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51 बच्चों की मौत, पर मरीज़ जाएं तो जाएं कहां
- Author, रोहित घोष
- पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
उत्तर प्रदेश के फ़र्रुख़ाबाद ज़िले के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में फिर दो बच्चों की मौत हो गई है. एक बच्चे की मौत सोमवार रात हुई तो दूसरे की मंगलवार सुबह.
इस तरह अस्पताल में पिछले एक महीने में मरनेवाले बच्चों की संख्या 51 हो गई है.
सोमवार को एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई थी कि 20 जुलाई से 21 अगस्त के बीच अस्पताल में 49 बच्चों की मौत हुई है.
इन सब के बावजूद अस्पताल परिसर में मरीज़ों का तांता लगा हुआ है.
गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज की तरह फ़र्रुख़ाबाद में भी बच्चों की मौत का कारण ऑक्सीजन की कमी होना बताया जा रहा है.
महंगाई इतनी कि मरीज़ कहां जाएं?
ज़िले के निजी अस्पताल इतने महंगे हैं कि लोग इस सरकारी अस्पताल में आने को मजबूर हैं.
सोमवार शाम अस्पताल का महिला इमरजेंसी वॉर्ड मच्छर मारने वाली दवाई के धुंए से भरा हुआ था. एक कमरे के बाहर दीवार से सटी कुर्सी पर धुंए के बीच एक तीमारदार मनोज यादव बैठे मिले.
उन्होंने बताया, "हमें भी पता है कि इस अस्पताल में 49 बच्चों की मौत हो गई है. हमें यह भी पता है यहां की व्यवस्था ठीक नहीं है. पर हम जाएं तो जाएं कहां? निजी अस्पताल इतने महंगे जो हैं. यहाँ पर सब कुछ मुफ्त में ही हो जाता है.''
मनोज यादव अपनी प्रसूता भाभी को अस्पताल में भर्ती कराने लाए हैं. उनके साथ उनका परिवार भी है.
'मौत के बारे में पता होता तो नहीं आता'
उन्हीं के पास एक अन्य तीमारदार अमित पांडेय ज़मीन पर चादर बिछा कर बैठे हुए हैं. उनकी पत्नी बीमार हैं और उनका इलाज चल रहा है.
अमित कहते हैं, "पिछले गुरुवार को मेरी पत्नी ने इसी अस्पताल में बच्चे को जन्म दिया था. मैंने अखबारों में पढ़ा कि इसी अस्पताल में 49 बच्चे ऑक्सीजन की कमी से मर गए हैं. अगर यह ख़बर मैंने पहले पढ़ी होती तो शायद इस अस्पताल में कभी नहीं आता."
हर दिन दो हज़ार मरीज़ आते हैं
सुभाष सक्सेना अपनी बहू का हाल-चाल जानने अस्पताल पहुंचे हैं. सोमवार को उनको पोता हुआ है.
वो कहते हैं, "मेरी बहू को सुबह ही भर्ती किया गया, यह जानने के बाद भी कि इस अस्पताल में बच्चों की मौतें हुई हैं. निजी अस्पतालों काफ़ी महंगे हैं. मेरी बहू और पोता दोनों ही इस समय ठीक हैं."
फ़र्रुख़ाबाद के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में न सिर्फ़ ज़िले के बल्कि आसपास के ज़िले के मरीज़ भी आते हैं. एक अनुमान के मुताबिक़ रोज़ क़रीब दो हज़ार की संख्या में मरीज़ यहां पहुंचते हैं.
मुकदमा दर्ज कराने के बाद हुई हड़ताल
अस्पताल निरीक्षण के दौरान ज़िलाधिकारी रविंद्र कुमार को बच्चों की मौत की जानकारी मिली. इसके बाद उन्होंने ज़िले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी उमाकांत पांडे और मुख्य चिकित्सा अधीक्षक अखिलेश अग्रवाल के ख़िलाफ़ पुलिस में मुक़दमा दर्ज करवाया है.
मुक़दमा दर्ज कराए जाने के बाद ज़िले के सभी सरकारी डॉक्टरों ने हड़ताल कर दी है. उन्होंने मामले पर रोष जताया है.
उधर प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव (स्वाथ्य) प्रशांत त्रिवेदी ने सोमवार को पत्रकारों को बताया की ज़िलाधिकारी द्वारा दर्ज कराए गए मुक़दमे के आधार पर किसी भी डॉक्टर के ख़िलाफ़ कोई कार्यवाई नहीं की जाएगी.
उन्होंने कहा, "ज़िलाधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधीक्षक को उनके पदों से हटाया जा रहा है."
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