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सोहराबुद्दीन एनकाउंटरः हत्या क्यों हुई शायद पता ही न चले
- Author, दिलनवाज़ पाशा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
मुंबई में सीबीआई की एक अदालत ने मंगलवार को गुजरात पुलिस के रिटायर्ड अधिकारी डीजी वंजारा और राजस्थान पुलिस के अधिकारी एमएन दिनेश को सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर मामले में बरी कर दिया है.
इस मामले में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह समेत अब तक कुल 38 में से 15 अभियुक्तों को बरी किया जा चुका है. अदालत के फ़ैसले का स्वागत करते हुए डीजी वंजारा ने बीबीसी से कहा कि वो फ़ैसले से ख़ुश हैं.
वंजारा ने कहा, "हिंदुस्तान के न्यायतंत्र ने हमारे साथ न्याय किया है, मैं इसके लिए ईश्वर का आभारी हूं. कहा जाता है कि भगवान के यहां देर होती है अंधेर नहीं. होती इसी तरह भारत के न्यायतंत्र में भी देर हो सकती है, लेकिन अंधेर नहीं होती, मुझे ख़ुशी है कि मैं दोषमुक्त हुआ हूं."
साल 2005 में गुजरात पुलिस ने कथित तौर पर सोहराबुद्दीन शेख का अहमदाबाद एयरपोर्ट के पीछे एक स्थान पर एनकाउंटर किया था. सोहराबुद्दीन पर चरमपंथी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के साथ जुड़े होने और गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान और आंध्र प्रदेश में हथियार सप्लाई करने के आरोप थे.
हत्याकांड
नवंबर 2015 में सोहराबुद्दीन शेख, उनकी पत्नी कौसर बी और साथी तुलसीराम प्रजापति हैदराबाद से एक बस से सांगली आ रहे थे. एक पुलिस टीम ने बस का पीछा कर तीनों को पकड़ा था और उन्हें अहमदाबाद ले जाया गया था. गुजरात पुलिस ने सोहराबुद्दीन को एनकाउंटर में मारने का दावा किया था.
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गुजरात पुलिस ने इस कथित एनकाउंटर की जांच की थी. गुजरात पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में शपथपत्र देकर इस एनकाउंटर को फ़र्ज़ी बताया था.
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को गुजरात के बाहर सुनवाई के लिए भेज दिया था और अब मुंबई की एक विशेष सीबीआई अदालत में मामले की सुनवाई हो रही है. सोहराबुद्दीन शेख के सहयोगी तुलसीराम प्रजापति की हत्या के मामले को भी इस जांच में शामिल किया गया था.
हालांकि दोषमुक्त हुए डीजी वंजारा कहते हैं कि एनकाउंटर असली था और उन्हें और उनके अधिकारियों को इसमें ग़लत तरीके से फंसाया गया. वंजारा कहते हैं कि वो इस मामले में राजनीति का शिकार हुए थे.
गुजरात पुलिस ने इस मामले में भारतीय जनता पार्टी के मौजूदा अध्यक्ष अमित शाह को भी साज़िश रचने के आरोप में गिरफ़्तार किया था जिन्हें बाद में अदालत ने सबूतों के अभाव में बरी कर दिया.
गुजरात के वरिष्ठ पत्रकार अजय उमट कहते हैं, "मुंबई की अदालत को लगा कि अमित शाह के ख़िलाफ़ सबूत पर्याप्त नहीं हैं और उन्हें बरी कर दिया गया. सीबीआई अदालत के सामने सबूत नहीं पेश कर पाई और इस मामले के अभियुक्त एक के बाद एक बरी होते गए. आज मुख्य अभियुक्त डीजी वंजारा और एमएन दिनेश भी बरी हो गए हैं."
अजय उमट को लगता है कि भारत में बदले राजनीतिक हालात का असर भी इस मामले की जांच पर पड़ा हो. उमट कहते हैं, "भारत का सुप्रीम कोर्ट सीबीआई को पिंजरे में बंद तोता कह चुका है. सिर्फ़ सोहराबुद्दीन एनकाउंटर ही नहीं कई अन्य मामलों में भी सीबीआई की जांच पर सवाल उठे हैं. मुझे लगता है कि जब सरकार बदलती है तो सबूत भी और उनके मायने भी बदल जाते हैं."
अदालत ने सोमवार को राजस्थान पुलिस के सब इंस्पेक्टर रैंक के दो अधिकारियों हिमांशु सिंह और श्यान सिंह चरण की बरी याचिका को रद्द कर दिया था. गुजरात के पत्रकार प्रशांत दयाल का कहना है कि मामले में उन अभियुक्तों की याचिका रद्द हुई है जिन्होंने गोली चलाई थी और बहुत मुमकिन है कि उन्हें सज़ा भी हो जाए.
दयाल कहते हैं, "जिन्होंने गोली चलाई वो अभी अभियुक्त हैं और उन पर मुक़दमा चलेगा, लेकिन गोली क्यों चलवाई गई शायद इस सवाल का जवाब अब कभी न मिल सके."
पत्रकार अजय उमट कहते हैं, "पुलिस एक बहुत अनुशासित बल होता है. छोटे अधिकारी बड़े अधिकारियों के आदेशों का बिना सवाल किए पालन करते हैं. जिन पुलिसकर्मियों ने गोली चलाई अब उन पर ही मुक़दमा चल रहा है, लेकिन जिन्होंने आदेश दिया वो अब बरी हैं."
अजय उमट कहते हैं, "अब अदालत में ये पता नहीं चल सकेगा कि सोहराबुद्दीन शेख की हत्या क्यों करवाई गई थी और इसके पीछे कौन लोग थे."
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