भीड़ ने जम्मू-कश्मीर पुलिस के डीएसपी को पीट-पीटकर मार डाला

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- Author, माजिद जहांगीर
- पदनाम, श्रीनगर से बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
भारत प्रशासित कश्मीर में गुरुवार को जम्मू-कश्मीर पुलिस के डीएसपी मोहम्मद अयूब पंडित की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई.
पंडित जम्मू - कश्मीर सिक्योरिटी विंग में कार्यरत थे जो कि शब-ए-क़द्र के दौरान श्रीनगर की ऐतिहासिक जामा मस्जिद के बाहर सुरक्षा व्यवस्था देख रहे थे.
जम्मू-कश्मीर के डीजीपी शेष पॉल वैद ने कहा, ''वह कंट्रोल सिस्टम का संचालन कर रहे थे. तब मस्जिद में कोई चरमपंथी नहीं था. मस्जिद में भीड़ थी. उसकी तैनाती सुरक्षा के लिहाज से की गई थी. कुछ लोगों ने उसे मारना शुरू कर दिया. लोगों ने उसे बेवजह मारना शुरू कर दिया था. उसने ख़ुद को बचाने के लिए अपने पिस्टल से 2-3 राउंड फायरिंग की. इसके बाद एक उन्मादी भीड़ और हिंसक हो गई.''

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भीड़ ने पीट-पीटकर की हत्या
कश्मीर ज़ोन के इंस्पेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस मुनीर खान ने इस बारे में बीबीसी से बात की.
उन्होंने बताया है, "ये घटना बीती रात की है. मारे गए पुलिस अधिकारी जामा मस्जिद, नौहट्टा के बाहर ड्यूटी पर तैनात थे. इस दौरान हिंसक भीड़ ने पीट-पीट कर उनकी हत्या कर दी है. पुलिस अधिकारी ने अपने हथियार से गोली चलाई जिसमें तीन लोग घायल हो गए है. हमने मामले की छानबीन शुरू कर दी है. इस मामले में जैसे ही आरोपियों की पहचान होगी वैसे ही उन्हें गिरफ़्तार किया जाएगा."
घटना के वक़्त सादी वर्दी में थे डीएसपी
इस घटना के वक़्त डीएसपी पंडित पुलिस वर्दी में नहीं थे. पुलिस ने अपने बयान में कहा है, "एक और पुलिस जवान ने ड्यूटी देते हुए अपनी जान क़ुर्बान की है जिनकी भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी."

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तस्वीरें खींच रहे थे डीएसपी
ऐसा बताया जा रहा है कि घटना के वक़्त पुलिस अधिकारी मस्जिद के बाहर तस्वीरें ले रहे थे और जब भीड़ ने अधिकारी को पकड़ने की कोशिश की तो उन्होंने गोली चलाई. उनके पास जो हथियार था वह भी उनसे छीन के लिया गया है. पंडित श्रीनगर के नोपोरा के निवासी थे.
प्रशासन ने श्रीनगर के सात इलाकों में लोगों के चलने फिरने पर प्रतिबंध लगाया है. इसके साथ ही पुलिस कर्मी भेज दिए गए हैं.
चरमपंथियों ने आज पुलवामा में गुरुवार को सुरक्षा बलों की कारवाई में मारे गए एक आम नागरिक की मौत के ख़िलाफ़ प्रदर्शनों की अपील की है.
हालांकि, पुलिस ने बाद में पुलवामा में मारे गए युवा को पत्थरबाज़ बताया था.
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