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अमित शाह जहाँ जाते हैं, क्यों गिरते हैं इस्तीफ़े?
- Author, समीरात्मज मिश्र
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए, लखनऊ से
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह शनिवार को लखनऊ पहुंचे भी नहीं थे कि समाजवादी पार्टी के दो विधायकों का इस्तीफ़े की ख़बर आ गई.
बुक्कल नवाब और यशवंत सिंह दोनों ही विधान परिषद सदस्य थे और अभी कुछ ही समय पहले समाजवादी पार्टी ने इन दोनों को दूसरी बार विधान परिषद में भेजा था.
इधर अमित शाह लखनऊ में पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें कर रहे थे, तब तक बहुजन समाज पार्टी के भी एक विधान परिषद सदस्य जयवीर सिंह ने इस्तीफ़ा दे दिया.
ख़बरें ये हैं कि अभी कुछ और विधायक, विधान परिषद् से अपनी सदस्यता छोड़ सकते हैं.
विधानसभा सदस्य क्यों नहीं दे रहे इस्तीफ़ा?
यहां एक सवाल ये उठ रहा है कि दूसरी पार्टियों के सिर्फ़ विधान परिषद् सदस्यों ने ही क्यों इस्तीफ़ा दिया, विधानसभा सदस्य क्यों नहीं?
वरिष्ठ पत्रकार योगेश मिश्र कहते हैं, "ये सब एक ख़ास रणनीति के तहत किया जा रहा है. इससे एक तो बीजेपी उच्च सदन में भी अपनी संख्या बढ़ा लेगी, मंत्रियों को सदन का रास्ता मिल जाएगा और सबसे अहम बात ये कि जनता में ये संदेश जाएगा कि अन्य सभी दलों में लोगों का दम घुट रहा है, सिर्फ़ बीजेपी ही इस समय लोगों के आकर्षण का केंद्र है."
यशवंत सिंह ने अपनी सीट मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी को देने की पेशकश के साथ छोड़ी है तो बुक्कल नवाब ने उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा के लिए. हालांकि दोनों का कहना था कि अपनी पार्टी में उनका दम घुट रहा था.
अमित शाह के लखनऊ दौरे का एजेंडा....
दरअसल, बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह शनिवार से ही तीन दिन के दौरे पर लखनऊ में थे. उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री और दोनों उपमुख्यमंत्रियों समेत कुल पांच मंत्री ऐसे हैं जो अभी राज्य के किसी सदन के सदस्य नहीं हैं.
इन लोगों को 19 सितंबर से पहले किसी भी सदन की सदस्यता लेनी है.
अमित शाह के लखनऊ पहुंचते ही विपक्षी दलों के विधायकों में जैसे इसके लिए होड़ सी लग गई.
विधायकों के पार्टी छोड़ने को लेकर सपा नेता अखिलेश यादव और बीएसपी नेता मायावती दोनों ने ही बीजेपी पर निशाना साधा है.
दोनों नेताओं ने बीजेपी पर विपक्षी नेताओं को लालच देने और सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का आरोप लगाया है.
अमित शाह का दौरा और लोकप्रियता का एहसास
यहां एक सवाल ये भी उठ रहा है कि जिन विधायकों को इस्तीफ़े देने थे, उन्होंने अमित शाह के लखनऊ आगमन के मुहूर्त को ही क्यों चुना.
योगेश मिश्र इसकी वजह बताते हैं, "ऐसा इसलिए ताकि अमित शाह के दौरे को और महिमामंडित किया जा सके, और अधिक मीडिया कवरेज मिल सके और लोगों को उनकी लोकप्रियता का अहसास कराया जा सके."
वहीं कुछ विश्लेषकों का ये भी कहना है कि विधानसभा सदस्यों से इस्तीफ़ा दिलाकर बीजेपी एक साथ इतनी सीटों पर उपचुनाव का सामना करने से बच रही है, क्योंकि यदि एक पर भी उसे हार का सामना करना पड़ गया तो जनता में बहुत ही नकारात्मक संदेश जाएगा.
वरिष्ठ पत्रकार शरत प्रधान कहते हैं, "जैसा सुनने में आ रहा है कि फूलपुर सीट से विपक्ष संयुक्त रूप से मायावती को मैदान में उतार रहा है तो निश्चित तौर पर बीजेपी के लिए उस सीट को दोबारा जीतना मुश्किल हो जाएगा. संयुक्त विपक्ष के उम्मीदवार की स्थिति में तो गोरखपुर संसदीय सीट भी ख़तरे में पड़ सकती है."
जानकारों का कहना है कि शायद इन्हीं स्थितियों से बचने के लिए पार्टी अपने मंत्रियों को विधान परिषद भेजना चाहती है.
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