खतौली में जानकर ताक पर रखे गए नियम?

उत्तर प्रदेश के मुज़फ़्फ़रनगर में कलिंग-उत्कल एक्सप्रेस के पटरी से उतरने से हुआ भीषण हादसा

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उत्तर प्रदेश के मुज़़फ्फ़रनगर में खतौली के पास कलिंग-उत्कल एक्सप्रेस के पटरी से उतरने को लेकर रेलवे ने कार्रवाई शुरू कर दी है.

चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है और उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक, दिल्ली के डीआरएम के अलावा रेलवे बोर्ड के मेंबर (इंजीनियरिंग) को छुट्टी पर भेज दिया गया है.

इस हादसे के कारणों की जांच हो रही है.

साल 2010 से 2013 तक भारतीय रेलवे बोर्ड के सदस्य रहे आदित्य प्रकाश मिश्र ने बीबीसी संवाददाता अमरेश द्विवेदी से बातचीत में कहा इस हादसे में बड़ी मानवीय लापरवाही नज़र आती है. पढ़िए कि उन्होंने क्या कहा-

कहा जा रहा है कि जहां हादसा हुआ, वहां पटरी पर काम चल रहा था. क्या प्रोटोकॉल होता है पटरी पर काम करने के दौरान?

दो तीन तरह के काम होते हैं. एक रूटीन वर्क होता है. इसमें ये जानकारी होती है कि कौन सा काम बिना ब्लॉक के होगा, कौन सा काम ब्लॉक में होगा.

किस काम में गतिनियंत्रण यानी स्पीडब्रेक लगाया जाएगा. लेकिन कुछ ऐसे काम होते हैं जिसमें रेल को पटरी से हटाया जाएगा या पटरी से छेड़छाड़ की जाएगी तो उसमें आवश्यक रूप से ट्रैफ़िक ब्लॉक लेना पड़ता है.

सिग्नल और इंजीनियरिंग वाले दो विभाग हैं जो ट्रैक पर काम करते हैं, वो इसके लिए स्टेशन मास्टर को प्रार्थना पत्र देते हैं. जिसमें ये बताया जाता है कि इस काम के लिए कितना समय लगेगा.

इसके बाद स्टेशन मास्टर कंट्रोल से बात करता है और कंट्रोल गाड़ियों की स्थिति देखकर उस ब्लॉक की अनुमति देता है या नहीं देता है.

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अगर ब्लॉक की अनुमति मिल जाती है तो स्टेशन मास्टर लिखित में इंस्पेक्टर को देता है कि आपको इस जगह से इस जगह तक कितने समय का ब्लॉक दिया जाता है. इसके बाद कार्यस्थल से 600 मीटर और 1200 मीटर की दूरी पर लाल झंडे लगा दिए जाते हैं जो यह सूचित करता है कि इस जगह पर गाड़ी नहीं चलेगी.

इसकी सूचना ड्राइवर को भी पिछले स्टेशन पर दी जाती है. यदि ड्राइवर इसको भूल भी जाए तो फ़्लैग को देखकर उसे याद आ जाएगा कि वहां पर गाड़ी नहीं चलेगी. थोड़ा सा भी ख़तरे का काम होता है तो ब्लॉक लेकर ही किया जाता है.

यहां पर जो टीवी में दिखाया जा रहा है उससे तो लग रहा है कि वहां ब्लॉक नहीं लिया गया था. लेकिन वहां लोग बताते हैं कि मशीन उपलब्ध थी. तो इस बात की संभावना जाहिर की जा रही है कि शायद वहां पर ट्रैक वर्किंग मशीन थी. तो इस बात की संभावना जताई जा रही है कि शायद वहां पर कोई न कोई कार्य चल रहा था.

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ट्रेन के पांच डिब्बे निकल जाते हैं उसके बाद वो पटरी से उतरी है. तो क्या इसकी संभावना है?

ट्रेन का पटरी से उतरना कई कारणों से होता है. मुख्यतः यह ट्रैक में ख़राबी या रोलिंग स्टॉक यानी पहियों में गड़बड़ी की वजह से होता है. ये कई बार देखा गया है कि इंजन और कुछ डिब्बे निकल गए इसके पीछे के डिब्बे बाद में गिरते हैं. यह भी हो सकता है कि कोच में कुछ कमी हो. जो डिब्बा सबसे पहले गिरा है उसमें कुछ गड़बड़ी हो सकती है.

अब जो एलएचबी कोच बनने लगे हैं उनमें एंटी क्लाइम्बिंग फ़ीचर लगाया जाता है. ताकि कोई ऐसी दुर्घटना हो तो डिब्बे एक के ऊपर एक चढ़े नहीं. जब ऐसी भीषण दुर्घटना होती है तो डिब्बे के एक दूसरे पर चढ़ने की वजह से हताहतों की संख्या बढ़ जाती है. लेकिन उत्कल एक्सप्रेस में आईसीएफ कोच यानी पुराने वाले कोच लगे थे. तभी दुर्घटना के बाद डिब्बे एक दूसरे के ऊपर चढ़ गए.

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विदेश में इतनी दुर्घटनाएं नहीं होतीं. क्या वजह है कि इन हादसों को रोका नहीं जा रहा है?

शायद ही किसी देश में इतनी गाड़ियां चलती हैं. हमारे यहां गाड़ियां बहुत ज्यादा चल रही हैं. हमारे यहां यात्रियों की संख्या बहुत ज्यादा है.

8000 से 9000 पैसेंजर ट्रेनें और 11-12 हज़ार मालगाड़ियां रोज चलती हैं. प्रति मिलियन सकल टन किलोमीटर (जीटीकेएम) के आधार पर हमारे यहां दुर्घटना की संख्या बहुत ज्यादा नहीं है.

लेकिन हम जो भी निर्माण करते हैं वो उतना मज़बूत नहीं होता क्योंकि खर्च बहुत महत्वपूर्ण है. हम आर्थिक रूप से देखते हैं. हम जो कंस्ट्रक्शन करते हैं वो विदेश की तुलना में उतना अच्छा नहीं होता है. सस्ता बनाते हैं तो, जो मज़बूती देनी चाहिए हम नहीं दे पाते.

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अगर वहां काम चल रहा था जिसकी पुष्टि नहीं हुई है, तो ट्रेन की रफ़्तार 15-20 किलोमीटर होनी चाहिए थी लेकिन वो 100 किलोमीटर की रफ़्तार से चल रही थी. तो क्या ये मानवीय भूल है?

क़रीब आधी से अधिक दुर्घटनाएं मानवीय भूल की वजह से होती हैं. बार-बार निर्देश दिया जाता रहा है कि अगर आपका काम महत्वपूर्ण है तो ब्लॉक लेकर ही काम करें.

इंजीनियरिंग और सिग्नल विभाग को निर्देश है कि अगर काम बहुत महत्वपूर्ण है और आपको ब्लॉक नहीं मिल रहा तो आप बैनर फ़्लैग लीजिए और फोर्स ब्लॉक कीजिए और फिर काम कीजिए. लेकिन किसी भी सूरत में आप स्टेशन मास्टर को सूचित जरूर करें और बैनर फ़्लैग के बिना काम नहीं करें. यहां किसी ने जानबूझ कर नियमों को ताक पर रख दिया. अगर किसी ने ऐसा किया है तो यह बहुत बड़ी गलती है.

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