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योगी के ना आने का मलाल है गोरखपुर के लोगों को
- Author, समीरात्मज मिश्र
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी के गृह जनपद गोरखपुर में दर्जनों बच्चों की मौत पर शनिवार को हंगामा मचा हुआ था और क़रीब तीन सौ किमी दूर इलाहाबाद में मुख्यमंत्री योगी समेत केंद्र और राज्य सरकार के तमाम मंत्री और बड़े अधिकारी गंगा ग्राम योजना का शुभारंभ कर रहे थे.
लगभग उसी समय योगी सरकार के दो मंत्री गोरखपुर में इस घटना के बारे में पत्रकारों से बात कर रहे थे. हालांकि तब तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भी तब तक कई ट्वीट आ गए थे और देर शाम मुख्यमंत्री योगी ने मंत्रियों और अधिकारियों के साथ बैठक करके शाम को इस मामले में मीडिया से बात की.
लेकिन गोरखपुर में हर ओर इसी बात की चर्चा थी कि जिस इंसेफ़ेलाइटिस बीमारी को लेकर योगी बतौर सांसद इतने संवेदनशील रहते थे, उसी वजह से हुई इन मौतों पर वो न तो ख़ुद यहां आए और न ही अपने किसी मंत्री को भेजा.
भाजपा से पहले पहुंची कांग्रेस
स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह और चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन घटना के पूरे एक दिन बीत जाने के बाद यहां पहुंचे जबकि उनसे पहले कांग्रेस पार्टी का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल शनिवार की सुबह ही अस्पताल पहुंचकर पीड़ितों से मिल चुका था जिसमें गुलाम नबी आज़ाद, राजबब्बर, संजय सिंह और प्रमोद तिवारी शामिल थे.
यही नहीं, अस्पताल में मौजूद तमाम लोगों का कहना था कि बीजेपी का कोई स्थानीय नेता, मंत्री और विधायक भी ज़िदगी और मौत से जूझ रहे बच्चों को देखने नहीं पहुंचा, जबकि आस-पास की लगभग सभी सीटों पर बीजेपी के ही सांसद और विधायक हैं.
हालांकि गोरखपुर में बीजेपी के ज़िलाध्यक्ष जनार्दन तिवारी का कहना था कि शुक्रवार की शाम कुछ विधायक मरीजों को देखने गए थे, लेकिन वहां मौजूद लोगों को इस बात की जानकारी नहीं थी और न ही किसी ने इसकी पुष्टि की.
ये बात अलग है कि ये विधायक ज़िलाधिकारी की ओर से बुलाई गई एक बैठक में शामिल होने आए थे.
'कहीं योगी नाराज़ न हो जाएं'
जनार्दन तिवारी से जब ये पूछा गया कि क्या वो ख़ुद गए थे, तो इस सवाल का जवाब दिए बिना उन्होंने फ़ोन काट दिया.
लंबे समय से बीजेपी को कवर कर रहे गोरखपुर के एक पत्रकार का कहना था, "जिस तरह से केंद्र में मोदी हैं, वैसे ही योगी भी हैं. लोग समझ नहीं पा रहे हैं कि वहां जाने से योगी की निग़ाह में नंबर बढ़ेंगे या फिर उनकी नाराज़गी मोल लेनी पड़ेगी. तमाम नेता इसी डर के मारे यहां आने और मीडिया का सामना करने से बच रहे हैं.
सिद्धार्थ नाथ सिंह और आशुतोष टंडन गोरखपुर आने के बावजूद उन परिवारों से नहीं मिले जिनके बच्चों की मौत हुई थी. इस बात को लेकर लोगों में काफी ग़ुस्सा भी था.
योगी के ख़िलाफ विरोध प्रदर्शन भी
अस्पताल के बाहर खड़े कुछ मरीजों के परिवार वालों से जब इस बारे में बात की गई तो सिद्धार्थनगर से आए बुज़ुर्ग मेवालाल का कहना था, "मरने वाले सब ग़रीब परिवारों के बच्चे हैं. ग़रीबों का हाल लेने की किसे फ़ुरसत है और किसे ज़रूरत है?"
बीआरडी मेडिकल कॉलेज की इस घटना को लेकर लोगों ने मुख्यमंत्री योगी पर अपनी नाराज़गी भी जताई. एक ओर जहां मेडिकल कॉलेज परिसर में योगी सरकार के मंत्रियों के आने से पहले लोगों ने राज्य सरकार के ख़िलाफ़ जमकर नारेबाज़ी की वहीं विश्वविद्यालय के पास कुछ लोगों ने मुख्यमंत्री योगी के पुतले भी फूंके.
बहरहाल शनिवार की शाम तक इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सक्रियता के बाद मुख्यमंत्री भी सक्रिय हुए. मोदी की प्रेस कांफ्रेंस में मौजूद केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने बताया कि प्रधानमंत्री ने उन्हें ख़ासतौर पर गोरखपुर जाकर स्थिति का जायज़ा लेने के कहा है.
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