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अमित शाह को 'असहज' करने वाले 7 सवाल
बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने सोमवार को लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत में ही कहा कि उपलब्धियों को बताने के लिए जितना समय चाहिए होता है, वह प्रेस कांफ़्रेंस में नहीं होता. इसके बाद उन्होंने 15 मिनट तक सरकार की उपलब्धियां गिनाईं और फिर पत्रकारों के सवालों के जवाब दिए.
बीजेपी अध्यक्ष ने कहा कि यह प्रेस कांफ़्रेंस उनका तीन दिन का उत्तर प्रदेश प्रवास पूरा होने के संबंध में बुलाई गई है, लेकिन हाल ही में मोदी सरकार के तीन साल और योगी सरकार के तीन महीने पूरे हुए हैं. लिहाज़ा कांफ़्रेंस इसी पर केंद्रित रही.
किसी पत्रकार ने उनसे संपत्ति में तीन गुना बढ़ोतरी की ख़बर के कुछ वेबसाइटों से ग़ायब हो जाने का सवाल नहीं पूछा. फिर भी बीजेपी अध्यक्ष को कुछ मुश्किल सवालों का सामना जरूर करना पड़ा, जिनका जवाब देते हुए वह थोड़े से असहज दिखे.
1. आपने तीन दिन बैठक ली है. सब कुछ गिना दिया आपने. लेकिन तीन महीने से प्रदेश की क़ानून व्यवस्था को लेकर चर्चा चल रही है. आपने कोई दिशा निर्देश दिए हैं?
दिशा निर्देश देने की ज़रूरत नहीं है, सरकार क़ानून व्यवस्था को लेकर बहुत अच्छे से आगे बढ़ रही है. मगर जिस प्रकार से यूपी के अंदर प्रशासन का राजनीतिकरण हुआ है, उसे सुधारने में थोड़ा समय लगेगा. मैं प्रदेश की जनता को आश्वस्त करना चाहता हूं कि अन्य राज्यों की तरह यूपी में भी क़ानून का ही राज होगा.
2. जिन्होंने एमएलसी की कुर्सी छोड़कर कुर्बानी दी है (ताकि वहां बीजेपी के नेता फ़िट हो सकें), आप उन्हें रिटर्न गिफ़्ट क्या देंगे? और ये जो रस्ते का माल सस्ते में आप उठा रहे हैं, उससे आपका 'पार्टी विद डिफ़रेंस' का नारा कितना प्रभावित हो रहा है.
आपका जो सवाल है ना, रिटर्न गिफ्ट का. आप ढूंढते रह जाना. ये हमारी पार्टी की डिक्शनरी में नहीं होता है. (अमित शाह ने दूसरे सवाल का जवाब नहीं दिया.)
3. आप जहां जहां जा रहे हैं, वहां भगवाकरण हो रहा है. ये हो रहा है कि अमित शाह जहां जा रहे हैं वहां पार्टियां टूट रही हैं.
एक मिनट. मैं केरल जाकर आया, क्या टूटा. मैं तेलंगाना जाकर आया, क्या टूटा. मैं ओडिशा जाकर आया, हिमाचल, जम्मू कश्मीर जाकर आया, क्या टूटा.
मैं दलित के यहां गया, वो भी हमारा कार्यकर्ता है. मैं कल सोनू यादव के यहां गया, वो भी कार्यकर्ता है. इसमें ज़्यादा राजनीतिक गणित मत लगाइए.
4. सीएजी की रिपोर्ट आई थी कि भारतीय सेना के पास दस दिन से ज़्यादा का गोला-बारूद नहीं है. चीन लगातार आंखें तरेर रहा है, उसके लिए कोई सोच?
ये सोच प्रेस वार्ता में होगी क्या? अरुण जी ने सीएजी की रिपोर्ट को सदन में आधिकारिक बयान देकर इसे ख़ारिज़ कर दिया. (इस बीच अमित शाह प्रेस वार्ता का संचालन कर रहे अपने कार्यकर्ता को डांटते हैं, 'अरे भई सुनो ना. किस तरह से कंडक्ट कर रहे हो.')
5.केंद्र में आपकी सरकार है. संत समाज की बीजेपी पर बड़ी कृपा रही है और संत समाज की मांग थी कि गौ मंत्रालय बनाया जाए. क्या इस पर विचार कर रहे हैं आप लोग?
बहुत सारी दरख़्वास्तें हैं, इस पर विचार चल ही रहा है.
6. योगी सरकार की नीति और नीयत पर किसी को शक नहीं है. लेकिन आपके कार्यकर्ता, विधायक और सांसद तीन महीने के कार्यकाल में असंतोष ज़ाहिर कर रहे हैं. लखनऊ से लेकर दिल्ली तक शिकायतें कर रहे हैं?
ठीक है. चुनाव आते आते तक सब ठीक हो जाएगा.
7.2014 के चुनाव से पहले आपने राम मंदिर बनाएंगे का वादा किया था, आपकी सरकार आई. अब उत्तर प्रदेश में भी आपकी सरकार है. क्या ये मुद्दा 2019 तक बना रहेगा?
जब से विवादित ढांचा गिरा, तब से भाजपा के चुनावी घोषणापत्र में लिखा है कि हम क़ानून तरीके से या संवाद से राम मंदिर बनाएंगे. हमारे स्टैंड में कोई बदल कभी नहीं हुआ. योगी जी ने भी कहा है. हम नहीं बना सकते भैया कमेटी.
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