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13 साल की लड़की हुई गर्भवती, गर्भपात की इजाज़त मांगी
रेप के बाद गर्भवती हुई मुंबई की 13 साल की लड़की के गर्भपात की इजाज़त के लिए उसके माता-पिता ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है.
भारत का कानून 20 हफ़्तों का गर्भ होने के बाद गर्भपात की इजाज़त तभी देता है जब मां की जान को ख़तरा हो. इस मामले में रेप पीड़िता का गर्भ 30 हफ़्तों का हो गया है.
माता-पिता को बेटी के गर्भवती होने का पता तब चला जब पेट मोटा होने का इलाज करवाने के लिए उसे डॉक्टर के पास ले गए.
लड़की ने अपने पिता के दोस्त पर बलात्कार का आरोप लगाया है, जिसे गिरफ़्तार कर लिया गया है.
हाल ही में सामने आया तीसरा मामला
चंडीगढ़ में 10 साल की रेप पीड़िता द्वारा बच्ची को जन्म देने के 10 दिनों के अंदर ही यह मामला सामने आया है.
चंडीगढ़ वाले मामले ने पूरी दुनिया में सुर्खियां बटोरी थीं, मगर कोर्ट ने यह कहते हुए अबॉर्शन की इजाज़त नहीं दी थी कि अब बहुत देर हो चुकी है.
मई में हरियाणा में भी इसी तरह का मामला सामने आया था, जहां सौतेले पिता पर 10 साल की बच्ची के रेप का आरोप लगा था. उस मामले में कोर्ट ने अबॉर्शन की इजाज़त दे दी थी.
कुछ ही दिनों में इस तरह के तीन मामले सामने आने को चिंताजनक बताया जा रहा है. मगर सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस तरह के और भी मामले हो सकते हैं, मगर वे सुर्खियां नहीं बटोरते क्योंकि उनका पता 20 हफ़्तों की समयसीमा के अंदर ही चल जाता है और माता-पिता पुलिस में शिकायत दर्ज नहीं करते.
भारत में ये हैं शोषण के आंकड़े
- हर 155 मिनट में 16 वर्ष से कम आयु के बच्चे का रेप होता है
- हर 13 घंटों में 10 साल के बच्चे से बलात्कार होता है
- 2015 में 10 हजार से ज्यादा बच्चों का रेप हुआ
- भारत में रहने वाली 24 करोड़ महिलाओं की शादी 18 साल से पहले हो गई थी
- सरकार द्वारा करवाए गए सर्वे में हिस्सा लेने वाले बच्चों में 53.22% का यौन शोषण हुआ था
- 50 फ़ीसदी शोषण करने वाले लोग बच्चों के परिचित और भरोसे वाले थे
स्रोत: भारत सरकार, यूनिसेफ
ये तीनों मामले इसलिए सुर्ख़ियों में आए क्योंकि इनमें लड़कियों के गर्भवती होने के बारे में बहुत देर से पता चला.
इन बच्चों को पता नहीं था कि उनके साथ क्या हुआ है. माता-पिता का भी ध्यान इस तरफ़ नहीं गया क्योंकि उनके लिए यह कल्पना करना आसान नहीं है कि उनकी बेटियां इतनी कम उम्र में गर्भवती हो सकती हैं.
मुंबई के गाइनकॉलजिस्ट डॉक्टर निखिल दतार ने बीबीसी को बताया कि इस मामले में भी ऐसा ही हुआ है. उन्होंने कहा, ''9 अगस्त को उसके माता-पिता उसे मेरे पास लेकर आए थे. उन्हें लगा कि बेटी को थॉइरॉइड या कोई और दिक्कत है, जिससे उसका वज़न बढ़ रहा है. मगर स्कैन में पता चला कि वह 27 हफ़्तों से गर्भवती है. इसलिए मैंने पुलिस को ख़बर दे दी.''
डॉक्टर दतार ने बताया कि स्वास्थ्य कारणों से मैंने लड़की का अबॉर्शन करवाने की सलाह दी है क्योंकि वह इसके लिए सक्षम नहीं है. साथ ही वह शारीरिक और मानसिक कष्ट से भी गुज़रेगी.
ह्यूमन राइट्स लॉ नेटवर्क (एचआरएलएन) के साथ काम करने वालीं वकील स्नेहा मुखर्जी ने बताया कि उन्होंने लड़की के माता-पिता की तरफ़ से याचिका दाख़िल की है. उन्होंने उम्मीद जताई कि फ़ैसला बच्ची के हक़ में आएगा.
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