सवाल जिस पर मीरा कुमार बीबीसी पर भड़कीं थीं...

    • Author, मोहन लाल शर्मा
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

ये बात 2008 की है, मार्च का महीना था, मीरा कुमार के पिताजी बाबू जगजीवन राम की जन्मशती (100वीं सालगिरह) मनाई जाने वाली थी.

एक संपादकीय बैठक में ये तय हुआ कि बीबीसी हिंदी को बाबू जगजीवन राम के योगदान को याद कर एक कार्यक्रम बनाना चाहिए.

तो ये भी तय हुआ कि जगजीवन राम के बारे में उनकी बेटी मीरा कुमार से बात करनी ज़रूरी है.

मीरा कुमार उस वक्त केंद्र की यूपीए सरकार में सामाजिक न्याय और आधिकारिता मंत्री थी.

तो बस मीरा कुमार के इंटरव्यू के लिए मैंने उनका समय लेने की कोशिश करनी शुरु कर दी.

समय मिलना आसान न था

कई दिन तक लगातार उनके दफ्तर फ़ोन किया. हर बार उनके सचिव से बात हुई. सचिव ने पूछा कि मैडम से मिलने की वजह क्या है?

मैंने कहा कि 'बाबूजी' पर एक विशेष कार्यक्रम बनाना चाहता हूँ. बहरहाल कई दौर की बातचीत के बाद मुझे मीरा कुमार से मिलने का वक़्त मिल गया.

निर्धारित दिन मैं रिकॉर्डर के साथ उनके दफ़्तर पहुंच गया.

थोड़ी देर इंतज़ार करने के बाद उनके सचिव ने मुझे अंदर जाने दिया.

सामान्य शिष्टाचार के बाद मीरा कुमार इंटरव्यू के लिए तैयार थीं.

मैंने टेपरिकॉर्डर ऑन किया और पहला सवाल किया.. एक पिता के रूप में बाबूजी कैसे थे?

मीरा कुमार ने अपने कुछ संस्मरण सुनाए.

कैसे याद करती हैं आप 'बाबूजी' को ये मेरा दूसरा सवाल था.

अचानक कहा- रिकॉर्डर बंद कीजिए...

इस सवाल के बाद मैंने तीसरा सवाल पूछना शुरू किया... बाबू जगजीवन राम भारत की दलित राजनीति के सबसे बड़े नेता थे. आज़ादी के बाद क्या...

मीरा कुमार ने मुझे तुंरत रोका और कहा अपना रिकॉर्डर बंद कीजिए...

मैंने कहा कि मुझे सवाल तो पूरा करने दीजिए..

उन्होंने कहा, 'मुझे आपसे बात नहीं करनी.. अब आप जाएं..'

मीरा कुमार उठ गईं और मैं उनका चेहरा देखता रह गया.

मैंने अपना रिकॉर्डर उठाया और उनके चेंबर से बाहर आ गया.

रिकॉर्डिंग मंगवाई

दफ़्तर पहुंचने के बाद उनके सचिव का मेरे पास फोन आया कि आपने उनसे ऐसा क्या पूछा कि वो भड़क गईं. उनके सचिव ने मुझसे वो रिकॉर्डिंग मांगी.

ख़ैर रेहान फ़ज़ल ने बाबू जगजीवन राम पर रेडियो कार्यक्रम बनाया. इस कार्यक्रम में उन दो सवालों के जवाब रखे गए जो मीरा कुमार ने दिए थे.

बाद में मैंने इस प्रोग्राम की एक रिकार्डिंग उनके दफ़्तर पहुंचवा दी.

मगर आज विडंबना देखिए कि जिस दलित राजनीति के सवाल पर मीरा कुमार भड़कीं थी, उसी दलित राजनीति के चलते वो राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार बन चुकी हैं.

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