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लश्कर कमांडर दुजाना का 'पाकिस्तान कनेक्शन'
- Author, माजिद जहांगीर
- पदनाम, श्रीनगर से बीबीसी हिंदी के लिए
भारत-प्रशासित कश्मीर में मंगलवार को सुरक्षाबलों ने लश्कर-ए-तैयबा के सक्रिय कमांडर अबू दुजाना को उनके एक साथी समेत पुलवामा ज़िले के लाकरी पोरा में एनकाउंटर में मारने का दावा किया है.
अबू दुजाना बीते आठ सालों से कश्मीर में सक्रिय थे. उन पर सुरक्षा एजेंसियों ने पंद्रह लाख का इनाम रखा था. मारे गए दूसरे चरमपंथी की पहचान आरिफ़ नबी डार के रूप में हुई है जो स्थानीय थे.
कश्मीर में काम कर रही सुरक्षा एजेंसियां चरमपंथी कमांडर दुजाना की तलाश में थीं. एनकाउंटर स्थल से पुलिस ने हथियार, गोला-बारूद बरामद करने दावा किया है. पुलिस का कहना है कि दुजाना सुरक्षाबलों पर किए गए कई हमलों में शामिल थे.
गिलगित-बाल्टिस्तान के रहने वाले थे दुजाना
पुलिस ने प्रेस को जारी किए गए अपने बयान में कहा है कि दुजाना को महिलाओं का साथ पसंद था.
जम्मू-कश्मीर पुलिस के प्रमुख डॉक्टर एसपी वैद ने बीबीसी को बताया, "दुजाना ने बीते वर्षों में दो शादियां की थीं और दोनों ही बीवियों को छोड़ दिया था."
इलाके का नाम लिए बिना पुलिस का कहना था कि दुजाना पाकिस्तानी नागरिक थे. ख़ुफ़िया एजेंसियों का कहना है कि वह पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के गिलगित-बाल्टिस्तान के रहने वाले थे और साल 2010 में उन्होंने पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के ट्रेनिंग कैंप में हथियारों की ट्रेनिंग ली थी, जिसके बाद वह कश्मीर आ गए थे.
पुलिस का यह भी कहना है कि दुजाना कश्मीर में स्थानीय युवाओं को चरमपंथ की ओर आकर्षित करने में अहम भूमिका निभा रहे थे.
पहले दक्षिणी कश्मीर के चीफ़ कमांडर
बीते वर्षों में दुजाना कई बार सुरक्षाबलों को चकमा देकर फ़रार होने में कामयाब हो गए थे. ज़्यादातर वह दक्षिणी कश्मीर में रहते थे. बीती जुलाई को सुरक्षाबलों के घेराव से भागने के बाद दुजाना सुरक्षा एजेंसियों के राडार पर थे.
पुलिस का कहना है कि दुजाना अबू क़ासिम के क़रीबी थे जो उधमपुर में सुरक्षाबलों पर हमले में शामिल थे. अबू क़ासिम वर्ष 2015 में कश्मीर के कुलगाम ज़िले में मारे गए थे जिसके बाद दुजाना को दक्षिणी कश्मीर का चीफ़ कमांडर बनाया गया था.
वर्ष 2014 में पुलवामा में एक स्थानीय चरमपंथी के जनाज़े में दुजाना बंदूक लिए नज़र आए थे जिसके बाद पहली बार सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीर वायरल हो गई थी. बताया जाता है कि बीते साल बुरहान वानी के जनाज़े में भी वह शरीक हुए थे और तमाम कश्मीरी युवाओं के बीच काफी मशहूर थे.
मोबाइल इंटरनेट और स्कूल बंद
मंगलवार को दुजाना की मौत के बाद इलाके में प्रदर्शनों के दौरान एक नागरिक फ़िरदौस अहमद ख़ान की गोली लगने से मौत हो गई, जबकि कई प्रदर्शनकारी घायल हो गए. वहीं, बुधवार को एक और घायल नागरिक की अस्पताल में मौत हो गई जिनकी पहचान अकील अहमद के रूप में हुई है.
इस घटना के बाद कश्मीर में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को बंद कर दिया गया है और सभी स्कूलों को बंद रखने के आदेश जारी किए गए हैं. अलगाववादियों ने भी बुधवार को आम नागरिकों की मौतों के ख़िलाफ़ बंद बुलाया है. प्रदर्शनों को रोकने के लिए कई इलाकों में प्रतिबंध भी लगा दिया गया है.
पिछले साल हिज़बुल मुजाहिदीन कमांडर बुरहान वानी की एनकाउंटर में मौत के बाद घाटी में क़रीब छह महीनों तक भारत विरोधी प्रदर्शन हुए थे. इन प्रदर्शनों के दौरान क़रीब सौ प्रदर्शनकारी सुरक्षाबलों की कारवाई में मारे गए थे.
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