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एक याचिका पर सुनवाई करते हुए संभल के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) कोर्ट ने पुलिसकर्मियों के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं.
अरशद मिसाल, सुरभि गुप्ता
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संभल में नवंबर 2024 में हुई हिंसा के मामले में स्थानीय अदालत ने संभल के तत्कालीन क्षेत्राधिकारी (सीओ) अनुज चौधरी समेत 12 पुलिसकर्मियों के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज करने का आदेश दिया है.
एक याचिका पर सुनवाई करते हुए संभल के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) कोर्ट ने पुलिसकर्मियों के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं.
हिंसा के दौरान गोली लगने से घायल हुए एक युवक के पिता की तरफ़ से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने यह आदेश दिया है. बीबीसी न्यूज़ हिन्दी ने 9 जनवरी को दिए गए इस आदेश की कॉपी देखी है.
अदालत ने अपने आदेश में संभल पुलिस को सात दिनों के अंदर एफ़आईआर दर्ज कर उसकी कॉपी अदालत में उपलब्ध कराने के लिए कहा है.
युवक के पिता ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि उनके बेटे को संभल हिंसा के दौरान पुलिस ने गोली मारी. याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि गोली लगने के बाद उन्हें छिपकर अपने बेटे का इलाज कराना पड़ा था.
याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में बेटे के इलाज से जुड़े दस्तावेज़ और ऑपरेशन के दौरान निकाली गई गोली से जुड़ी रिपोर्टें भी पेश की थीं.
युवक के पिता का आरोप था कि उनका बेटा रोज़ी-रोटी कमाने के लिए बाहर निकला था, तभी उसे गोली मार दी गई.
संभल में बीते साल नवंबर में हुई हिंसा में कुल पाँच लोगों की मौत हुई थी. मरने वाले लोगों के परिजनों ने पुलिस पर गोली चलाने के आरोप लगाए थे, हालांकि तब संभल पुलिस के अधिकारियों ने कहा था कि पुलिस की गोली से किसी की मौत नहीं हुई है.
अधिवक्ता क़मर आलम ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से बात करते हुए कहा, “एफ़आईआर दर्ज करने का यह आदेश एक लंबी और जटिल क़ानूनी प्रक्रिया के बाद हुआ है.”
उन्होंने कहा, “हम उम्मीद करते हैं कि अदालत की निगरानी में निष्पक्ष विवेचना हो सकेगी. अदालत के इस फ़ैसले से पीड़ित का न्याय व्यवस्था में भरोसा मज़बूत होगा.”
बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से बात करते हुए संभल एसपी कृष्ण बिश्नोई ने कहा, "हिंसा की पूर्व में ज्यूडिशियल इंक्वायरी हो चुकी है, उसमें पुलिस कार्रवाई सही पाई गई थी. इसलिए मुक़दमा दर्ज नहीं किया जाएगा. कोर्ट के आदेश के ख़िलाफ़ अपील की जाएगी."
अधिवक्ता क़मर आलम ने बताया, “हमने यह याचिका 4 फ़रवरी 2025 को दायर की थी. इस याचिका की सुनवाई के दौरान पंद्रह से अधिक बार बहस हुई. कई बार अदालत ने हमारी याचिका से जुड़ी रिपोर्टें मंगवाईं. अब लंबी जद्दोजहद के बाद यह फ़ैसला आया है.”
अधिवक्ता क़मर आलम के मुताबिक़, “याचिका दायर करने के बाद पुलिस ने पीड़ित को संभल हिंसा से जुड़े एक मुक़दमे में अभियुक्त भी बनाया है. वह अभी भी क़ानूनी लड़ाई में फंसा हुआ है.”
अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज़ एजेंसी यानी एचआरएएनए का कहना है कि 28 दिसंबर से शुरू हुए प्रदर्शनों के बाद अब तक ईरान में 1,847 प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है.
मानवाधिकार समूह के मुताबिक़, मरने वालों में 9 लोग 18 साल से कम उम्र के हैं, जबकि 135 लोग सरकार से जुड़े कर्मचारी हैं और 9 आम नागरिक भी शामिल हैं.
संस्था का कहना है कि इससे कुल मौतों का आंकड़ा क़रीब 2 हज़ार तक पहुंच जाता है.
हालांकि, बीबीसी इन आंकड़ों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर सका है.
बीबीसी समेत ज़्यादातर अंतरराष्ट्रीय न्यूज़ संगठनों को ईरान के भीतर रिपोर्टिंग की इजाज़त नहीं है, इसलिए ज़मीनी हालात की जानकारी के लिए सोशल मीडिया पर निर्भर रहना पड़ता है.
ईरान में जारी विरोध प्रदर्शन पर मंगलवार रात अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बयान सामने आया है.
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, “ईरानी देशभक्तों, विरोध जारी रखो, अपनी संस्थाओं पर क़ब्ज़ा करो. क़ातिलों और अत्याचारियों के नाम सुरक्षित रखो. उन्हें इसकी भारी क़ीमत चुकानी पड़ेगी.”
उन्होंने आगे लिखा “प्रदर्शनकारियों की बेवजह हत्याएं बंद होने तक, मैंने ईरानी अधिकारियों के साथ सभी बैठकें रद्द कर दी हैं. मदद रास्ते में है.”
वहीं, ईरान के विदेश मंत्री अब्बासी अराग़ची कह चुके हैं कि ईरान अमेरिका से बातचीत को तैयार है और "जंग के लिए भी तैयार है."
ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों पर जर्मनी के चांसलर फ़्रिड्रिख़ मर्त्ज़ ने मंगलवार को कहा कि "हम अब ईरान की सरकार के आख़िरी दिन और हफ़्तों के गवाह बन रहे हैं."
जर्मनी के चांसलर के इस बयान का ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने जवाब दिया है.
उन्होंने कहा, "सभी सरकारों में, जर्मनी की सरकार ‘मानवाधिकारों' के मुद्दे पर बात करने के लिए सबसे ख़राब स्थिति में है. और इसकी वजह साफ़ है. पिछले कुछ सालों में उसके दोहरे मापदंडों ने उसकी सारी विश्वसनीयता ख़त्म कर दी है."
उन्होंने कहा, "हम सब पर एक एहसान करो और थोड़ी शर्म करो."
आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने एक्स पर पोस्ट कर 10 मिनट डिलिवरी की गारंटी ख़त्म होने की बात कही है.
उन्होंने एक्स पर वीडियो पोस्ट कर कहा है कि, “आज देश के गिग वर्कर के लिए बहुत बड़ा दिन है. उन सबके लिए गुड न्यूज़ है और गुड न्यूज़ ये है कि केंद्र सरकार के हस्तक्षेप के बाद ब्लिंकइट और ज़ेप्टो जैसे क्विक कॉमर्स कंपनियां अब 10 मिनट की डिलीवरी की ब्रांडिंग हटाएंगे."
उन्होंने इसके लिए केंद्र सरकार को धन्यवाद भी कहा है.
एक दूसरी पोस्ट में उन्होंने लिखा कि, “यह क़दम डिलीवरी राइडर्स और सड़कों पर चलने वाले हर व्यक्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद करेगा."
उन्होंने लिखा कि, "पिछले कुछ महीनों में मैंने सैकड़ों डिलीवरी पार्टनर्स से बात की है. कई लोग ज़रूरत से ज़्यादा काम कर रहे हैं, कम पैसे पा रहे हैं और एक अव्यावहारिक वादे को पूरा करने के लिए अपनी जान जोख़िम में डाल रहे हैं. और मैं हर गिग वर्कर से कहना चाहता हूं कि आप अकेले नहीं हैं, हम सब आपके साथ हैं."
ईरान में सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन जारी है और प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ की गई कार्रवाई में दो हज़ार से ज़्यादा लोगों के मारे जाने की आशंका है.
यह जानकारी बीबीसी फ़ारसी के संवाददाता जियार गोल ने दी है.
बीबीसी संवाददाता जियार गोल का कहना है, “पूरे भरोसे के साथ कह सकते हैं कि मारे गए लोगों की संख्या हज़ारों में होनी चाहिए.”
उन्होंने कहा, "सरकार पहले भी बल का इस्तेमाल करती रही है, लेकिन इस बार जो हुआ है, वह बिल्कुल अलग है.”
रॉयटर्स ने भी एक ईरानी सुरक्षा अधिकारी के हवाले से बताया है कि मरने वालों की संख्या क़रीब 2 हज़ार हो सकती है.
इसी बीच, संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय के प्रवक्ता जेरेमी लॉरेंस ने जिनेवा में एक सम्मेलन में कहा कि, “रिपोर्ट्स बताती हैं कि सैकड़ों लोग मारे गए हैं और हज़ारों को गिरफ़्तार किया गया है.”
लॉरेंस ने कहा कि, "यह आंकलन संयुक्त राष्ट्र के सोर्स पर आधारित है और ये भरोसेमंद सोर्स हैं.”
यह अपडेट उस बयान के बाद आया है, जिसमें एक मानवाधिकार समूह ने कल कहा था कि उसके मुताबिक़ क़रीब 650 प्रदर्शनकारी मारे गए हैं और हज़ारों घायल हुए हैं.
ईरान में प्रदर्शनों के दौरान मरने वालों की सही संख्या जानना मुश्किल है. इसकी कई वजहें हैं. देश में अंतरराष्ट्रीय न्यूज़ संगठनों के काम पर रोक है और पिछले पांच दिनों से इंटरनेट भी बंद है.
कर्नाटक की मंगलुरु पुलिस ने झारखंड से आए एक प्रवासी मज़दूर को “बांग्लादेशी” बताकर मारपीट करने के आरोप में तीन लोगों को गिरफ़्तार किया है.
गिरफ़्तार किए गए अभियुक्तों के नाम, रथिश दास, धनुष और सागर हैं.
तीनों अभियुक्तों पर आरोप है कि उन्होंने झारखंड के रहने वाले दिलजान अंसारी से आधार समेत दूसरे पहचान पत्र दिखाने को कहा और उन पर आपत्तिजनक टिप्पणियां भी कीं.
जब दिलजान अंसारी ने ज़ोर देकर कहा कि वह बांग्लादेशी नहीं हैं, तो आरोपियों ने कथित तौर पर उनके औज़ारों से उनके सिर पर हमला कर दिया, जिससे काफ़ी खून बहने लगा.
अंसारी एक निर्माण मज़दूर हैं. वह अपने साथियों के साथ दोपहर का खाना खा रहे थे, तभी अभियुक्त उनके कमरे में घुस आए और उनकी नागरिकता को लेकर सवाल करने लगे.
पुलिस के मुताबिक, “एक स्थानीय हिंदू महिला ने उन्हें बचाया.”
मंगलुरु के पुलिस कमिश्नर सुधीर कुमार रेड्डी ने बीबीसी न्यूज़ हिंदी से कहा, “हमने जांच की और पाया कि वह भारतीय नागरिक हैं. वह पिछले 15 साल से हर साल चार से पांच महीने यहां काम करते आ रहे हैं. हमने तीन लोगों को गिरफ़्तार किया है.”
पुलिस ने बताया, “वह इतने डरे हुए थे कि शिकायत भी नहीं कर पाए, लेकिन कुछ स्थानीय लोगों ने इस घटना की जानकारी पुलिस को दी, जिसके बाद हमने कार्रवाई की.”
पुलिस ने आरोपियों के ख़िलाफ़ भारतीय न्याय संहिता यानी बीएनएस की कई धाराओं में मामला दर्ज किया है, जिनमें ग़लत तरीक़े से रोकना, हत्या की कोशिश, जानबूझकर अपमान कर शांति भंग कराने की कोशिश, आपराधिक धमकी और ख़तरनाक हथियार से चोट पहुंचाना शामिल है.
ईरान में सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन जारी है. इस दौरान प्रदर्शनकारियों के मारे जाने और घायल होने की ख़बर है, जिस वजह से वहां के अस्पतालों पर काफ़ी दबाव पड़ रहा है और हालात बिगड़ते जा रहे हैं.
कैंसर विशेषज्ञ प्रोफ़ेसर शाहराम कोर्दस्ती ईरान से हैं और वो पिछले दो दशकों से ब्रिटेन की राजधानी लंदन में काम कर रहे हैं. वह ईरान के डॉक्टरों से संपर्क में रहते हैं. उन्होंने बताया कि पहले जब भी हालात ख़राब हुए हैं, जानकारी मिलना आसान रहा है.
उन्होंने बताया कि, "इस बार संपर्क के सारे रास्ते बंद कर दिए गए हैं. इसमें स्टारलिंक भी शामिल है, जो कुछ दिन पहले तक काम कर रहा था."
बीबीसी न्यूज़डे से बात करते हुए उन्होंने बताया कि उन्हें आख़िरी मैसेज तेहरान में अपने एक साथी डॉक्टर से मिला था. उस डॉक्टर ने उन्हें बताया था कि, “ज़्यादातर अस्पतालों में हालात जंग जैसे हैं. हमारे पास सामान की कमी है, ख़ून की भी भारी कमी है.”
हालांकि कोर्दस्ती ने बताया कि वह इस जानकारी की ख़ुद पुष्टि नहीं कर पाए हैं, लेकिन उनके संपर्क में मौजूद “दो से तीन अस्पतालों” के डॉक्टरों ने बताया है कि उन्होंने सैकड़ों ऐसे लोगों का इलाज किया है जो घायल हुए हैं या जिनकी मौत हो चुकी है.
उन्होंने बतााय कि, “जो आंकड़े हमें मिल रहे हैं, वह ज़्यादातर तेहरान या बड़े शहरों से हैं, लेकिन छोटे शहरों में क्या हो रहा है, हमें बिल्कुल पता नहीं है.”
हाल के दिनों में ईरान के कई अस्पतालों के कर्मचारियों ने बीबीसी को बताया है कि उनके यहां मरे और घायल मरीज़ों की संख्या इतनी ज़्यादा है कि अस्पतालों पर भारी दबाव पड़ रहा है.
तेहरान के एक अस्पताल में काम करने वाले एक मेडिकल स्टाफ़ ने कहा कि, “युवाओं के सिर पर और दिल पर सीधे गोलियां मारी गई हैं.”
वहीं एक डॉक्टर ने बताया कि तेहरान के एक आंखों के अस्पताल में हालात इतने बिगड़ गए हैं कि उसे इमरजेंसी यानी ‘क्राइसिस मोड’ में डालना पड़ा है.
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कांग्रेस पार्टी ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ़्रेंस करके चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल के बीजेपी मुख्यालय जाने की निंदा की.
इस दौरान कांग्रेस के मीडिया एवं पब्लिसिटी विभाग के चेयरमैन पवन खेड़ा ने कहा,“बीजेपी ने गिरगिट को भी एक रंग सिखा दिया है. जिन्हें चीन को ‘लाल आँखें’ दिखानी थीं, उनके लिए बीजेपी ने ‘लाल कारपेट’ बिछा दी.”
उन्होंने कहा, “बीजेपी ने चीन की पार्टी सीपीसी से मीटिंग की है. ये जब सत्ता में नहीं थे, तब भी चीन जाकर मिलते थे और आरएसएस वाले ट्रेनिंग लेते थे.”
पवन खेड़ा ने कहा, “हमें दिक्क़त नहीं है कि कोई राजनीतिक दल किसी दूसरे देश के राजनीतिक दल से मिले या संवाद करे. मगर हमें दिक्क़त बीजेपी के दोहरेपन, ढोंग और मक्कारी से है. बीजेपी सालों तक चिल्लाती रही कि कांग्रेस ने एमओयू साइन कर लिया और अब ये खुद मीटिंग कर रहे हैं.”
उन्होंने आगे कहा कि, "हमें दिक्क़त बीजेपी की नीयत से है, क्योंकि बंद दरवाज़ों के पीछे होने वाली इन बैठकों के बाद देश को ख़ामियाज़ा भुगतना पड़ता है."
बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह ने सोमवार को एक्स पर पोस्ट कर बताया था कि कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ चाइना के एक प्रतिनिधिमंडल ने बीजेपी मुख्यालय का दौरा किया है.
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा है कि सरकार तमिल सुपरस्टार विजय की फ़िल्म 'जन नायकन' को ब्लॉक करने की कोशिश कर रही है.
सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर राहुल गांधी ने लिखा, ''सूचना और प्रसारण मंत्रालय की ‘जन नायकन’ को ब्लॉक करने की कोशिश तमिल संस्कृति पर हमला है.''
उन्होंने लिखा, ''मिस्टर मोदी आप लोगों की आवाज़ दबाने में सफल नहीं होंगे.''
एक्टर विजय की ये फ़िल्म पोंगल के अवसर पर रिलीज़ होने वाली थी लेकिन सेंसर बोर्ड ने इसको अनुमति नहीं दी है.
दूसरी ओर, विजय से सोमवार को दिल्ली स्थित सीबीआई मुख्यालय में करूर भगदड़ के संबंध में लगभग छह घंटे तक पूछताछ की गई.
अधिकारियों के हवाले से एएनआई और पीटीआई समाचार एजेंसियों ने बताया कि सीबीआई विजय से आगे पूछताछ करना चाहती है और विजय ने कहा है कि पोंगल त्योहार नज़दीक होने के कारण वह किसी और तारीख़ को पूछताछ के लिए पेश होंगे.
इसलिए यह कहा जा रहा है कि सीबीआई विजय को दोबारा पूछताछ के लिए बुला सकती है.
सुप्रीम कोर्ट ने करूर में विजय के चुनाव प्रचार के दौरान हुई भगदड़ में 41 लोगों की मौत की सीबीआई जांच का आदेश दिया है.
अब तक बीबीसी संवाददाता सुरभि गुप्ता आप तक ख़बरें पहुंचा रही थीं.
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महिला अधिकार कार्यकर्ता और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफ़ज़ई ने ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन कर रहे लोगों के समर्थन में एक्स पर एक पोस्ट किया है.
उन्होंने लिखा कि वह ईरान के लोगों के साथ हैं, जो अपना भविष्य ख़ुद तय करने के हक़दार हैं.
मलाला ने लिखा, "ईरान में हो रहे विरोध प्रदर्शनों को लड़कियों और महिलाओं की आज़ादी पर लंबे समय से लगे सरकारी प्रतिबंधों से अलग नहीं किया जा सकता, जिसमें शिक्षा सहित सार्वजनिक जीवन के सभी पहलू शामिल हैं."
"ईरान की लड़कियां, दुनिया भर की लड़कियों की तरह, सम्मान के साथ जीने की मांग करती हैं."
उन्होंने लिखा कि 'दशकों से ईरान के लोगों की आवाज़ को दबाया' गया है.
मलाला यूसुफ़ज़ई ने आगे लिखा, "वे (ईरान के लोग) चाहते हैं कि उनकी आवाज़ सुनी जाए और उन्हें अपना राजनीतिक भविष्य तय करने का अधिकार मिले. वह भविष्य ईरान के लोग को ही तय करना चाहिए और उसमें ईरानी महिलाओं और लड़कियों का नेतृत्व शामिल होना चाहिए न कि बाहरी ताकतों या दमनकारी शासनों का."
साल 2012 में महिला शिक्षा के प्रचार में जुटीं मलाला को तालिबान के चरमपंथियों ने निशाना बनाया था. मलाला नोबेल शांति पुरस्कार विजेता भी हैं. उन्हें साल 2014 में नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया था.
साल 2014 का नोबेल शांति पुरस्कार संयुक्त रूप से भारत के कैलाश सत्यार्थी और पाकिस्तान की मलाला यूसुफ़ज़ई को "बच्चों और युवाओं के दमन के ख़िलाफ़ उनके संघर्ष और बच्चों के शिक्षा के अधिकार के लिए" दिया गया था.
महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने बीजेपी नेता अन्नामलाई के मुंबई को लेकर दिए गए बयान की आलोचना की है.
शिंदे ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि मुंबई को लेकर अन्नामलाईने जो बयान दिया था वह ग़लत था और उससे राजनीतिक विवाद पैदा हुआ.
उन्होंने साफ़ किया कि इस तरह का बयान शिवसेना के रुख़ के मुताबिक़ नहीं है.
अन्नामलाई ने कहा था कि केंद्र सरकार, महाराष्ट्र सरकार और बृहन्मुंबई महानगरपालिका को मुंबई को लेकर अपनी सोच एक जैसी रखनी चाहिए.
अन्नामलाई ने आगे कहा था, "...क्योंकि मुंबई सिर्फ़ महाराष्ट्र का शहर नहीं, यह एक ‘इंटरनेशनल सिटी’ है. इस शहर का बजट 75,000 करोड़ रुपये है, जो छोटा नहीं है. चेन्नई का बजट 8,000 करोड़ रुपये है और बेंगलुरु का 19,000 करोड़ रुपये. इतने बड़े बजट को संभालने के लिए प्रशासन में अच्छे लोगों की ज़रूरत है."
इस पर एकनाथ शिंदे ने कहा, "अन्नामलाई ने जो कहा, वह सही नहीं था. वह ग़लत था और उस तरीके से नहीं कहा जाना चाहिए था. मैंने यह बात साफ़ तौर पर बीजेपी को बता दी है और वे इस पर विचार कर रहे हैं."
उन्होंने कहा कि मुंबई और मराठी पहचान को लेकर शिवसेना का रुख़ बिल्कुल स्पष्ट है और इस पर कोई समझौता नहीं हो सकता.
उन्होंने कहा, "कोई भी मुंबई को महाराष्ट्र से अलग नहीं कर सकता. किसी में इतनी हिम्मत नहीं है. मुंबई कोई रेलवे का डिब्बा नहीं है, जिसे एक जगह से अलग कर दूसरी जगह जोड़ दिया जाए."
सूत्रों का कहना है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कई तरह के खुफ़िया और मिलिट्री तरीकों की जानकारी दी गई है, जिसका इस्तेमाल ईरान में किया जा सकता है.
ये जानकारी अमेरिकी रक्षा विभाग के दो अधिकारियों ने बीबीसी के अमेरिका पार्टनर, सीबीएस न्यूज़ को दी है.
सूत्रों ने कहा कि ईरान में संभावित अमेरिकी हस्तक्षेप के लिए लंबी दूरी का मिसाइल हमला एक विकल्प बना हुआ है लेकिन अधिकारियों ने साइबर ऑपरेशन और मनोवैज्ञानिक अभियान का विकल्प भी पेश किया.
ट्रंप ने सोमवार को ईरान के साथ व्यापारिक संबंध रखने वाले देशों के ख़िलाफ़ 25 प्रतिशत टैरिफ़ लगाने की घोषणा की.
ईरान में सरकार के विरोध में हो रहे प्रदर्शनों के बीच ट्रंप कह चुके हैं कि वह ईरान के मामले में कुछ बहुत मज़बूत विकल्पों पर विचार कर रहे हैं.
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागचीने कहा है कि ईरान अमेरिका के साथ बातचीत कर सकता है, लेकिन देश "युद्ध के लिए भी तैयार" है.
सूत्रों के मुताबिक, ट्रंप की राष्ट्रीय सुरक्षा टीम मंगलवार को व्हाइट हाउस में ईरान पर चर्चा करने के लिए एक बैठक करेगी, लेकिन यह साफ़ नहीं है कि राष्ट्रपति ट्रंप ख़ुद इसमें शामिल होंगे या नहीं.
जानिए अब तक की पांच बड़ी ख़बरें-
वेनेज़ुएला के विपक्षी समूहों ने सरकार से राजनीतिक क़ैदियों को रिहा करने की प्रक्रिया में तेज़ी लाने की अपील की है.
अधिकारियों का कहना है कि अमेरिका के दबाव के बाद पिछले हफ़्ते यह प्रक्रिया शुरू होने के बाद से 116 क़ैदियों को रिहा किया गया है. लेकिन विपक्ष का कहना है कि अब तक सिर्फ़ 65 लोगों को ही रिहा किया गया है.
सैकड़ों लोग अब भी हिरासत में हैं और उनके परिवार के सदस्य अपनों की ख़बर जानने के लिए जेलों के बाहर इंतज़ार कर रहे हैं.
सोमवार को वेनेज़ुएला की विपक्षी और निर्वासित नेता मरिया कोरीना मचादो ने वेटिकन में पोप लियो से मुलाक़ात की और उनसे इस मामले में दख़ल देने का आग्रह किया.
वेनेज़ुएला में अमेरिका की कार्रवाई के बाद देश की उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज़ कार्यवाहक राष्ट्रपति बनी हैं.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेज़ुएला में हुई सैन्य कार्रवाई के बाद बाकी कई देशों के नाम लेकर चेतावनियां जारी की. इन देशों में से एक क्यूबा भी है.
ये पहली बार नहीं है जब क्यूबा को किसी अमेरिकी राष्ट्रपति की तरफ से चेतावनियां मिली हों या फिर दबाव का सामना करना पड़ रहा हो. क्यूबा और अमेरिका के तनावपूर्ण रिश्तों की शुरुआत दशकों पहले हुई थी.
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट की मेज़बानी में सोमवार को क्रिटिकल मिनरल्स पर हुई बैठक की जानकारी दी है.
अश्विनी वैष्णव ने बताया कि क्रिटिकल मिनरल्स की सप्लाई चेन को कैसे लचीला बनाएं, कैसे अच्छी गुणवत्ता के खनिज सबको मिलते रहे, इस पर अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कुछ देशों के मंत्रियों एक बैठक बुलाई थी.
उन्होंने कहा, "कई देशों ने अपने अनुभवों को साझा किया. सप्लाई चेन के लिए वे लोग क्या कदम उठा रहे हैं और पर्यावरण के नज़रिए से क्रिटिकल मिनरल्स को कैसे रीसायकल करके ज़्यादा इस्तेमाल में लाया जा सके, इसकी गुणवत्ता पर कैसे फ़ोकस हो सहित कई विषयों पर चर्चा हुई. बैठक सकारात्मक थी."
इस बैठक के बारे में अश्विनी वैष्णव ने एक्स पर भी पोस्ट किया. उन्होंने लिखा, "क्रिटिकल मिनरल सप्लाई चेन को मज़बूत करना भारत की मैन्युफ़ैक्चरिंग क्षमताओं और तेज़ी से बढ़ते इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर की मज़बूती के लिए बहुत ज़रूरी है."