उन्होंने कहा, "विश्वविद्यालय प्रशासन से शिकायत करने पर उल्टा हमसे सवाल पूछा जाता है कि रात में या बेतुके टाइम में बाहर निकलती ही क्यों हो?"
आकांक्षा गुप्ता का कहना था कि छेड़खानी और विश्वविद्यालय प्रशासन के इस रवैये के विरोध में उसने पिछले एक महीने से अपने सिर को मुंडवा रखा है.
शहर में हैं पीएम नरेंद्र मोदी
शुक्रवार को शहर में प्रधानमंत्री के वाराणसी दौरे से ठीक पहले बड़ी संख्या में आक्रोशित छात्राएं सड़क पर उतर आईं और बीएचयू की गेट पर नारेबाज़ी के साथ प्रदर्शन शुरू कर दिया.
विश्वविद्यालय प्रशासन पर कई आरोप लगाते हुए छात्राएं इस मांग पर अड़ी हैं कि कुलपति धरना स्थल पर उनके साथ बातचीत करें.
वाराणसी के नगर पुलिस अधीक्षक दिनेश सिंह ने बीबीसी को बताया कि कुलपति बातचीत को तैयार हैं लेकिन छात्राओं की मांग है कि वो अपने दफ़्तर की बजाय विश्वविद्यालय के गेट पर यानी धरनास्थल पर ही आकर बातचीत करें.
"दोषियों के ख़िलाफ़ जल्द होगी कार्रवाई"
इस बीच शुक्रवार को रात भर छात्राएं नारेबाज़ी करती रहीं. बताया जा रहा है कि छात्राओं के समर्थन में विश्वविद्यालय के बाहर की भी कुछ लड़कियां आ गईं और उन्होंने भी प्रदर्शन में हिस्सा लिया.
हालांकि एसपी सिटी दिनेश सिंह का कहना था कि शुक्रवार की तुलना में आज छात्राओं की संख्या में काफ़ी कमी आ गई है.
बीबीसी से बातचीत में एसपी सिटी दिनेश सिंह ने कहा, "अभी तक हम लोग प्रधानमंत्री की यात्रा में व्यस्त थे इसलिए छात्राओं के साथ बातचीत और उन्हें वहां से हटाने की कोशिश नहीं कर पाए. मामले को जल्द ही सुलझा लेंगे. जिस छात्रा ने छेड़खानी का आरोप लगाया था उसकी ओर से मुक़दमा दर्ज किया जा चुका है और दोषियों के ख़िलाफ़ जल्द ही कार्रवाई की जाएगी."
रात भर धरने पर बैठी रहीं छात्राएं
पहले दिन प्रदर्शन शाम तक जारी रहा और बताया जा रहा है कि इस वजह से प्रधानमंत्री के रास्ते में भी परिवर्तन करना पड़ा.
छात्राओं को मनाने की प्रशासन की हर कोशिश नाकाम साबित हुई और छात्राएं रात भर धरने पर बैठी रहीं.
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