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12 मार्च 1993 को क्या हुआ था मुंबई में
12 मार्च, 1993. दिन शुक्रवार. रोज की तरह मुंबई इस दिन भी तेज़ रफ़्तार में दौड़ रही थी. दोपहर 1.28 बजते हैं और एक ज़ोरदार धमाका होता है. आर्थिक राजधानी की रफ़्तार पर अचनाक ब्रेक लग जाती है.
धमाका 28 मंजिला इमारत बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज की बेसमेंट में होता है. इसकी तीव्रता इतनी तेज़ होती है कि पूरी इमारत हिल जाती है. इमारत में उस समय क़रीब दो हज़ार लोग मौजूद थे. क़रीब 84 लोग मारे जाते हैं. इलाक़े में खौफ़ का मंज़र और अफ़रातफ़री मच जाती है.
लोग इससे पहले कुछ समझ पाते दो घंटे 12 मिनट में एक के बाद एक-एक करके 11 और धमाके होते हैं और मुंबई के साथ-साथ पूरा देश दहशत में आ जाता है.
धमाकों का सिलसिला
- दोपहर 1.28 पर हुए पहले धमाके के बाद बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज़ के बाहर चीख-पुकार हो ही रही थी कि 47 मिनट बाद मुंबई के भीड़भाड़ वाले इलाक़े कत्था बाज़ार आनाज मंडी में दूसरा धमाका होता है. यह धमाका बाज़ार में खड़े एक स्कूटर में होता है जिसमें पांच लोग मारे जाते हैं.
- तीसरा धमाका होता है शिवसेना भवन के पास एक पेट्रोल पंप पर. दोपहर के 2.30 बज रहा होता है और यहां फिर से एक धमाका होता है जिसमें चार लोग मारे जाते हैं और दर्जनों जख़्मी हो जाते हैं.
- शिवसेना भवन के पास हुए धमाके की आवाज़ से लोगों के सुन्न कान इससे पहले कि कुछ सुन पाते, महज तीन मिनट बाद एयर इंडिया बिल्डिंग के सामने चौथा धमाका होता है. बिल्डिंग के सामने खड़ी एक कार में विस्फ़ोट होता है. 20 लोग मारे जाते हैं. क़रीब 85 लोगों घायल होते हैं.
वर्ली का धमाका
- इसके बाद पांचवा और छठा धमाका एक साथ होता है. दोपहर 2.45 बजे माहिम और वर्ली के पासपोर्ट ऑफिस में एक साथ धमाका होता है. धमाका इतना जबरदस्त होता है कि दोनों जगहों पर 116 लोग मारे जाते हैं और करीब 230 लोग बुरी तरह ज़ख्मी हो जाते हैं. वर्ली का धमाका अब तक हुए सभी छह धमाकों में सबसे बड़ा था.
- मुंबई की सड़कों पर पुलिस और ऐंबुलेंस के सायरन की आवाज गूंजने लगती हैं. ठीक 20 मिनट बाद झावेरी बाजार सातवें धमाके से दहल उठता है. हीरे और जवाहरात से चमकने वाला यह बाजार काले धुएं से घिर जाता है. धमाके में 17 लोगों की मौत होती है और 60 के करीब जख्मी होते हैं.
- सिलसिला यहीं नहीं रुकता. दोपहर के 3 बजकर 10 मिनट हो रहा होता है कि बांद्रा के सी रॉक होटल के भीतर आठवां धमाका बहुत जोरदार होता है. यहां किसी की मौत नहीं होती.
कार में विस्फोट
- दो मिनट ही बीते थे कि तीसरे मिनट में शहर में नौवां धमाका होता है मशहूर प्लाजा सिनेमा की पार्किंग में. धमाके में दस लोग मारे जाते हैं.
- दोपहर के 3 बजकर 20 मिनट हो चुके थे. चारों तरफ चीख-पुकार मची थी कि दसवां धमाका होता है जुहू के सेंटूर होटल में. यहां भी पार्किंग में खड़ी एक कार में विस्फोट होता है. कुछ लोग जख्मी होते हैं.
- दहशत का अगला पड़ाव बना सहार हवाई अड्डा. दोपहर के साढ़े तीन बज रहे थे. हवाई अड्डा के बाहर ग्यारहवां धमाका होता है.
- बारहवां धमाका एयरपोर्ट के सेंटूर होटल के पास होता है. यहां दो लोग मारे जाते हैं.
इस तरह दोपहर डेढ़ बजे शुरू हुए धमाकों का सिलसिला दोपहर 3 बजकर 40 मिनट पर ख़त्म होता है. दो घंटे 12 मिनट चले एक के बाद एक 12 धमाकों से उठे धुआं छटा तो कुल 257 लाशें सामने आईं और 713 घायल जख़्मी हालात में नज़र आए.
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