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बदतर है भारतीय रेलवे का खाना, सीएजी ने लगाई मुहर
2014 में नरेंद्र मोदी सरकार के बनने के बाद से जिस तरह रेल मंत्री सुरेश प्रभु ट्विटर के जरिए रेलवे के काम काज के तरीकों में लगातार सुधार का प्रयास करते दिखे, वो अब भी नाकाफ़ी प्रतीत हो रहे हैं.
रेल यात्री लगातार बदतर होती जा रही कैटरिंग सेवाओं और गंदगी की शिकायत करते रहे हैं और अब सीएजी ने इस बात पर अपनी मुहर लगा दी है.
शुक्रवार को भारत के नियन्त्रक एवं महालेखापरीक्षक (सीएजी) ने भारतीय रेल की कैटरिंग सर्विस से जुड़ी अपनी रिपोर्ट संसद के सामने रखी. इसमें भारतीय रेल की कैटरिंग सर्विस में बहुत सी अनियमितताओं पर सवाल उठाए गए हैं.
खाने लायक नहीं है खाना
सीएजी ने कहा है कि ट्रेनों और रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों को परोसी जा रही चीज़ें खाने लायक नहीं हैं. रिपोर्ट के मुताबिक एक ओर ट्रेन के भीतर और स्टेशनों पर परोसी जा रही चीज़ें प्रदूषित हैं तो वहीं दूसरी तरफ डिब्बाबंद और बोतलबंद वस्तुएं एक्सपायरी डेट के बाद भी बेची जा रही हैं.
2005 से भारतीय रेल ने तीन बार अपनी कैटरिंग पॉलिसी में बदलाव किया. कई ऐसे कैटरिंग सर्विस जिसे 2005 में आईआरसीटीसी को दिया गया था और वापस जोनल रेलवे को दिया गया था, एक बार फिर उसे आईआरसीटीसी को दे दिया गया है.
सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में इसके लिए मैनेजमेंट स्तर पर लगातार हो रहे बदलाव को बड़ा कारण बताया है. रिपोर्ट में लिखा गया कि इससे अनिश्चितता की स्थिति बनी और यात्रियों को इससे नुकसान हुआ है.
ट्रेनों, स्टेशनों पर फ़ैली है गंदगी
सीएजी और रेलवे की संयुक्त टीम ने इसके अलावा 80 ट्रेनों का भी मुआयना किया. रिपोर्ट में साफ तौर पर लिखा गया है कि ट्रेनों और स्टेशनों पर साफ़-सफ़ाई का बिल्कुल भी ख़्याल नहीं रखा जाता है. कूड़ेदानों को न तो ढक कर रखा जाता है और न ही इनकी नियमित सफ़ाई होती है.
ट्रेनों में घूमते हैं चूहे, तेलचट्टे
रिपोर्ट के मुताबिक पेय पदार्थों में साफ़ पानी का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है और खाने पीने की चीज़ों को धूल-मक्खी से बचाने के लिए ढकने तक की व्यवस्था नहीं है. साथ ही रिपोर्ट में ट्रेनों के अंदर चूहे और तेलचट्टों का पाया जाना भी एकदम आम बात है.
वसूली जाती हैं अधिक क़ीमतें
इसके अलावा रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि रेलवे लंबी दूरी की कई ट्रेनों में पैंट्री कार उपलब्ध कराने में नाकाम रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक जिन ट्रेनों में पैंट्री कार उपलब्ध हैं उनमें जहां एक ओर बेची जा रही चीज़ों का रेट कार्ड उपलब्ध नहीं हैं तो वहीं दूसरी ओर चीज़ें ऊंची क़ीमतों पर बेची जा रही हैं.
जांच के दौरान खाने की वस्तुओं का वज़न भी तयशुदा मात्रा से भी कम पाया गया.रिपोर्ट में लिखा गया है कि सात जोनल में तो अब तक रेलवे ने कैटरिंग सर्विस के लिए ब्लूप्रिंट ही तैयार नहीं किया है.
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