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'अचानक तीन झटके लगे और रेलगाड़ी पलट गई'
- Author, कुलदीप मिश्रा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, मुज़फ़्फ़रनगर
उत्तर प्रदेश के मुजफ़्फ़रनगर के पास हुए ट्रेन हादसे में अब तक 21 लोगों की मौत हुई है.
मुज़फ़्फ़रनगर के डीएम जीएस प्रियदर्शी ने बीबीसी से बताया, "मेरे हिसाब से अब तक मरने वालों की संख्या 21 है और घायलों की संख्या 80 से 85 के बीच है. सबसे ज़्यादा घायल मुज़फ़्फ़रनगर ज़िला अस्पताल में हैं. इसके बाद मुज़फ़्फ़रनगर मेडिकल कॉलेज़ और मेरठ मेडिकल कॉलेज़ में भर्ती हैं."
मुजफ़्फ़रनगर ज़िला अस्पताल के इएमओ डॉक्टर मशगूर आलम ने बीबीसी से बात करते हुए इस हादसे में घायल हुए लोगों से जुड़ी जानकारी दी.
वे कहते हैं, "इस हादसे के 53 घायल यात्री मुज़फ़्फ़रनगर ज़िला अस्पताल में भर्ती हैं और ख़तरे से बाहर हैं. यहां पहुंचे चार घायलों की हालत गंभीर थी जिन्हें मेरठ मेडिकल कॉलेज़ भेज दिया गया था."
उत्कल एक्सप्रेस की पेंट्री कार में काम करने वाले करण सिंह तोमर ने हादसे के बारे में बताया, "मैं जगन्नाथपुरी से आ रहा था. मैं पेंट्री कार में काम करता हूं. हादसे के वक़्त मैं काउंटर पर बैठा था. तभी अचानक तीन झटके लगे. और, गाड़ी पलट गई. इसके बाद गाड़ी में करेंट आने लगा. पूरी गाड़ी में करंट आ रहा था."
स्थानीय नागरिकों ने की मदद
तोमर बताते हैं, "मुझे पहले पेंट्री वालों ने मलबे से बाहर आने में मदद की. इसके बाद एक स्थानीय नागरिक मुझे बाइक पर बिठाकर मेडिकल स्टोर तक लेकर आया, जहां पट्टी हुई. फ़िर मुज़फ़्फ़रनगर आए."
चश्मदीद गवाह मोहम्मद इसरार कहते हैं, "ये पांच बजकर चालीस मिनट का हादसा है. और हम पांच-सात मिनट में पहुंच गए. हमारी बस्ती के सामने का ही हादसा है. हादसे का मंजर कुछ ऐसा था कि औरतों की चीख़-पुकार, बच्चे रो रहे थे. हमने तुरंत गैस-कटर और सीढ़ियों की व्यवस्था की और तक़रीबन ढाई सौ लोगों को मलबे से निकाला."
एक अन्य चश्मदीद मोहम्मद सलीम बताते हैं, "पुलिस और प्रशासन हादसे के करीब डेढ़ घंटे के बाद घटनास्थल पर पहुंचा है. हमनें लोगों को ट्रेन से बाहर निकाला. जो ज़्यादा गंभीर थे उन्हें चारपाई में रख़कर नज़दीकी अस्पताल में भर्ती कराया."
हादसे में घायल हुए अपने बेटे को लेने पहुंचे मोहम्मद ज़ुल्फ़िकार अली बताते हैं, "ये मेरठ से आ रहे थे और जनरल कोच में थे. इन्हें बचाने वाले स्थानीय लोगों ने फ़ोन करके मुझे इस हादसे की जानकारी दी."
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