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दिल्ली हवाई अड्डे से कैसे अलग होगा जेवर एयरपोर्ट?
नोएडा को मिला नया एयरपोर्ट
- 3000 हेक्टेयर ज़मीन चिन्हित
- पहले चरण के तहत 1000 हेक्टेयर
- 15-20 हज़ार करोड़ निवेश की उम्मीद
- सालाना 3-5 करोड़ मुसाफिरों के काम आएगा
- दिल्ली एयरपोर्ट 21वां सबसे व्यस्त हवाई अड्डा
नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने ग्रेटर नोएडा के जेवर में नया हवाई अड्डा बनाने से जुड़े प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है.
ये एयरपोर्ट अगले 5-6 साल में काम करना शुरू कर देगा. इसके बनने के बाद देश के सबसे व्यस्त एयरपोर्ट में से एक दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर यात्रियों का भार कम हो जाएगा.
नागरिक उड्डयन मंत्री अशोक गजपति राजू ने कहा, ''सिद्धांत रूप से एयरपोर्ट के लिए मंजूरी दे दी गई है. दिल्ली में हम साल 2020 तक 9 करोड़ और 2024 तक 10.9 करोड़ मुसाफिरों के आने-जाने की उम्मीद कर रहे हैं.''
साल 2001 में शुरू हुई थी कवायद
इस एयरपोर्ट प्रोजेक्ट की बात सबसे पहले साल 2001 में उत्तर प्रदेश की राजनाथ सिंह सरकार के वक़्त उठी थी और साल 2002 में अगली मुख्यमंत्री मायावती ने भी इसके लिए ज़ोर लगाना शुरू किया.
हालांकि, सूबे में समाजवादी पार्टी के सत्ता में आने के बाद ये परियोजना ठंडे बस्ते में चली गई थी.
उत्तर प्रदेश में जब योगी सरकार आई तो इस हवाई अड्डे के लिए दोबारा ज़ोर लगाना शुरू किया जिसके बाद केंद्र ने आख़िरकार इसे मंजूरी दे दी.
राजू ने दी योगी सरकार को बधाई
ये बात ख़ुद अशोक गजपति राजू ने भी मानी. उन्होंने ट्वीट किया, ''मैं योगी आदित्यनाथ की अगुवाई वाली उत्तर प्रदेश की नई सरकार को बधाई देता हूं और उसकी तारीफ़ करता हूं कि उसने इस परियोजना के लिए ज़ोर लगाया, प्रतिबद्धता दिखाई जिसकी वजह से इसे जल्द इजाज़त मिल सकी.''
नोएडा एयरपोर्ट के लिए कुल 3000 हेक्टेयर ज़मीन चिन्हित की गई है.
परियोजना के पहले चरण के तहत 1000 हेक्टेयर क्षेत्र आएगा. सरकार को इस परियोजना में 15-20 हज़ार करोड़ निवेश की उम्मीद है.
दिल्ली हवाई अड्डा कितना व्यस्त?
राजू के मुताबिक नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट अगले 10-15 साल में सालाना 3-5 करोड़ मुसाफिरों के काम आएगा.
पैसेंजर ट्रैफ़िक के लिहाज़ से दिल्ली का इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट देश का सबसे व्यस्त हवाई अड्डा है.
साल 2016 में ये दुनिया का 21वां सबसे व्यस्त और एशिया का 10वां सबसे व्यस्त एयरपोर्ट माना गया.
कारोबारी साल 2016-17 में इस एयरपोर्ट ने 5.77 करोड़ से ज़्यादा मुसाफिरों को उनकी मंज़िल तक पहुंचाया.
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