'नदी तुम शांत हो जाओ, तुम्हें सोने का हार देंगे'

    • Author, नीरज सहाय
    • पदनाम, मधुबनी से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए

"छोटकी बहिनिया कमला हई बड़ी छई उताउर,

ओहो से उ टिमकी कमला हे बना देबे गिर- मल्हार"

बिहार के मधुबनी ज़िले के झंझारपुर अनुमंडल की एक बुजुर्ग महिला यह पंक्तियाँ गाते हुए और पुचकारते हुए अपने पोतों को तटबंध पर सुला रही थी.

इस गाने से महिला कमला नदी को अपने रौद्र रूप को शांत करने का आग्रह कर रही थी. उसका घर कमला नदी के उफनने से पानी में समा गया है.

लेकिन, इस बुजुर्ग महिला के गीतों में बाढ़ पीड़ित होने का दुःख अकेला नहीं है.

प्रतापपुर की रहने वाली 50 साल की लीला देवी अपनी आपबीती शिकायत भरे अंदाज़ में सुनाती हैं.

वो कहती हैं, "हम लोग घर छोड़ कर तीन दिनों से तटबंध पर हैं."

"बारिश होने के बावजूद प्रशासन की ओर से पॉलिथीन शीट नहीं दिया गया है. प्रशासन के लोग दावा कर रहे हैं कि कमला नदी का उफान कम हुआ है, लेकिन ऐसा नहीं है. हम अपने बच्चों और मवेशियों के साथ तटबंध पर रहने को मजबूर हैं."

उसी गाँव के राजाराम पासवान कहते हैं कि उनके पास पीने लायक पानी भी नहीं है.

वो कहते हैं, "भोजन के लिए इधर से उधर भटक रहे हैं. तटबंध में रिसाव अब भी जारी है. डर बना हुआ है."

उधर प्रशासन का दावा है कि तटबंध में जहाँ से कमला नदी के पानी का रिसाव हुआ था उसे रेत से भर दिया गया है.

दरअसल, नेपाल में भारी बारिश की वजह से कमला नदी की लहरें उफान पर है, जिसका असर तटबंधों पर साफ़ दिख रहा है.

दो हज़ार से अधिक लोग तटबंध को पिछले तीन दिनों से अपना अस्थायी ठिकाना बनाये हुए हैं.

इससे वहां के प्रशासन के राहत संबंधी दावों पर सवाल खड़ा हो रहे है.

बिहार के सीमांचल जिलों - पूर्णिया, मधुबनी, कटिहार, अररिया, किशनगंज, गया, सहरसा, सुपौल, मधेपुरा में भारी बारिश के कारण बाढ़ की स्थिति है.

राज्य की दो बड़ी नदियां कोसी और कमला उफान पर हैं. जहां कोसी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है , झंझारपुर में कमला खतरे के निशान से ऊपर बह रही है.

बाढ़ के कारण राज्य के विभिन्न हिस्सों में यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है.

बिहार में बाढ़ की स्थिति के बारे में मुख्यमंत्री नीतीश में रविवार को प्रधानमंत्री से फ़ोन पर बात कर उन्हें स्थिति के बारे में बताया.

पूर्व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने सरकार पर आरोप लगाया कि मौसम विभाग की चेतावनी की जानकारी होने के बावजूद समय रहते ज़रूरी कदम नहीं उठाए गए.

एक ट्वीट में उन्होंने लिखा कि मौसम विभाग ने 15 दिन पहले ही बारिश की चेतावनी दी थी.

बिहार के अलावा नेपाल, असम, हिमाचल प्रदेश में भी भारी बारिश के कारण स्थिति चिंताजनक बनी हुई है.

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