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काली पट्टी बांधकर ईद की नमाज़ क्यों पढ़ने वाले हैं मुसलमान
- Author, दिलनवाज़ पाशा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
चलती ट्रेन में रोज़ेदार मुसलमान युवक की हत्या के बाद से भारतीय मुसलमान ग़ुस्से में हैं. बीबीसी से बातचीत में मारे गए युवक जुनैद के भाई ने कहा है कि हमले के वक़्त उन पर धार्मिक फ़ब्तियां कसी गईं थीं.
जुनैद की मौत के भीड़ के हाथों क़त्ल की वारदात के सिलसिले में ही अगली मौत माना जा रहा है.
इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर ईद के दिन काली पट्टी बांधकर नमाज़ पढ़ने को लेकर कई लोग अभियान चला रहे हैं.
शायर इमरान प्रतापगढ़ी ने फ़ेसबुक पर लोगों से काली पट्टी बांधकर नमाज़ पढ़ने की अपील की है.
इमरान कहते हैं, "हमारे सामने ईद का त्यौहार है, जो ख़ुशी का दिन है लेकिन इस त्यौहार पर समाज ने हमें तोहफ़े में ख़ून सनी हुई लाशें दी हैं. फ़रीदाबाद में जुनैद और श्रीनगर में अयूब पंडित का वीडियो देखने के बाद ख़ामोश रहना मुश्किल है. कहीं ना कहीं अब बड़े विरोध की ज़रूरत है. काली पट्टी बांधकर हम लोकतांत्रिक तरीके से विरोध कर रहे हैं."
मुस्लिम समाजसेवी मेंहदी हसन क़ासमी ने बीबीसी से कहा, "लोकतांत्रिक देश भारत में भीड़तंत्र का नासूर बढ़ रहा है. कोई न कोई आए दिन इसका शिकार हो रहा है. ये वारदातें न सिर्फ़ समाज में ज़हर घोल रही हैं बल्कि देश को गृहयुद्ध में धकेले जाने की शुरुआत भी हो सकती हैं."
क़ासमी कहते हैं, "भीड़ दरिंदगी के साथ लोगों को क़त्ल कर रही है. काली पट्टी बांधकर नमाज़ पढ़ना इस भीड़तंत्र के ख़िलाफ़ ख़ामोश प्रदर्शन है."
क़ासमी कहते हैं कि उन्होंने इस संबंध में दारुल उलूम देवबंद से फ़तवा भी लेना चाहा लेकिन उन्हें लिखित में फ़तवा नहीं मिल सका. हालांकि वो कहते हैं कि उनकी धर्मगुरुओं से फ़ोन पर बात हुई है और उनका कहना है कि ईद पर काली पट्टी बांधकर नमाज़ पढ़ने में कोई हर्ज़ नहीं है.
रविवार को खाड़ी देशों में ईद मनाई जा रही है जहां से भारतीय समुदाय के लोग काली पट्टी बांधकर ईद मनाने की तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं.
दुबई में रह रहे मोहम्मद आरिफ़ ने बीबीसी से कहा, "प्रवासी मुसलमान भारत में धर्मांध भीड़ के हाथों हो रही हिंसा के विरोध में काली पट्टी बांध रहे हैं."
दम्माम में काली पट्टी बांधकर ईद मनाने वाले मोहम्मद सद्दाम ने बीबीसी से कहा, "हिंदुस्तान में सुनियोजित भीड़ लोगों को मुसलमान होने की वजह से मार रही है. हम सोशल मीडिया के ज़रिए अपने देश के हालात से दुनिया को रूबरू कराना चाहते हैं."
वसीम अकरम ने फ़ेसबुक पर लिखा, "पहले हम सीरिया और फ़लस्तीन के लोगों की हिफ़ाज़त के लिए दुआ करते थे, अपने हिंदुस्तान के लोगों की हिफ़ाज़त के लिए दुआ करनी पड़ रही है."
फ़ेसबुक पर अपने दोस्तों से काली पट्टी बांधने का आह्वान करने वाले नवेद चौधरी कहते हैं, "भीड़ के हाथों हत्याओं से सिर्फ़ पीड़ित परिवार ही दुखी नहीं हैं बल्कि पूरी क़ौम दुखी है. हम उनके इंसाफ़ की आवाज़ उठाने के लिए काली पट्टी बांध रहे हैं."
जमात-ए-इस्लामी से जुड़े नदीम ख़ान भी फ़ेसबुक पर लोगों से काली पट्टी बांधकर ईद की नमाज़ पढ़ने की अपील कर रहे हैं. नदीम लिखते हैं, "ईद तो खुशी का दिन है, लेकिन क्या नजीब, पहलू, मिन्हाज ,जुनैद मज़लूम के घर ईद होगी?"
मोहम्मद ज़ाहिद ने फ़ेसबुक पर लिखा है, "अगर आप इसलिए खामोश हैं कि भीड़ केवल मुसलमानों को मार रही है तो आप भ्रम में हैं , यही भीड़ जमशेदपुर में एक वृद्ध हिन्दू महिला समेत उसके दो पोतों की भी हत्या कर चुकी है , ऐसे ही भीड़ ने हापुड़ में एक हिन्दू की भी हत्या की थी."
जाहिद कहते हैं, "हमें हमारा पुराना भारत चाहिए , जहाँ हम ईद दिपावली साथ मिल कर मनाते थे. अब वह भारत कहीं दूर चला गया , उसी को वापस पाने की मुहिम है #Eidwithblackband"
वहीं जौनपुर के रहने वाले आसिफ़ आरएन कहते हैं, "काली पट्टी बांधकर विरोध कर सकते हैं लेकिन सिर्फ़ काली पट्टी से क्या होगा. मुसलमानों को अगर अपनी बात रखनी ही है तो जंतर-मंतर पर दलितों की तरह प्रदर्शन करना होगा."
केंद्र में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद से मुसलमानों पर हमलों की संख्या बढ़ी है और बहुत से लोगों का मानना है कि हमलावरों को सत्ता का संरक्षण प्राप्त है.