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#70yearsofpartition: जिन्ना पाक गवर्नर जनरल बने माउंटबेटन भारत के
मुल्क बंट रहा था. हिंदू-मुसलमान इधर से उधर और उधर से इधर आ-जा रहे थे. अख़बार की ख़बरें भी हिंदू मुसलमान के रंग से रंगी हुई लग रही थीं.
4 अगस्त, 1947 की सबसे बड़ी ख़बर यही थी कि मोहम्मद अली जिन्ना पाकिस्तान के पहले गवर्नर जनरल बने और लॉर्ड माउंटबेटन भारत के.
वह दिन सोमवार का था, अख़बार की सुर्खियों के लिहाज़ से थोड़ा नरम. आइए देखते हैं कि उस दिन अंग्रेज़ी अख़बार 'द डॉन' की सुर्खियां क्या कह रही थीं.
'हम भारत के बग़ैर जिंदा नहीं रह सकते'
लॉर्ड माउंटबेटन स्वतंत्र भारत के पहले गवर्नर जनरल और मोहम्मद अली जिन्ना पाकिस्तान के गवर्नर जनरल नियुक्त. किंग जॉर्ज-VI के आदेश के मुताबिक माउंटबेटन और जिन्ना की नियुक्ति 15 अगस्त से प्रभावी होगी.
पॉन्डिचेरी भारत में शामिल होने को तैयार. पॉन्डिचेरी के नगर निगम अध्यक्ष ने कहा कि वह भारत संघ में शामिल होने को तैयार हैं, बशर्ते उन्हें इसके लिए कहा जाए. पॉन्डिचेरी के मेयर के मुथु पिल्लै ने कहा, "कोई भी भारतीय नागरिक भारत में शामिल न होने के बारे में सोच भी नहीं सकता. हम भारत संघ में शामिल हुए बग़ैर ज़िंदा नहीं रह सकते."
भारत सरकार और निज़ाम के बीच जारी थी बातचीत
क़ायद-ए-आज़म मोहम्मद अली जिन्ना ने सेना के मुस्लिम स्टाफ़ से मुलाक़ात की.
तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष आचार्य जेबी कृपलानी ने कराची में प्रेस से कहा कि नागरिकों को सरकार के प्रति वफ़ादार होना होगा. कराची में उन्होंने कहा, "भारत के दोनों हिस्सों में तब तक शांति या समृद्धि नहीं आएगी जब तक कि वे एक दूसरे के क़रीब न आएं."
उधर, हैदराबाद में भारत सरकार और निज़ाम के बीच बातचीत जारी थी. हालांकि, 3 अगस्त की बातचीत उन एयरोड्रम्स को लेकर थी जिनका भारत सरकार ने दो महीने पहले अधिग्रहण किया था. बीदर, पतनचेरवु, अलाओर, वारंगल, रायचूड़, आदिलाबाद और चिकलथाना के हवाई अड्डे निज़ाम की सरकार ने रॉयल एयरफ़ोर्स (आरएएफ़) के लिए बनवाए थे.
अमृतसर में सांप्रदायिक तनाव बरक़रार. कर्फ़्यू के बावजूद कुछ जगहों पर हिंसा की ख़बरें. लाहौर में सांप्रदायिक तनाव को देखते हुए गश्त के लिए सेना की तैनाती. डेरा इस्माइल ख़ान और जुबलीपुर से भी सांप्रदायिक झड़प जैसी ख़बरें थीं.
'सिखों को पाक का हिस्सा बनने से फ़ायदा'
श्रीनगर में जम्मू और कश्मीर के महाराज के प्रधानमंत्री की महात्मा गांधी से दूसरी मुलाक़ात. यह अंदाज़ा लगाया गया कि मुलाक़ात का मकसद कश्मीर पर बातचीत थी. गांधी ने मुलाक़ात के बाद केवल इतना ही कहा कि हम हर किसी से दोस्ताना रिश्ते चाहते हैं लेकिन जम्मू और कश्मीर राज्य के प्रधानमंत्री इस सवाल पर चुप्पी साध गए कि कश्मीर भारत या पाकिस्तान में शामिल होना चाहता है या फिर आज़ाद रहना चाहता है. इसी दिन कश्मीर के महाराजा से महात्मा गांधी की केवल तीन मिनट के लिए मुलाक़ात हुई.
ब्रितानी अख़बार मैनचेस्टर गार्डियन ने एक आर्टिकल में लिखा कि सिखों को पाकिस्तान का हिस्सा बनने से फ़ायदा होगा. अख़बार ने इस विचार को समर्थन देते हुए दलील भी दी, "पंजाब को हिंदू और मुस्लिम बहुल इलाकों में बांटकर दो राज्य बना दिए जाएं और ये दोनों राज्य पाकिस्तान का हिस्सा बनें. मुस्लिम बहुल इलाके में रावलपिंडी, मुल्तान और लाहौर के हिस्से शामिल किए जाएं. सिख-हिंदू बहुल इलाकों में जालंधर, अंबाला और लाहौर के कुछ हिस्से शामिल हों."
प्रॉपर्टी के विज्ञापन भी बंटवारे के किस्से
इन सबके बीच दिल्ली में सार्वजनिक वितरण प्रणाली की व्यवस्था देखने वाले विभाग ने एक विज्ञापन जारी किया, जो कुछ इस तरह से था, "क्या आप पाकिस्तान जा रहे हैं? अगर हां तो अपने राशन कार्ड सर्कल राशनिंग अफ़सर के पास या दिल्ली रेलवे स्टेशन पर सरेंडर करना न भूलें."
ब्रिटेन के नागरिक उड्डयन मंत्री लॉर्ड मैथन ने कहा कि उनका देश भारत और पाकिस्तान में सिविल एयर एग्रीमेंट करना चाहता है ताकि पर्याप्त वायु सेवाएं मुहैया कराई जा सकें.
प्रॉपर्टी के विज्ञापन भी बंटवारे के किस्से कहते दिख रहे थे. एक विज्ञापन में कहा गया, "पाकिस्तान जा रहे मुसलमान पूर्वी पंजाब हाउसिंग कॉर्पोरेशन के दिल्ली दफ़्तर से संपर्क करें ताकि उनकी ज़मीन जायदाद का फ़ायदेमंद सौदा मिल सके."
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