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सुप्रीम कोर्ट ने बताया, क्या है प्राइवेसी, 7 अहम बातें
- Author, विभुराज
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक फैसले में इस सवाल पर काफी हद रोशनी डाली है कि क़ानून की नज़र में प्राइवेसी दरअसल क्या चीज़ है और इसमें दखलंदाज़ी करने की सरकार को किस हद तक आज़ादी है.
फ़ैसले की सात ख़ास बातें
- जीवन और निजी स्वतंत्रता का अधिकार एक दूसरे से अलग नहीं किए जा सकते हैं. ये वो अधिकार हैं जो मनुष्य के गरिमापूर्ण अस्तित्व का अभिन्न हिस्सा हैं. ये अधिकार संविधान ने गढ़े नहीं हैं बल्कि संविधान ने इन्हें मान्यता दी है.
- प्राइवेसी के अधिकार को संविधान संरक्षण देता है और यह जीवन और निजी स्वतंत्रता की गारंटी से पैदा होता है. प्राइवेसी का अधिकार, स्वतंत्रता और सम्मान की गारंटी देने वाले संविधान के अन्य मौलिक अधिकारों से भी मिलता है. जीवन और स्वतंत्रता संविधान ने नहीं दी है बल्कि केवल इन अधिकारों में राज्य के दख़ल देने की सीमा तय की है.
- प्राइवेसी के संवैधानिक अधिकार को क़ानूनी मान्यता देना संविधान में कोई बदलाव करना नहीं है. और न ही कोर्ट कोई ऐसा संवैधानिक काम कर रहा है जो संसद की ज़िम्मेदारी थी.
- प्राइवेसी की बुनियाद में निजी रुझानों या झुकाव को बचाना, पारिवारिक जीवन की पवित्रता, शादी, बच्चे पैदा करना, घर और यौन रुझान जैसी चीजें शामिल हैं. एकांत में अकेले रहने का अधिकार भी प्राइवेसी है. प्राइवेसी किसी व्यक्ति की निजी स्वायत्ता की सुरक्षा करती है और ज़िंदगी के हर अहम पहलू को अपने तरीके से तय करने की आज़ादी देती है. अगर कोई व्यक्ति सार्वजनिक जगह पर हो तो ये इसका मतलब प्राइवेसी का अधिकार ख़त्म हो जाना या छोड़ देना नहीं है.
- संविधान अनुच्छेद 21 के तहत जिन मौलिक अधिकारों की गारंटी देता है, प्राइवेसी कोई अपने आप में पूर्ण अधिकार नहीं है. प्राइवेसी की सरहद लांघने वाले किसी भी क़ानून को वाजिब, सही और तर्कसंगत होना होगा.
- प्राइवेसी के नकारात्मक और सकारात्मक दोनों पहलू हैं. नकारात्मक पहलू राज्य को नागरिकों के जीवन और निजी स्वतंत्रता के अधिकार का हनन करने से रोकता है. और सकारात्मक पहलू राज्य पर इसके संरक्षण की ज़िम्मेदारी देता है.
- सूचना की निजता प्राइवेसी के अधिकार का ही एक चेहरा है. प्राइवेसी को न केवल सरकार से ख़तरा है बल्कि गैरसरकारी तत्वों से भी ख़तरा है. हम सरकार से ये सिफारिश करते हैं कि डेटा प्रोटेक्शन के लिए कड़ी व्यवस्था की जाए.
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