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गाय से लेकर विमान तक: विज्ञान का इतिहास बदलने वाले भारतीय
- Author, आएशा परेरा
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़, नई दिल्ली
भारत के मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री सत्यपाल सिंह के उस बयान से लोगों की भौहें तन गई हैं जिसमें उन्होंने इंजीनियरिंग के छात्रों को भारत के प्राचीन वैज्ञानिक खोजों के बारे में सिखाने की ज़रूरत बताई है. उनका कहना था कि विमान का पहली बार ज़िक्र प्राचीन हिंदू ग्रंथ रामायण में मिलता है.
राजधानी दिल्ली में एक इंज़ीनियरिंग पुरस्कार समारोह में मुख्य अतिथि सत्यपाल सिंह ने वहां उपस्थित लोगों से यह भी कहा कि राइट ब्रदर्स से आठ साल पहले ही एक भारतीय शिवाकार बाबूजी तलपड़े ने हवाई जहाज़ का आविष्कार कर डाला था.
विज्ञान में प्राचीन भारत का योगदान
शिवाकार बाबूजी तलपड़े की इस कथित उपलब्धि की बात पर सिंह की बातों का सोशल मीडिया पर मज़ाक उड़ाया गया. हालांकि, ये भी सही है कि विज्ञान के क्षेत्र में प्राचीन भारत के योगदान के विषय में ऐसी बातें या विमान का आविष्कार करने की बात कहने वाले वो पहले भारतीय मंत्री नहीं हैं.
साल 2015 में एक प्रतिष्ठित विज्ञान सम्मेलन के दौरान एक वक्ता ने अपने दर्शकों से कहा था कि हवाई जहाज़ का आविष्कार सात हज़ार साल पहले भारद्वाज ऋषि ने किया था.
रिटायर्ड कैप्टन और पायलट ट्रेनिंग संस्थान के प्रमुख आनंद बोडास ने भी ऐसा दावा किया था कि आज के विमानों से कहीं अधिक उन्नत पहले के विमान थे जो दूसरे ग्रहों पर भी जाने में सक्षम थे.
चलिए बात करते हैं उन कुछ विवादित वैज्ञानिक दावों की जिन्होंने अपनी ओर लोगों का ध्यान आकर्षित किया.
प्लास्टिक सर्जरी के गॉड
2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुंबई में डॉक्टरों और मेडिकल कर्मचारियों की एक सभा में कहा था कि भगवान गणेश की कहानी दिखाती है कि तब प्लास्टिक सर्जरी संभव थी.
मोदी ने कहा था, "हम गणेश जी की पूजा करते हैं. कोई तो प्लास्टिक सर्जन होगा उस ज़माने में, जिसने मनुष्य के शरीर पर हाथी का सिर रख के प्लास्टिक सर्जरी शुरू की होगी."
उन्होंने यह भी कहा, "महाभारत का कहना है कि कर्ण मां की गोद से पैदा नहीं हुआ था. इसका मतलब ये हुआ कि उस समय जेनेटिक साइंस मौजूद थी. तभी तो मां की गोद के बिना उसका जन्म हुआ होगा."
भारत की पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव ने अपने बेटे के धड़ पर एक हाथी का सिर लगाकर उन्हें नया जीवन दिया और इसके बाद भगवान गणेश को गजानन कहकर पुकारा जाने लगा.
दिव्य इंजीनियरिंग
पिछले महीने, गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रौद्योगिकी अनुसंधान और प्रबंधन संस्थान (आईआईटीआरएएम) में हिंदू ग्रंथ रामायण के नायक राम के इंजीनियरिंग कौशल की प्रशंसा की.
उन्होंने कहा था, "रामायण के अनुसार भगवान राम ने अपनी अपहृत पत्नी सीता को रावण के चंगुल से छुड़ाने के लिए श्रीलंका तक एक पुल का निर्माण किया था और आज भी इस राम सेतु के अवशेष हिंद महासागर में देखे जा सकते हैं. कई हिंदुओं को इस पर यकीन है ये वही सेतु है जिसे भगवान राम ने बनाया था."
रूपाणी ने कहा, "सोचिए, राम किस तरह के इंजीनियर थे जिन्होंने भारत और श्रीलंका को जोड़ने के लिए पुल बना दिया था. यहां तक की गिलहरियों ने भी पुल बनाने में उनकी मदद की थी. आज भी लोग कहते हैं कि राम सेतु के अवशेष समंदर में हैं."
गाय छोड़ती ऑक्सीजन
इसी साल जनवरी में राजस्थान के शिक्षा और पंचायती राज मंत्री वासुदेव देवनानी लोगों को गाय के वैज्ञानिक महत्व को समझा रहे थे. इस दौरान उन्होंने ये कहकर लोगों को चौंका दिया कि 'गाय एकमात्र जीव है जो केवल ऑक्सीजन लेती और छोड़ती' है.
उन्होंने इसके लिए कोई तथ्य पेश नहीं किया जबकि हाल में नासा ने भी अपनी रिपोर्टों में स्पष्ट किया है कि गायों के डकार में बड़ी मात्रा में हानिकारक मीथेन गैस निकलती है.
मीडिया में उनका बयान आने के बाद देवनानी का मज़ाक उड़ाया गया.
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