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तेंदुए के जबड़े से बच्ची को खींच लाई मां
- Author, समीरात्मज मिश्र
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में एक ऐसी घटना घटी जो अक्सर फिल्मों में ही देखने को मिलती है, एक मां अपनी बच्ची को तेंदुए के जबड़े से खींच लाई.
हैरान कर देनी वाली यह घटना है बहराइच जिले में मोतीपुर रेंज के जंगलों के पास बसे नैनिहा गांव की. छह साल की एक बच्ची को एक तेंदुए ने पकड़ लिया. तेंदुआ जंगल में जब तक बच्ची को अपना निवाला बनाता, तब तक बच्ची की मां ने उसे देख लिया और देखते ही वो तेंदुए पर टूट पड़ी.
तेंदुए के साथ काफी देर तक संघर्ष करने के बाद वो अपनी बच्ची को तेंदुए के मुँह से खींच लाई. नैनिहा गांव की रहने वाली सुनैना इस समय अपनी घायल बच्ची को लेकर बहराइच के ज़िला अस्पताल में हैं.
बीबीसी से बातचीत में उन्होंने बताया, "क़रीब छह बजे शाम की घटना है. मैं अंदर खाना बना रही थी, बच्ची पड़ोस के दूसरे बच्चों के साथ खेल रही थी. उसी समय तेंदुए आया और उसने बच्ची को दबोच लिया. पहले बच्ची चिल्लाई लेकिन जब तेंदुए ने कसकर पकड़ लिया तो उसकी आवाज़ ही बंद हो गई. मैंने बाहर निकल देखा तो सन्न रह गई. लेकिन मैंने हिम्मत करके बच्ची के दोनों पैर पकड़ लिए."
बच्ची का सिर तेंदुए के मुंह में था
भोजपुरी भाषा में सुनैना बताती हैं कि तेंदुए ने सिर्फ़ कसकर पकड़ा ही था, बच्ची तब तक ज़िंदा थी.
वो कहती हैं, "मैं बच्ची के दोनों पैर अपनी ओर खींच रही थी और तेंदुआ बच्ची के सिर को मुंह से पकड़ कर अपनी ओर खींच रहा था. काफी देर तक मैं उससे लड़ती रही, मौक़ा देखकर मैं उसके ऊपर गिर गई और आख़िरकार बच्ची को तेंदुए के मुँह से निकालने में क़ामयाब रही."
सुनैना कहती हैं कि यदि वो बाहर नहीं आतीं तो शायद उनकी बच्ची बच न पाती. बच्ची को तेंदुए से छुड़ाने के बाद उन्होंने ज़ोर से आवाज़ लगाई और तब तक गांव के और लोग भी वहां पहुंच चुके थे. बच्ची को छोड़ने के बाद तेंदुआ और हमलावर हो गया लेकिन तब तक गांव के लोग वहां पहुंच गए और उन्होंने तेंदुए को भगा दिया.
अक्सर हमला करता है तेंदुआ
गांव के लोगों के मुताबिक तेंदुए अक़्सर यहां आते हैं और भेड़-बकरी जैसे छोटे जानवरों को उठा ले जाते हैं. कई बार अकेले पड़ने पर आदमी पर भी हमला करते हैं और घरों से बच्चों के लिए भी अक़्सर वो ख़तरा बने रहते हैं.
सुनैना बताती हैं, "पहले हमने यही सोचा कि बच्चे बाघ-बाघिन का खेल खेल रहे हैं. लेकिन जब बच्ची सिर्फ़ एक ही बार चिल्लाई और दोबारा उसकी आवाज़ नहीं सुनी, तो मुझे शक़ हुआ और ये शक़ सही निकला."
ये पूछने पर कि क्या हमलावर तेंदुए को देखकर उन्हें डर नहीं लगा, सुनैना कहती हैं, "डर लगा लेकिन जब अपनी बच्ची को उसके मुंह में देखा तो जैसे मेरा डर भी भाग गया और मेरे अंदर ताक़त भी आ गई. थोड़ी देर तक मौक़े की तलाश में रही और तब तक बच्ची के पैर को मैंने पकड़ लिया."
ख़तरे से बाहर है बच्ची
हमले में घायल बच्ची को पहले मोतीपुर के प्राथमिक चिकित्सालय ले जाया गया जहां उसकी नाजुक हालत को देखते हुए ज़िला अस्पताल भेज दिया गया.
ज़िला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर पीके टंडन बताते हैं, "बच्ची के सिर पर गंभीर चोटें हैं और एक कान पूरी तरह से तेंदुए ने काट डाला था. लेकिन डॉक्टरों ने उसे ठीक कर दिया है. सिर पर टांके लगा दिए गए हैं. फ़िलहाल बच्ची की हालत स्थिर है." डॉक्टर टंडन कहते हैं कि बच्ची फ़िलहाल ख़तरे से बाहर है.
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