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बिहार: नहर की दीवार के साथ बह गए करोड़ों रुपये
- Author, मनीष शांडिल्य
- पदनाम, बिहार से, बीबीसी हिंदी के लिए
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ओर से उद्घाटन किए जाने के करीब 17 घंटे पहले एक बहुप्रतीक्षित नहर परियोजना की दीवार टूट गई.
बुधवार को नीतीश कुमार को भागलपुर जिले के कहल गांव में करीब 40 साल बाद पूरी हुई बटेश्वरस्थान गंगा पंप नहर परियोजना का उद्घाटन करना था.
मंगलवार को पटना से प्रकाशित होने वाले कई अखबारों में इस उद्घाटन समारोह से संबंधित विज्ञापन भी प्रकाशित हुए थे. नहर परियोजना की दीवार टूटने के बाद यह कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया है.
बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव इस घटना के बहाने एक-के-बाद एक ट्वीट कर नीतीश कुमार पर निशाना साध रहे हैं. एक ट्वीट में उन्होंने कहा, ''जल संसाधन विभाग भ्रष्टाचार का अड्डा है. मुख्यमंत्री जी इस विभाग के भ्रष्टाचार पर ना जाने क्यों चुप रहते है?''
एक अन्य ट्वीट में उन्होंने तंज किया, ''नीतीश जी बताएं, 828 करोड़ की लागत से बनी इस परियोजना को भी चूहे कुतर गए हैं क्या, जो बाँध टूट गया? इसका सेहरा भी चूहों के सिर बांधना चाहिए.''
14 करोड़ की योजना 829 करोड़ की हुई
जल संसाधन विभाग के वेबसाइट पर मौजूद जानकारी के मुताबिक 1978 में इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 14 करोड़ आंकी गई थी.
वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक साल 2008 में जब इस योजना की अनुमानित लागत को दोबारा आंका गया तो यह बढ़कर 389 करोड़ हो गई थी.
यह लागत अब बढ़कर करीब 829 करोड़ रुपए हो गई है. यानी शुरुआती लक्ष्य से 59 गुना. मार्च 2016 तक इस परियोजना में 345 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं.
कैसे टूटी नहर परियोजना की दीवार?
जल संसाधन विभाग के मुताबिक नहर की दीवार की टूट को भरने का काम आज सुबह पूरा कर लिया गया.
विभाग के प्रधान सचिव अरुण कुमार सिंह ने पूरी घटना के बारे में बीबीसी को फोन पर बताया, ''वहां जो बॉक्स कलवर्ट अंडर पास (पानी निकलने का रास्ता) बनाया गया था उसमें तकनीकी खामी थी. इस टूट की जांच पूरी कर ली गई है. ये अंडर पास एनटीपीसी ने बनाया था. हम इस बात की भी जांच करेंगे कि अंडर पास बनाने से पहले एनटीपीसी ने अनापत्ति प्रमाण पत्र लिया था या नहीं.''
प्रधान सचिव के मुताबिक विभागीय मंत्री से विचार करने के बाद इस मामले के दोषी लोगाों पर कार्रवाई की जाएगी.
मंगलवार को नहर में हुई टूट से एनटीपीसी टाउनशिप के साथ-साथ कहल गांव के सिविल जज और सब-जज के आवास में पानी प्रवेश कर गया था. जानकारी के मुताबिक इलाके से पानी लगभग निकल चुका है, लेकिन कुछ रास्तों पर गाद (मिट्टी) जमा हो गई है.
क्या है यह परियोजना?
बटेश्वरस्थान में गंगा नदी से पानी पंप कर इस परियोजना के जरिए नहर के रास्ते भेजा जाना था. इस नहर से करीब 27 हज़ार हेक्टेयर ज़मीन को सिंचाई का पानी मिलने का अनुमान है. इस नहर का करीब 70 फीसदी हिस्सा बिहार और बाकी का झारखंड में पड़ता है.
1979 में शुरू हुई इस परियोजना का निर्माण बिहार सरकार के जल संसाधन विभाग की ओर से कराया जा रहा था. इस विभाग के मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह हैं जो कि नीतीश कुमार के करीबी नेताओं में माने जाते हैं.
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