मोदीजी के राज में संवाद नहीं केवल बल प्रयोग: मेधा पाटकर

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- Author, शुरैह नियाज़ी
- पदनाम, भोपाल से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
मध्य प्रदेश में बांध प्रभावितों के लिए मुआवज़े और पुनर्वास की मांग को लेकर अनशन कर रहीं सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर को पुलिस ने अनशन स्थल से हटाकर ज़बरदस्ती अस्पताल में भर्ती करा दिया है.
मेधा पाटकर समेत 12 लोग सरदार सरोवर बांध के प्रभावितों की मांगों को लेकर धार ज़िले के चिखल्दा गांव में अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठै थे.
अनशन के 12वें दिन पुलिस ने मेधा पाटकर समेत छह लोगों को भारी पुलिस बल की मौजूदगी में अनशन स्थल से ज़बरदस्ती हटा दिया.
नर्मदा बचाओ आंदोलन से जुड़े लोगों का आरोप है कि इस दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज भी किया जिसमें कई लोग घायल हुए हैं.
'कील वाले डंडे'

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आंदोलन की कार्यकर्ता हिमशी सिंह उस वक़्त वहां मौजूद थीं. उनका कहना है कि चिखल्दा गांव में इस वक़्त ख़ौफ का माहौल है.
हिमशी सिंह का आरोप है कि पुलिस ने मेधा पाटकर को ले जाने के दौरान भारी बल प्रयोग किया जिसमें कई लोगों को गंभीर चोटें आई हैं.
उन्होंने कहा, ''पुलिस जिन डंडों का इस्तेमाल कर रही थी, उसमें कीलें लगी हुई थीं.''
गिरफ्तारी नहीं, इलाज: शिवराज

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वहीं मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि मेधा पाटकर को गिरफ्तार नहीं किया गया है बल्कि अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
शिवराज ने ट्वीट कर कहा, 'मैं संवेदनशील व्यक्ति हूं. चिकित्सकों की सलाह पर मेधा पाटकर जी व उनके साथियों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया है.'
उन्होंने आगे लिखा कि 'मेधा पाटकर और उनके साथियों की स्थिति हाई कीटोन और शुगर की वजह से चिंतनीय थी. उनके स्वास्थ्य और दीर्घ जीवन के लिए हम प्रयासरत हैं'.
डूब क्षेत्र से 40 हज़ार लोग प्रभावित

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उधर अनशन स्थल से हटाए जाने से पहले मेधा पाटकर ने कहा, ''आज मध्य प्रदेश सरकार हमारे 12 दिनों से बैठे 12 साथियों को मात्र गिरफ्तार करके जवाब दे रही है. यह कोई अहिंसक आंदोलन का जवाब नहीं है. मोदी जी के राज में, शिवराज जी चौहान के राज में एक गहरा संवाद नहीं, जो हुआ उस पर जवाब नहीं. आंकड़ों का खेल, कानून का उल्लंघन और केवल बल प्रयोग.''
सरदार सरोवर बांध से 192 गांवों के 40 हज़ार परिवार प्रभावित होंगे. उनका पूरा इल़ाका डूब जाएगा. सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि 31 जुलाई तक पूरी तरह पुनर्वास के बाद ही बांध की ऊंचाई बढ़ाई जाए.
लेकिन पुनर्वास के लिए जो जगह बनाई गई है, उसकी हालत भी रहने लायक नहीं है.
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