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प्रेस रिव्यू: चीन ज़मीन पर भारी, पर समंदर में भारत से कैसे पार पाएगा?
इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार चीन के विशेषज्ञों ने शी जिनपिंग सरकार को चेतावनी दी है अगर भारत के साथ डोकलाम विवाद लंबा खिंचा तो इसका असर उसकी महत्वाकांक्षी योजना 'वन बेल्ट, वन रोड' पर पड़ सकता है.
मकाऊ स्थित सैन्य विशेषज्ञ एंटनी वोंग डोंग ने चेतावनी दी है कि डोकलाम विवाद पर चीन का अड़ियल रुख़ भारत को उससे दूर कर रहा है और हो सकता है इसका नतीजा ये हो कि भारत उसका दुश्मन बन जाए.
वोंग ने साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट से कहा, "चीन मनोवैज्ञानिक जंग लड़ रहा है....लेकिन उसे ये अहसास होना चाहिए कि अगर वो ज़मीन पर भारत को हरा भी देता है तब भी पीएलए नेवी के लिए समंदर में भारत से पार पाना लगभग नामुमकिन होगा."
उन्होंने कहा कि चीन प्रमुख रूप से आयातित तेल पर निर्भर है और हाल ही चीन के सरकारी मीडिया में छपी रिपोर्टों के अनुसार उसका 80 फ़ीसदी तेल हिंद महासागर के रास्ते आता है.
एक अन्य विशेषज्ञ सुन शइहाई ने अख़बार से कहा कि पिछले तीन दशक में भारत और चीन के बीच ये सबसे बड़ा सीधा टकराव है. अगर ये विवाद लंबा खिंचा तो भारत में चीन विरोधी भावनाएं प्रबल हो जाएंगी.
भौगोलिक रूप से भारत चीन की वन बेल्ट, वन रोड योजना के लिए बेहद महत्वपूर्ण है.
दैनिक जागरण के मुताबिक उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में होने वाले विवाहों का पंजीकरण अनिवार्य करने के एक प्रस्ताव को मंगलवार को मंजूरी दे दी. यह सभी धर्मों पर लागू होगा.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में यह फैसला किया गया. बैठक के बाद राज्य सरकार की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया कि मंत्रिपरिषद ने 'उत्तर प्रदेश विवाह पंजीकरण नियमावली 2017' को लागू करने का प्रस्ताव मंजूर किया है.
हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक भाजपा सांसदों के राज्यसभा से ग़ैरहाज़िर रहने पर पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने कड़ी नाराज़गी जताई है.
मंगलवार को बीजेपी संसदीय बोर्ड की बैठक में शाह ने इस मुद्दे पर अपनी नाराजगी जताई. संसदीय कार्यमंत्री अनंत कुमार ने कहा, जब पार्टी व्हिप जारी करती है तो सदस्यों को सदन में मौजूद रहना चाहिए.
उन्होंने कहा कि पार्टी अध्यक्ष ने इसे गंभीरता से लिया है और सदस्यों से कहा है कि ऐसा दोहराया न जाए.
दरअसल, राज्यसभा में सोमवार को सरकार की उस समय किरकिरी हुई जब विपक्ष का एक संशोधन पास हो गया.
ओबीसी आयोग को संवैधानिक दर्जा देने संबंधी संविधान संशोधन विधेयक पर वोटिंग के दौरान सरकार को हार का सामना करना पड़ा. एनडीए के कई सांसद सदन में मौजूद नहीं थे और इसी का फायदा विपक्ष को मिला.
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