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स्वाइन फ़्लू से सबसे ज़्यादा मौतें महाराष्ट्र में क्यों हो रही हैं?
- Author, मयूरेश कोन्नूर
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
इस साल तमिलनाडु और तेलंगाना में स्वाइन फ़्लू के सबसे ज़्यादा मामले रिपोर्ट हुए लेकिन महाराष्ट्र में मरने वालों लोगों का आंकड़ा ज़्यादा है.
17 जुलाई को संसद में दिए गए बयान में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने बताया कि पूरे देश में इस साल 600 लोगों की मौत स्वाइन फ़्लू की वजह से हो चुकी है. इनमें से 284 मौतें अकेले महाराष्ट्र में हुई हैं.
स्वास्थ्य मंत्री के बयान के पांच दिन बाद यह आंकड़ा 322 हो चुका है. जबकि 2016 में स्वाइन फ़्लू की वजह से मौतों का कुल आंकड़ा 26 था. इस साल के आंकड़े 7 जुलाई तक के हैं.
एच1एन1 वायरल स्वाइन फ़्लू का कारण है. महाराष्ट्र के सर्विलांस प्रमुख डॉ. प्रदीप आवटे ने 'बीबीसी हिंदी' को बताया, ''इसे बीमारी का प्रकोप ही कहा जा सकता है. पूरे राज्य में स्वाइन फ़्लू की वजह से रो रही मौतें रिपोर्ट हो रही हैं.''
उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में मौत के आंकड़े ज्यादा दिखने की वजह यह भी है कि उनका सर्विलांस सिस्टम देश के बाकी राज्यों के मुक़ाबले ज़्यादा बेहतर है.
पुणे में हालात गंभीर
राज्य की राजधानी मुंबई समेत अन्य शहरों में भी हालत गंभीर है. पुणे, जहां देश का पहला एच1एन1 वायरस ग्रसित मरीज 2009 में रिपोर्ट हुआ था, आज भी यहां मुश्किल बढ़ी हुई हैं.
इस साल अब तक पुणे में 69 लोग एच1एन1 फ़्लू वायरस की चपेट में आ चुके हैं. पिछले साल यहां 10 लोगों की मौत हुई थी.
पुणे नगर निगम की सहायक स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अंजली साबणे कहती हैं, ''हमें यह पैटर्न नज़र आ रहा है कि हर दो साल बाद H1N1 का आउटब्रेक हो रहा है. पॉजिटिव मरीज और मौतों का आंकड़ा देखें तो यह साफ़ साफ़ दिखता है.''
साल 2015 में महाराष्ट्र में कुल 905 लोग स्वाइन फ़्लू का शिकार हुए थे जिनमें से 153 पुणे के थे.
स्वाइन फ़्लू को लेकर 'टू ईयर ब्रेकडाऊन थ्योरी' को वजह बताया जा रहा है. यानी एक साल आंकड़ा घटेगा, दूसरे साल बढ़ेगा.
हालांकि राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (NIV) ने इसके पीछे म्यूटेशन (बदलाव) को वजह मानने से इनकार किया है.
मॉनिटरिंग जारी
एनआईवी के वरिष्ठ वैज्ञानिक और उप संचालक डॉ. अतानु बसु ने बीबीसी हिंदी को ईमेल में जवाब देते हुए लिखा, 'एनआईवी में हम इस वायरस को लगातार मॉनिटर कर रहे हैं और देख रहे हैं कि कोई म्यूटेशन हो रहा है क्या. लेकिन ऐसा कोई भी 'अलार्मिंग' बदलाव हमारी नज़र में नहीं आया है.'
फ़िलहाल राज्य सरकार ने सारे केंद्रों को एन्फ़्लुएंजा वैक्सीनेशन का काम जारी रखने का फ़ैसला लिया है. डॉ. प्रदीप आवटे ने कहा, ''सारे स्थानीय निगम को यह भी अधिकार दिए गए हैं कि वह अपने क्षेत्र के अस्पतालों के लिए यह वैक्सीन ख़रीद सकते हैं.''
देशभर में इस साल अब तक स्वाइन फ़्लू के 12460 मामले सामने आ चुके हैं. इनमें से 600 लोगों की मौत हुई है.
(स्टोरी में दिए गए आंकड़े भारत सरकार के स्वास्थ्य विभाग के हैं.)
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