You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
नज़रिया: 'मौसम की मार से पीछे हटेंगे चीनी सैनिक'
- Author, ब्रह्म चेलानी
- पदनाम, सैन्य विशेषज्ञ, बीबीसी हिंदी के लिए
भारत और चीन के बीच सिक्किम के पास डोकलाम में तनाव बरक़रार है.
पिछले महीने से सिक्किम के पास डोकलाम में भारतीय और चीनी सैनिक आमने-सामने डटे हुए हैं.
तबसे चीन ने भारत को कई बार आंख दिखाई है और लगातार कहा है कि भारतीय सैनिकों के डोकलाम से पीछे हटने पर ही तनाव कम होगा.
हाल ही में चीन ने कहा कि भारत के लिए चीन का सब्र हमेशा नहीं बना रहेगा. चीनी मीडिया में भी लगातार भारत को लेकर बयानबाज़ी होती रही है.
चीन की सरकार और चीन के सरकारी मीडिया की तरफ़ से भारत के साथ एक तरह का मनोवैज्ञानिक युद्ध छेड़ा गया है.
चीन ने पश्चिमी देशों के राजनयिकों को बुलाकर अपना रुख़ रखा है वो चीन की तरफ़ से भारत पर दबाव बनाने की कोशिश है.
छोटे-बड़े सभी देशों से उलझ रहा चीन
असल में चीन ने भूटान की सीमा में अतिक्रमण कर एक रास्ता बनाने की कोशिश की, जिसे रोकने के लिए भारत की सेना ने हस्तक्षेप किया.
इससे बौखलाया चीन असलियत को छुपाना चाहता है.
अपने अतिक्रमण पर पर्दा डालने के लिए चीन लगातार भारत पर आरोप लगा रहा है. लेकिन दुनिया के देश चीन के रवैये से वाकिफ़ हैं.
चीन क्षेत्रफल के हिसाब से एशिया का बहुत बड़ा देश है वो भूटान जैसे छोटे से देश के प्रति आक्रामकता बरत रहा है.
भूटान की जनसंख्या आठ लाख के करीब है. लेकिन चीन ऐसे देश के साथ भी उलझ रहा है.
चीन और भारत के बीच तनाव को ख़त्म करने का एक समाधान यही हो सकता है कि डोकलाम से चीन सैनिक और भारत के सैनिक हट जाएं और वहां यथास्थिति बहाल हो.
सैनिक हस्तक्षेप
जैसा कि चीन का कहना है कि भारतीय सेना के डोकलाम से हटने पर ही इस तनाव का हल होगा ये संभव नहीं है.
इसलिए ये सोचना कि चीन की सेना भूटान की सीमा से होते हुए डोकलाम पठार पर सड़क बनाएगी, ये परिदृश्य संभव नहीं होगा.
क्योंकि उस इलाके में चीन के मुकाबले भारत भौगोलिक और सैन्य ताकत में फ़ायदे की स्थिति में हैं.
अगर अभी नहीं तो कुछ समय के बाद चीन की सेना डोकलाम से ज़रूर हटेगी क्योंकि जब सख्त सर्द मौसम आएगा तो चीन और भारत के सैनिकों को वहां से हटना पड़ेगा.
कई सालों से चीन धीरे-धीरे भूटान की सीमा में अतिक्रमण कर रहा है .
उत्तर और पश्चिमी भूटान में चीन ने सेंध लगाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन इससे पहले भारत ने कभी सैनिक हस्तक्षेप नहीं किया है.
भारत का नरम रवैया
लेकिन इस बार भारतीय सेना को हस्तक्षेप करना पड़ा क्योंकि ये भारत की ज़मीन का छोटा सा टुकड़ा जिसे हम 'चिकन नेक' कह सकते हैं, वो हिस्सा जो भारत को अपने उत्तर-पूर्वी राज्यों से जोड़ता है उसके आगे भूटान की सीमा में चीन ने अतिक्रमण किया है.
ये इलाका भारत के लिए सामरिक रूप से महत्वपूर्ण हो जाता है इसलिए भारत चीन के अतिक्रमण को स्वीकार नहीं कर सकता है.
भारत काफ़ी रक्षात्मक रवैया रहा है, अक्सर भारत बचाव की मुद्रा में रहा है.
चीन के साथ भारत का तनाव करीब छह हफ़्तों से शुरू हुआ है, तब से भारत की प्रतिक्रिया काफ़ी सधी हुई रही है लेकिन चीन का रुख़ अब तक आक्रामक और युद्ध को बढ़ावा देने वाला रहा है.
चीन की सरकार
भारत की तरफ़ से एक बयान आया है जबकि चीन की तरफ़ से दर्जनों बयान आए हैं वो चाहे चीनी सरकार की तरफ़ से हो या चीनी रक्षा मंत्रालय की तरफ़ से.
देखें तो हर दिन चीन की तरफ़ से भारत के लिए धमकी आती है लेकिन भारत की तरफ़ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आती है.
क्योंकि भारत का रक्षात्मक रवैया है जो उसकी मानसिकता में गहराई तक बसा हुआ है और कहीं न कहीं ये भारत की कमज़ोरी साबित होती है.
चीन के साथ मुकाबला करने के लिए भारत का रक्षात्मक रवैया उसके लिए एक बोझ साबित हो सकता है. इसलिए इसमें परिवर्तन आना चाहिए.
(सैन्य एवं अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ ब्रह्म चेलानी से बीबीसी संवाददाता हरिता कांडपाल से बातचीत पर आधारित. )
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)