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'डेरा प्रेमियों को शहर में घुसने से रोकना असंभव था'
यौन शोषण मामले में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को दोषी करार दिए जाने के बाद पंचकुला में हिंसा भड़क उठी, जिसमें जान-माल का नुकसान हुआ है.
फ़ैसला सुनाए जाने से पहले ही पंचकुला में डेरा सच्चा सौदा समर्थकों की भीड़ जुटने लगी थी और अदालत ने भी हालात ख़राब होने की आशंका ज़ाहिर करते हुए सरकार को कड़े इंतज़ाम करने के निर्देश दिए थे. बावजूद इसके कई लोगों की जानें गईं.
इस मामले में बीबीसी संवाददाता हरिता काण्डपाल ने हरियाणा के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) राम निवास से बात की. जानें, क्या कहना था उनका:
इस मामले में हिंसा भड़कने का अंदेशा पहले ही था. फिर हालात कैसे बेकाबू हो गए?
यह बड़ी घटना थी. लोगों की भावनाओं से जुड़ा मामला था इसलिए प्रशासन ने पहले ही पूरी तैयारी कर ली थी. फ़ैसला आने के बाद समर्थकों की तरफ़ से प्रतिक्रिया आई मगर पुलिस ने 4 घंटों में ही हालात काबू में कर लिए.
शाम 7 बजे के बाद से एक भी दंगाई मौजूद नहीं है, मगर इस प्रक्रिया में कुछ मौतें हुई हैं और कुछ लोग ज़ख़्मी हुए हैं. मीडिया के वाहनों को भी नुकसान पहुंचा है. मगर सरकार ने फ़ैसला किया है कि मीडिया और अन्य लोगों को हुए नुकसान की भरपाई की जाएगी। साथ ही हाई कोर्ट ने डेरा की प्रॉपर्टी अटैच करने का आदेश दिया है. इसे अटैच करके यह भरपाई की जाएगी.
कोर्ट ने कहा था कि सरकार और पुलिस सुनिश्चित करे कि ऐसी घटना न हो और डेरा के लोगों को वापस भेजा जाए. तब सरकार क्यों नहीं जागी?
लॉ एंड ऑर्डर की सिचुएशन बहुत परिवर्तनशील होती है. भारी तादाद में डेरा समर्थक इकट्ठे हो गए. पंचकुला चारों तरफ से खुला हुआ इलाका है. एक तरफ़ चंडीगढ़ है, हिमाचल है और हरियाणा है. इसे कांटेदार तार लगाकर नियंत्रित नहीं किया जा सकता.
सड़कों पर वाहनों को तो रोका गया, मगर लोग चारों तरफ़ से पैदल गए. अगर पूरे ही शहर को पूरी तरह सील करके आम लोगों के आने-जाने को भी बंद कर दिया जाता, तब शायद संभव होता.
जगह-जगह इतने लोग इकट्ठा हुए थे. प्रशासन उन्हें जमा होने से तो रोक सकता था?
शहर के पार्कों में जो लोग बैठे थे, उन्हें घग्गर की तरफ़ खदेड़ दिया गया था. इसीलिए शहर बच गया. वहां कोई नुकसान नहीं हुआ.
मगर जानें तो कई लोगों की गई हैं?
जिनकी जानें गईं वे डेरा प्रेमी हैं.
जानें तो जानें हैं, फिर डेरा प्रेमियों की हों या आम इंसान की...
जानें गई हैं, मगर उन लोगों ने उपद्रव किया है, प्रॉपर्टी को नुकसान पहुंचाया है, कानून को अपने हाथ में लिया है. ऐसी स्थिति में जान-माल के नुकसान को बचाने के लिए ही सुरक्षाबलों को कार्रवाई करनी पड़ी.
इससे पहले अदालत ने यह भी कहा था कि इसमें मिलीभगत नज़र आ रही है. जब कहा गया था कि डेरा प्रेमियों को हटाया जाए, फिर लोग कैसे इकट्ठा हो गए...
किसी तरह की मिलीभगत का सवाल ही पैदा नहीं हो सकता. किस तरह की मिलीभगत होगी डेरा प्रेमियों से? हर कोई अपनी ड्यूटी कर रहा है.
लोग इतनी तादाद में इकट्ठा हो गए थे और वे भावनात्मक रूप से उत्तेजित थे. उनसे निपटा गया. चार घंटे में स्थिति काबू में की गई. हिंसा को टाला गया है शहर में. किसी की निजी संपत्ति को नुकसान नहीं होने दिया गया है. ज्यादा नुक़सान मीडिया के वाहनों को हुआ है.
जब जाट आरक्षण हुआ था, तब भी हरियाणा बुरी तरह जला था. और अब अदालत की चेतावनी के बावजूद ऐसा हुआ...
जाट आरक्षण आंदोलन से इसकी तुलना न करें. उस आंदोलन बड़े स्तर पर था. अदालत के बिना भी प्रशासन पूरी तरह चुस्त-दुरुस्त था. हमने सुरक्षा बल मंगवाए थे, ड्यूटियां लगाई थीं. सारी कार्यवाही हो रही थी.
पूरे हरियाणा में कानून-व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त रखने की कोशिश हुई है और काफ़ी हद तक इसमें कामयाब रहे हैं. मुख्य ऐक्शन पंचकूला में होना था, इसलिए यहां ऐसे हालात पैदा हुए.
जब धारा 144 की बात हुई तो क्या सरकार की तरफ़ से यह कहा गया था कि लोगों के जमा होने पर पाबंदी नहीं है, हथियारों पर पाबंदी नहीं है. साथ ही इस मामले में सरकार की नाकामी नहीं दिख रही?
जहां तक धारा 144 का ताल्लुक है, जो एक अधिकारी ने ऑर्डर किए थे, वे दोषपूर्ण थे. उनमें सिर्फ़ हथियारों को लेकर बात की गई थी. उसमें कार्रवाई होगी मगर वह मामला अलग है. बावजूद इसके अर्धसैनिक बलों और सेना ने उपद्रवियों पर काबू पाकर शहर को बचाया है.
अब 28 तारीख को सज़ा सुनाई जानी है. उस वक्त ऐसा न हो, इसके लिए प्रशासन तैयार है?
प्रशासन पूरी तरह तैयार है, ऐसी घटना फिर नहीं होगी.
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