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गर्भपात की अनुमति के लिए सुप्रीम कोर्ट की आभारी हैं शर्मिष्ठा
- Author, पीएम तिवारी
- पदनाम, कोलकाता से बीबीसी हिंदी के लिए
मध्यमवर्गीय परिवार की महिला शर्मिष्ठा चक्रवर्ती सुप्रीम कोर्ट के एक फ़ैसले से अचानक सुर्खियों में आ गई हैं.
चिकित्सकीय विसंगतियों का हवाला देकर उन्होंने 26 सप्ताह के भ्रूण के गर्भपात की अनुमति के लिए सुप्रीम कोर्ट में जो याचिका दायर की थी, उसे अदालत ने सोमवार को मंजूरी दे दी.
इससे शर्मिष्ठा और उनका परिवार बेहद ख़ुश है.
पहले भी कई बार गर्भपात झेल चुकी शर्मिष्ठा अदालत से गर्भपात की अनुमति मिलने के बाद प्रसन्न हैं. लेकिन वे मीडिया के सामने आने से बच रही हैं. अपने घर जुटे मीडिया वालों के लिए जारी चार लाइनों के एक हस्तलिखित बयान में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के प्रति आभार जताया है.
इसमें कहा गया है कि इस फैसले ने जहां उनको भारी मानसिक राहत दी है वहीं अब भविष्य में देश में कई भावी माताओं को उनकी तरह मानसिक यंत्रणा के दौर से नहीं गुजरना होगा. सुप्रीम कोर्ट ने संभावनाओं की नई राह दिखा दी है. शर्मिष्ठा के पति या घरवालों ने भी मीडिया से कोई बातचीत करने से इनकार कर दिया है.
हालांकि उनके एक पारिवारिक मित्र सुनील मुखर्जी बताते हैं, ''बीते लगभग डेढ़ महीने से पूरा परिवार जिस मानसिक यंत्रणा से गुज़रा है उसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है. तमाम सवालों से बचने के लिए ही यह परिवार फिलहाल मीडिया के सामने आने से बच रहा है. अदालत के फ़ैसले ने सबको काफ़ी राहत दी है.''
शर्मिष्ठा अपने परिवार के साथ कोलकाता से सटे उत्तर 24-परगना ज़िले के बारासात इलाक़े में रहती हैं.
कानून विशेषज्ञों का कहना है कि इस फैसले के बाद अब ऐसी ही हालत से गुजर रही दूसरी महिलाएं भी अदालत की शरण ले सकती हैं. कलकत्ता हाईकोर्ट के एक वकील सुरंजन दास कहते हैं, "पहले 20 सप्ताह के बाद गर्भ की विसंगतियों का पता चलने पर कई महिलाएं चोरी-छिपे गर्भपात कराती थीं. इस असुरक्षित गर्भपात वजह से हर साल सैकड़ों महिलाएं मौत के मुंह में समा जाती हैं. अब उनको असमय मौत का शिकार नहीं होना पड़ेगा."
भ्रूण को हृदय संबंधी जटिलताएं
इस महिला को बीती मई में अपने भ्रूण में विसंगतियों का पता चला था. उसके बाद और कई तरह के परीक्षणों में महीने भर का समय गुजर गया. जांच के दौरान डॉक्टरों को भ्रूण के दिल में कई गंभीर गड़बड़ियों का पता चला था. बाद में मुंबई के विशेषज्ञों के अलावा जाने-माने हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. देवी शेट्टी ने भी इस बात की पुष्टि कर दी कि भ्रूण को हृदय संबंधी जटिलताएं हैं.
इसके बाद शर्मिष्ठा ने अपनी वकील स्नेहा मुखर्जी के ज़रिए गर्भपात की अनुमति के लिए बीते महीने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की थी. इस पर अदालत ने राज्य सरकार को एक मेडिकल बोर्ड का गठन कर शर्मिष्ठा की शारीरिक स्थिति की जांच के बाद रिपोर्ट देने का निर्देश दिया था. उसके बाद यहां सरकारी एसएसकेएम अस्पताल के सात डॉक्टरों के बोर्ड का गठन किया गया.
मेडिकल बोर्ड ने तमाम रिपोर्ट्स देखने और कई अन्य परीक्षण करने के बाद अदालत में सौंपी अपनी रिपोर्ट में कहा था, 'भ्रूण को जितनी जटिलताएं हैं उनको दूर करने के लिए जन्म के बाद उसके कई ऑपरेशन करने होंगे और हर ऑपरेशन में बच्चे की जान को ख़तरा होगा. इससे भावी मां भी मानसिक अवसाद की शिकार हो सकती है. इसलिए उसे गर्भपात करने की अनुमति दी जाए.' इस रिपोर्ट के आधार पर अदालत ने महिला को गर्भपात कराने की अनुमति दे दी.
शर्मिष्ठा ने अपनी याचिका में गर्भपात के लिए तय 20 सप्ताह की सीमा को भी चुनौती दी थी. सुप्रीम कोर्ट ने हालांकि इस पर कुछ नहीं कहा है. लेकिन वकीलों का कहना है कि इससे गर्भपात अधिनियम में संशोधन के लिए दबाव बढ़ेगा.
महिला रोग विशेषज्ञ डा. सुपर्णा बनर्जी कहती हैं, "सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से ऐसे मामलों में चिकित्सा के दौरान त्वरित फैसला लेने में भी सहूलियत होगी. अब ऐसी महिलाएं संबंधित कानून में संशोधन नहीं होने तक राहत के लिए अदालत का दरवाजा खटखटा सकती हैं."
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