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क्या भारत को चीन-पाक दोनों से युद्ध करना होगा?
- Author, फ़ैसल मोहम्मद अली
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
क्या भारत के उत्तर (चीन) और पश्चिम (पाकिस्तान) में मौजूद ताक़तों ने परिस्थितियों को इस क़दर बिगाड़ दिया है कि भारत को 'दो-मोर्चों पर जंग' लड़नी पड़ सकती है, जैसा कि सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने कहा है.
क्या ऐसी आशंका है कि चीन और पाकिस्तान एक तरफ़ हो जाएं और भारत को दोनों से युद्ध लड़ना पड़े?
पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल शंकर प्रसाद कहते हैं, ''भारत में आतंकवाद के लगातार 'एक्सपोर्ट' और कश्मीरी अलगाववाद को बढ़ावा देने की वजह से हालात इस क़दर ख़राब हो चुके हैं कि पाकिस्तान से हमारी अच्छी ख़ासी दुश्मनी चल रही है. हालांकि मैं इस लफ़्ज़ का इस्तेमाल नहीं करना चाहता लेकिन कहना ज़रूरी है.''
उन्होंने कहा कि डोकलाम में दो महीने तक जिस तरह का तनाव जारी रहा वो कभी भी युद्ध में तब्दील हो सकता है. जनरल प्रसाद ने कहा कि चीन ने पाकिस्तान में बहुत बड़ा निवेश कर रखा है तो किसी भी जंग की स्थिति में दोनों साथ आ सकते हैं.
भारतीय सेना के पूर्व अधिकारी कहते हैं, "दो दुश्मन हमारे और दो दुश्मनों के बीच की दोस्ती तो इसका नतीजा क्या निकलेगा? दोनों मिलकर आक्रमण कर सकते हैं. अगर पाकिस्तान पर हमने कोई कार्रवाई की तो चीन हम पर दबाव डाल सकता है. अगर चीन को ख़िलाफ़ कोई क़दम उठाया तो पाकिस्तान उसके समर्थन में आ सकता है. "
रक्षा मामलों के विशेषज्ञ अजय शुक्ला जनरल रावत के बयान को फ़ौज की प्लानिंग तौर पर देखते हैं.
वो कहते हैं, "1965 और 1971 भारत-पाकिस्तान युद्ध के वक़्त भी पाकिस्तान को उम्मीद थी कि चीन उसकी मदद को आगे आएगा जिससे भारत के लिए दूसरा फ्रंट खुल जाएगा और युद्ध का पलड़ा पाकिस्तान की तरफ़ झुक जाएगा ... "
शुक्ला कहते हैं, "फ़र्क़ सिर्फ़ इतना है कि इस बार ये समझा जा रहा है कि पाकिस्तान चीन के समर्थन में भारत के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ सकता है."
ये पूछने पर कि 60 और 70 के दशक और वर्तमान में ऐसा क्या फ़र्क़ आ गया है जो कि फ़ौजी प्लानर्स पाकिस्तान की मदद को चीन की बजाय चीन की मदद को पाकिस्तान की रणनीति पर सोच रहे हैं? शुक्ला कहते हैं कि 21वीं सदी का भारत अब बड़े लीग का खिलाड़ी है.
भारत बड़े लीग का खिलाड़ी
निवेश के अलावा चीन पाकिस्तान की राजनियक मामलों में भी मदद करता रहा है. जैसे- आतंकवाद के मामलों पर भारत के कई प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र में चीन की वजह से पारित नहीं हो पाए.
मगर युद्ध की स्थिति बनने पर भारत की तैयारी पर जनरल प्रसाद का कहना है कि भारत तैयार तो है लेकिन लगभग 20 सालों से सेना में आधुनिकीकरण का काम रुका रहा है.
उन्होंने कहा, ''काफ़ी दिनों के बाद तो हमें एक पूर्णकालिक रक्षा मंत्री मिली हैं, देखते हैं डोकलाम से हम कितनी सीख ले पाते हैं. इसे एक तरह से चेतावनी के तौर पर लिया जाना चाहिए.''
अजय शुक्ला कहते हैं कि अगर लड़ाई शुरू होती है तो भारत हथियार, रणनीति और दूसरी सभी तैयारियों के साथ दुश्मनों को पूरी टक्कर देगा.
लेकिन वो कहते हैं कि 'लड़ाई लंबी चली यानी 10 दिन से ज़्यादा या 14-15 दिन तो मुश्किलें पैदा हो सकती हैं.' मगर जानकारों का कहना है कि तीन परमाणु ताक़तों के बीच जंग को दुनिया इतना लंबा जाने देगी ये नामुमकिन है.
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