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इन मामलों में नोटबंदी पर सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश
- Author, फ़ैसल मोहम्मद अली
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि वो नोटबंदी मामले में उन लोगों के लिए विशेष व्यवस्था करे जो किसी ख़ास परिस्थिति की वजह से 500 और 1000 रूपए के नोट बैंकों में जमा न करवा पाए थे.
अदालत ने ये हुक्म नोटबंदी से जुड़े कुछ मामलों की सुनवाई करते हुए दिया. ये मामला अलग-अलग लोग अदालत में ले गए थे.
1. 72-साल की सरला श्रीवास्तव के पति एक हादसे में अपनी याददाश्त लगभग खो चुके थे. फिर कुछ दिनों बाद उनकी मौत हो गई. हिंदू रीति-रिवाजों के मुताबिक़ घर में साल भर किसी तरह का कोई उत्सव नहीं मनाया गया. लेकिन उसके बाद जब घर की सफाई और सफेदी का काम घर में हुआ तो एक ड्रम से सरला को क़रीब एक लाख 79 हज़ार रूपए मिले.
ये जनवरी, 2017 के दूसरे हफ्ते का वक्त था. नोटबंदी के सिलसिले में बंद किए गए पुराने 500 और 1000 के नोटों को बैंक में जमा करने की समयसीमा ख़त्म हो गई थी. आरबीआई ने भी इन पैसों को लेने से मना कर दिया.
उनके बेटे सुदीप श्रीवास्तव ने कहा कि उनकी मां ने प्रधानमंत्री कार्यालय से भी संपर्क किया जिसने वित्त मंत्रालय को मामले की छानबीन का हुक्म दिया लेकिन जब कई माह तक कुछ नहीं हुआ तो सरला श्रीवास्तव ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया.
2. पंजाब के किसान मलविंदर सिंह 2016 के शुरुआत से फ़रवरी 2017 तक अमरीका में अपने बेटे के पास थे. लेकिन उन्हें उम्मीद थी कि उनके घर पर पड़े पैसे (जो पुराने नोटों में थे) प्रधानमंत्री के वादे के मुताबिक़ मार्च 2017 तक आरबीआई में जमा हो जाएंगे.
मलविंदर सिंह के वकील प्रणव सचदेवा ने बताया कि लेकिन जब ऐसा करने की कोशिश की गई तो केंद्रीय बैंक से ऐसा करने से ये कहकर मना कर दिया उनका मामला एनआरआई कोटे में नहीं आता इसलिए ये पैसे वो जमा नहीं कर सकते हैं.
3. सुधा मिश्रा नोटबंदी की घोषणा के समय स्वास्थ्य कारणों से झारखंड में थीं लेकिन आश्वस्त थीं कि उनके पैसे दिल्ली वापस लौटने पर जमा हो जाएंगे. लेकिन ये मुमकिन नहीं हो सका.
मंगलवार को 10 ऐसी अर्ज़ियों की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने केंद्र सरकार से सवाल किया कि आप किसी के पैसे उससे जबरन किस तरह ले सकते हैं?
मुख्य न्यायाधीश जेएस खेहर ने हुक्म दिया है कि सरकार इस मामले में अपना जवाब दो हफ्ते के अंदर दाखिल करे.
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