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बुरहान वानी की पहली बरसी पर कश्मीर में सन्नाटा
- Author, ज़ुबैर अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, कश्मीर से
हिज़बुल मुजाहिदीन के कमांडर बुरहान वानी की पुलिस एंकाउंटर में मौत के एक साल पूरे होने पर कश्मीर में हड़ताल है. ये हड़ताल हुर्रियत कॉन्फ़्रेन्स और जिहाद काउन्सिल की अपील पर हो रही है.
प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए हैं. श्रीनगर और दक्षिण कश्मीर में कर्फ़्यू और दफ़ा 144 लागू कर दिया गया है.
बुरहान वानी के इलाक़े त्राल और इसके आसपास के गांवों में पुलिस और सीमा सुरक्षा बलों का कड़ा पहरा है.
हुर्रियत के सभी बड़े नेताओं को पहले से ही उनके घरों में नज़रबंद कर दिया गया है.
हुर्रियत नेता मीरवाइज़ उमर फ़ारूक़ ने फ़ोन पर बीबीसी से कहा कि उन्हें 12-13 दिन से उनके घर के अंदर रखा गया है. उनके घर तक पहुँचने पर बीबीसी की टीम को सुरक्षा कर्मियों ने अंदर जाने से रोक दिया.
इंटरनेट की सुविधाएँ शुक्रवार रात से ही स्थगित कर दी गई हैं. अधिकारियों के अनुसार इन सुविधाओं का हालत को देखते हुए बहाल करने का फ़ैसला लिया जाएगा.
इंटरनेट काटने के फ़ैसले की आम लोगों ने कड़ी निंदा की है. दिलचस्प बात ये है कि सुरक्षा बलों के दफ़्तरों में भी कुछ अफ़सरों ने इस पर नाराज़गी जतायी.
सेंट्रल रिज़र्व पुलिस फ़ोर्स के एक उच्च अधिकारी अजय कुमार के अनुसार फ़ोर्स को पूरी घाटी में तैनात किया गया है.
राजधानी श्रीनगर में हर भीड़भाड़ वाले इलाक़े में ऑटोमैटिक राइफलों से लैस पुलिस की टुकड़ियाँ तैनात हैं.
शुक्रवार को शहर की जामा मस्जिद में नमाज़ की इजाज़त नहीं दी गई. अजय कुमार के अनुसार हर शहर के जामा मस्जिदों में जुमे की नमाज़ पर रोक लगाई गई थी.
सूत्रों के अनुसार छोटी मस्जिदों में जुमे की नमाज़ पढ़ी गई. लेकिन वहाँ भी अधिकारियों ने मौलवियों से जुमे के खूतबे में सियासी बातें ना करने की अपील की थी.
कश्मीर घाटी में तनाव बना हुआ है. प्रशासन के अनुसार सुरक्षा के दृष्टिकोण से हर क़दम उठाए गए हैं. अजय कुमार कहते हैं उन्हें नहीं लगता कि लोगों में हड़ताल की अपील का कोई ख़ास असर है.
जुमे के दिन बाज़ार खुले हुए थे. दुकानों में ग्राहक भी नज़र आ रहे थे. लेकिन पिछले दिनों की तुलना में पर्यटक बहुत कम नज़र आए. अमरनाथ यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए शनिवार तक आगे सफ़र करने पर रोक लगा दी गई है.
बुरहान वानी की पुलिस मुठभेड़ में मौत के बाद हफ़्तों चली हिंसा में 80 से अधिक नागरिक मारे गए थे. कई लोग पैलेटगन से घायल हो गए थे और इनमें से कई की आँखों की रौशनी चली गई थी.
पैलेटगन का इस्तेमाल विवाद का एक मुद्दा बन गया था. अजय कुमार ने कहा कि भीड़ को क़ाबू में करने के लिए उनकी फ़ोर्स के पास सब से कम नुक़सान पहुँचाने वाला हथियार पैलेट गन ही है. उनके अनुसार अब भी ज़रूरत पड़ने पर इसका इस्तेमाल किया जाएगा.
अधिकारी कहते हैं कि बुरहान वानी की बरसी मनाना मूर्खता है क्योंकि वो कोई हीरो नहीं था.
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