You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
हामिद अंसारी पर नरेंद्र मोदी की चुटकी: 'कोई छटपटाहट रही होगी'
- Author, नितिन श्रीवास्तव
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
भारत के निवर्तमान उप-राष्ट्रपति हामिद अंसारी ने राज्य सभा में अपने विदाई भाषण में अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा की बात दोहराई है.
राज्य सभा में सभी का धन्यवाद देते हुए उन्होंने कहा, "मैं आज पूर्व राष्ट्रपति एस राधाकृष्णन के वही शब्द दोहराना चाहता हूँ जो मैंने 2012 में कहे थे. एक लोकतंत्र की पहचान इस बात से होती है कि वो अपने अल्पसंख्यकों को कितनी सुरक्षा दे सकती है. साथ ही किसी लोकतंत्र में अगर विपक्ष को सरकारी नीतियों की समीक्षा या आलोचना करने का अधिकार नहीं मिलता तब वो तानाशाही में तब्दील हो जाती है".
प्रधानमंत्री का उपराष्ट्रपति पर तंज़
हामिद अंसारी के इस बयान के पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदन में उनके कार्यकाल की तारीफ़ भी की और चुटकी भी ली.
उन्होंने कहा, "हामिद अंसारी और उनके पूर्वजों का सार्वजनिक जीवन में सराहनीय योगदान रहा है और विदेश नीति मामलों में काफ़ी कुछ सीखने का मौका मिला है और राजनयिक के तौर पर भी ."
इसके बाद प्रधानमंत्री ने कहा, "बतौर राजनयिक आपने पश्चिम एशियाई देशों में एक लंबा समय बिताया और उसी दायरे में ज़िन्दगी के बहुत वर्ष आपके गए. उसी माहौल में, उसी सोच में, उसी डिबेट में, ऐसे लोगों के बीच में रहे. वहां से रिटायर होने के बाद ज़्यादातर काम वहीं रहा आपका, माइनॉरिटी कमीशन हो या अलीगढ़ यूनिवर्सिटी हो, दायरा आपका वही रहा."
'आज के बाद आपको मुक्ति का आनंद रहेगा'
उन्होंने आगे कहा, "पिछले दस वर्षों में ये संविधान संबंधित काम आपके ज़िम्मे आया और आपने उसे बखूबी निभाया. हो सकता है शायद कोई छटपटाहट रही होगी भीतर आपके अंदर भी, लेकिन आज के बाद शायद वो संकट आपको नहीं रहेगा. मुक्ति का आनंद भी रहेगा और अपनी मूलभूत प्रवृत्ति के अनुसार कार्य करने का, सोचने का और बात बताने का अवसर भी मिलेगा".
ग़ौरतलब है कि पिछले छत्तीस घंटों के दौरान हामिद अंसारी ने कुछ साक्षात्कारों में अपने विचारों को खुल कर रखा था.
राज्य सभा टीवी को दिए इंटरव्यू में कहा था, "देश के मुस्लिमों में बेचैनी और असुरक्षा की भावना दिखाई पड़ती है."
'प्रधानमंत्री को चुभे अंसारी के विचार'
उन्होंने ये भी कहा था कि, "असहनशीलता के मुद्दे को उन्होंने प्रधानमंत्री और कैबिनेट सदस्यों के सामने भी उठाया था".
जानकारों का मानना है कि हो सकता है कि प्रधानमंत्री ने हामिद अंसारी के बयान के बाद ही चुटकी लेते हुए मुस्कुराते हुए सदन में अपनी बात रखी.
राजनीतिक विश्लेषक नीरजा चौधरी ने कहा, "हल्का व्यंग्य था. हालांकि उन्होंने कहा नहीं लेकिन पश्चिम एशिया में अनुभव को लेकर प्रधानमंत्री शायद उनके दायरे को सीमित करना चाह रहे हों. लेकिन अंसारी साहब ने अल्पसंख्यकों के बारे में जो अपने विचार रखे हैं वे कहीं न कहीं प्रधानमंत्री और भाजपा को चुभे तो हैं".
इस तरह की विदाई नहीं
सवाल ये भी उठता है कि क्या एक संवैधानिक पद के विदाई समारोह में इस तरह का संवाद पहले भी हुआ है. वरिष्ठ विश्लेषक नीरजा चौधरी को लगता है, "उनकी याददाश्त में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ है".
उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री भी व्यंग्य कस सकते हैं और उप-राष्ट्रपति भी जाते-जाते अपनी बात रख सकते हैं. लोकतंत्र में मतभेद तो होते ही हैं. लेकिन जो दिख रहा है वो थोड़ी टकराव वाली स्थिति है जो असमान्य है".
इससे पहले गुरूवार को संसद में वित्त मंत्री अरुण जेटली समेत कई सत्ता पक्ष और विपक्षी सांसदों ने हामिद अंसारी के कार्यकाल की तारीफ़ की और उनका धन्यवाद दिया.
कांग्रेस नेता ग़ुलाम नबी आज़ाद ने कहा, "मुझे अपने राजनीतिक करियर में राज्यसभा के सात सभापतियों के साथ काम करने का मौका मिला और आपके साथ बहुत नज़दीक से काम करने का अच्छा अनुभव रहा".
नई बहस
हालांकि सच ये भी है कि अल्पसंख्यक समुदाय पर हामिद अंसारी के विचारों से एक नई बहस ज़रूर छिड़ गई है.
भारतीय जनता पार्टी प्रवक्ता कैलाश विजयवर्गीय ने संसद से बाहर निकलकर कहा, "ये राजनीतिक बयान हैं और अगर छटपटाहट थी तो इस्तीफ़ा देने के बयान देना चाहिए था".
हालांकि हैदराबाद से सांसद असद्दुद्दीन ओवैसी ने कहा, "हामिद अंसारी ने देश की सच्चाई पेश की है".
बात यहीं ख़त्म नहीं हुई है और बहस अभी जारी है क्योंकि इसके बाद अगले उप-राष्ट्रपति होने वाले वेंकैय्या नायडू न बयान दिया कि, "भारत धर्मनिरपेक्षता का सबसे अच्छा उद्दाहरण है".
यह पूछे जाने पर कि क्या भारत में राजनीतिक संवाद में गिरावट होती दिख रही है, वरिष्ठ पत्रकार नीरजा चौधरी ने कहा, "दरअसल राजनीतिक संवाद सीमित होता जा रहा है".
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)