You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में NSUI की दमदार वापसी
दिल्ली विश्वविद्यालय के चुनावों में कांग्रेस की छात्र इकाई एनएसयूआई ने चार में दो शीर्ष पदों पद जीत हासिल कर दमदार वापसी की है.
प्रेसिडेंट और वाइस प्रेसिडेंट के पदों पर एनएसयूआई के उम्मीदवारों ने जीत हासिल की है. जबकि सेक्रेटरी और ज्वाइंट सेक्रेटरी के पदों पर एबीवीपी को जीत मिली है.
रॉकी तुशीद ने प्रेसिडेंट पद के लिए 1,590 वोटों से जीत हासिल की जबकि वाइस प्रेसिडेंट पद पर कुनाल सहरावत को जीत मिली.
इससे पहले एनएसयूआई के अरुण हुड्डा ने 2012 में डूसू अध्यक्ष का पद जीता था.
डीयू में अध्यक्ष पद पर जीत के लिए कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने एनएसयूआई को बधाई दी है और कांग्रेस में भरोसा रखने के लिए शुक्रिया भी कहा है.
हार की समीक्षा करेंगे - एबीवीपी
एबीवीपी की दिल्ली शाखा नेशनल सेक्रेटरी मोनिका चौधरी ने बीबीसी संवाददाता मानसी दाश को बताया कि सेक्रेटरी के पद पर महामेधा नागर और ज्वाइंट सेक्रेटरी के पद पर उमाशंकर को जीत मिली है.
उन्होंने कहा, "डूसू में अब तक जो ट्रेंड रहा था, हमने तीन या चार सीटों पर जीत हसिल की थी. हम अपने काम पर फिर से नज़र डालेंगे और विमर्श करेंगे कि बाकी दो सीटों पर क्या कमी रह गई."
वो कहती हैं, "हम सकारात्मक काम करते हैं और पूरे साल हमने कई ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए हैं. हमें लगता है कि जो काम हमने किया है उसे ले कर हमें छात्रों के पास जाने की ज़रूरत है."
वो कहती हैं, "आने वाले वक्त में हम अपने मेनिफेस्टों में किए वायदों पर चलते हुए छात्रों के मुद्दों को लेकर काम करेंगे."
छात्रों में रोष था- एनएसयूआई
दिल्ली विश्वविद्यालय में होने वाले चुनावों को देश की राजनीति का एक अहम संकेतक भी माना जाता है.
एनएसयूआई के अध्यक्ष रह चुके अशोक तंवर का कहना है कि ये मौजूदा सरकार और उनके समर्थकों की नीतियों के ख़िलाफ़ जीत है.
उन्होंने बीबीसी संवाददाता मानसी दाश से कहा, "उन्होंने वहां से बाबा साहब आंबेडकर की मूर्ति हटाई, जो वायदे किए थे वो पूरे नहीं किए और मौजूदा सरकार भी छात्रवृत्ति काटने के बारे में बात कर रहे हैं. इन बातों के लेकर छात्रों में रोष था."
वो कहते हैं, "जिस तरह से भारतीय जनता पार्टी और उनकी स्टूडेंट विंग आरएसएस के इशारे पर काम करती है कोई भी आज़ादी पसंद करने वाला और टोलरेंट व्यक्ति इन चीज़ों को बर्दाश्त नहीं कर सकता. इस जीत को सरकार की छात्र विरोधी और युवा विरोधी नीति के विरोध में भारतीय लोगों की जीत के तौर पर देखा जा सकता है."
अशोक तंवर कहते हैं, "2003 और 2004 में कांग्रेस की वापसी युवा के माध्यम से हुई थी और इस बार के डीयू, जेएनयू, राजस्थान विश्वविद्यालय और पंजाब विश्वविद्यालय में एनएसयूआई का प्रदर्शन दिखाता है कि कांग्रेस युवाओं का भरोसा जीत पा रही है."
वो कहते हैं, "युवा अब बीजेपी की नीतियों से निराश हो चुके हैं. उन्होंने स्किल इंडिया का 'एस' हटा कर उसे 'किल इंडिया' कर देश की शांति भंग कर दी. ये स्पष्ट संकेत है कि छात्रों ने अब हिंसा को रिजेक्ट कर दिया है. "
जेएनयू में भी रहा लेफ्ट पार्टियों का दबदबा
इससे पहले दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू छात्रसंघ चुनाव के नतीजों में वामपंथी छात्र समूहों की गूंज सुनाई दी थी.
इसी सप्ताह जारी चुनाव नतीजों में चारों सीटों पर यूनाइटेड लेफ्ट पैनल यानी आईसा, एसएफ़आई और डीएसएफ़ के गठबंधन को जीत मिली थी.
जेएनयू छात्रसंघ चुनावों में अध्यक्ष के पद के लिए गीता कुमारी को जीत मिली. उन्होंने एबीवीपी की निधि त्रिपाठी को हराया.
वाइस प्रेसिडेंट के पद के लिए लेफ्ट की सिमोन ज़ोया खान ने एबीवीपी के दुर्गेश कुमार को, सेक्रेटरी के पद लेफ्ट के दुग्गीराला श्रीकृष्णा एबीवीपी के निकुंज मकवाना को हराया. ज्वाइंट सेक्रेटरी के चुनाव में लेफ्ट के सुभांशु सिंह ने एबीवीपी के पंकज केशरी को पछाड़ कर जीत हासिल की.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)