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गोरखपुर त्रासदी: इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने कहा- सबकी ज़िम्मेदारी तय हो
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल को सस्पेंड किए जाने के मामले में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन का कहना है कि इस प्रकरण में राज्य के स्वास्थ्य विभाग की ज़िम्मेदारी भी तय होनी चाहिए.
बीते दिनों मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की सप्लाई बंद होने के कारण एक दिन में 30 से भी ज़्यादा बच्चों के मौत हो गई थी. बच्चों की मौत का आंकड़ा रविवार तक और बढ़ गया.
मामले में कार्रवाई करते हुए प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. राजीव मिश्रा को सस्पेंड कर दिया. बाद में डॉ. मिश्रा ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया.
सरकार ने ऑक्सीजन सप्लायर की भूमिका की जांच के लिए मुख्य सचिव की अगुवाई में जांच समिति भी बनाई.
बीबीसी संवाददाता ब्रजेश मिश्र ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. केके अग्रवाल के बात की और पूरे मामले पर एसोसिएशन के रुख़ को जानने की कोशिश की.
"एडवांस में खरीदें डिवाइस"
डॉ. अग्रवाल का कहना है कि मामले को लेकर रविवार को एसोसिएशन की बैठक हुई जिसमें में तीन रेजोल्यूशन पास हुए हैं और सरकार को भेजे गए हैं.
उन्होंने कहा, "पहली बात ये कि जिस तरह प्रिंसिपल को ज़िम्मेदार ठहराते हुए कार्रवाई की गई है वह ग़लत है. अगर प्रिंसिपल को ज़िम्मेदार माना जा रहा है तो राज्य के स्वास्थ्य विभाग की ज़िम्मेदारी भी तय होनी चाहिए."
ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी के भुगतान को लेकर उन्होंने कहा, "किसी संस्था का पैसा नहीं रोका जाना चाहिए. अस्पतालों में एडवांस में चीजें ख़रीदी जाएं, ख़ासकर जीवन रक्षक उपकरण और लाइफ़ सेविंग डिवाइस ताकि समय रहते लोगों की जान बचाई जा सके."
"तीन महीने या छह महीने तक पैसा नहीं रोका जाए."
उन्होंने बताया कि एसोसिएशन ने जो तीसरा रेजोल्यूशन पास किया है उसके तहत मांग की गई है कि ऐसी घटनाओं में 72 घंटों के अंदर जांच करके कारण पता किए जाने चाहिए, ताकि आगे होने वाली मौतों को रोका जा सके.
डॉ. केके अग्रवाल कहते हैं कि एसोसिएशन की एक टीम गोरखपुर भेजी गई है जो सोमवार को पूरे मामले पर रिपोर्ट देगी.
"अगर ऑक्सीजन सप्लाई बंद होने के कारण मौत हुई है तो दोषियों को सजा मिले और अगर बीमारी फैल रही है तो उसके बारे में बताया जाए ताकि प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टरों और लोगों को इस बारे में पता चले."
सरकारी डॉक्टरों के निजी प्रैक्टिस करने के मुद्दे पर उन्होंने कहा, "इससे किसी की मौत नहीं होती लेकिन अगर कोई दोषी है और ग़ैरकानूनी काम कर रहा है तो उस पर कार्रवाई होनी चाहिए."
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