उर्दू शायर रघुपति सहाय फ़िराक़ गोरखपुरी के चंद शेर...

फ़िराक़ गोरखपुरी उर्फ रघुपति सहाय उर्दू शायरी के बड़े नामों में से एक हैं.

28 अगस्त 1896 को जन्मे रघुपति सहाय अपनी उर्दू शायरी और मुंहफट मिजाज़ के लिए आज भी याद किए जाते हैं.

फ़िराक़ की शख़्सियत में इतनी पर्तें, इतने आयाम, इतना विरोधाभास और इतनी जटिलता थी कि वो हमेशा से अध्येताओं के लिए एक पहेली बन कर रहे.

फ़िराक़ ने भले ही 3 मार्च 1982 को दुनिया को अलविदा कह दिया था, लेकिन उनकी शायरी आज भी मौजूं है.

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