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कौन हैं भारत के शफ़ी अरमार, जिन्हें अमरीका ने कहा 'ग्लोबल आतंकी'
- Author, इमरान कुरैशी
- पदनाम, बेंगलुरु से बीबीसी हिंदी के लिए
भारत के मोहम्मद शफ़ी अरमार को अमरीकी विदेश मंत्रालय 'विशेष तौर पर नामित ग्लोबल आतंकवादी' कहा है. चरमपंथियों की वैश्विक सूची में आने वाले शफ़ी कर्नाटक के उसी भटकल शहर से हैं, जहां से भटकल बंधुओं का रिश्ता रहा है.
शफ़ी अरमार को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की ओर से दाख़िल की गई दो चार्जशीटों में मुख्य साज़िशकर्ता बताया गया है. इनमें से एक केस इस्लामिक स्टेट से जुड़ा है और दूसरे में वह इंडियन मुजाहिदीन से रिश्तों की वजह से आरोपी बनाए गए हैं.
लेकिन, शफी अरमार के बारे में अजीब बात ये है कि वह भारत में किसी आतंकी हमले में शामिल नहीं रहे. इसकी वजह यह रही कि उन्होंने जिन नौजवान लड़कों को सोशल मीडिया के ज़रिये 'कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित किया और उकसाया', वे अपनी योजनाओं को अंजाम देने से पहले ही धर लिए गए.
'पैसे जुटाने का काम शफ़ी के जिम्मे'
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने पहचान न ज़ाहिर करने की शर्त पर स्वीकार किया कि उन आरोपियों के मुक़ाबले जिनकी साज़िशों ने बहुत सारे और कई बार सैकड़ों लोगों की जान ले ली, शफ़ी अरमार एक अलग तरह का केस था.
एक पुलिस अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, 'अमरीकी विदेश मंत्रालय का यह कदम अमरीकी वित्त मंत्रालय की इस सोच पर आधारित है कि वह दरअसल आतंक के लिए पैसे जुटाने का काम करता है.'
शफ़ी अरमार पहली बार 2012 में खुफ़िया एजेंसियों के रडार पर आए, जब मध्य प्रदेश में इंडियन मुजाहिदीन के मामले की जांच में उनका नाम सामने आया.
भाई सीरिया में मारा गया!
एक समूह 'भारत को इराक़ और सीरिया' जैसा बनाना चाहता था और इस मामले में वह आरोपी नंबर 26 थे. इसी केस में उनके बड़े भाई अब्दुल क़ादिर सुल्तान अरमार भी वैश्विक आतंकी संगठनों की मदद से धार्मिक लड़ाई छेड़ना चाहते थे.
एनआईए के प्रवक्ता आलोक मित्तल ने बीबीसी हिंदी को बताया, 'आईएसआईएस के दो अन्य मामलों में वह मुख्य साज़िशकर्ता, उकसाने वाला और भर्ती करने वाला शख़्स थे. इन दो मामलों और इंडियन मुजाहिदीन वाले मामले की चार्जशीट में उनका नाम है. 2014 में उनके ख़िलाफड रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था.'
शफ़ी अरमान कर्नाटक के भटकल में 32 साल पहले जन्मे थे. ये वही जगह है जो यासीन भटकल और उनके भाइयों की वजह से कुख्यात है. शफ़ी के भाई सुल्तान अरमार की सीरिया में कथित तौर पर एक रॉकेट हमले में मौत हो चुकी है.
सबसे छोटा भाई प्रिंटिंग प्रेस में ऑपरेटर
शफ़ी अरमार के छोटे भाई सफ़वान अरमार ने कहा, 'दस साल पहले शफ़ी काम के लिए घर छोड़कर दुबई गए थे. मैं तब छोटा था और मुझे नहीं पता था कि वो और सुल्तान क्या कर रहे हैं. मैं सिमी या किसी और संगठन से उनके रिश्ते के बारे में नहीं जानता.'
28 साल के सफ़वान अरमार एक स्थानीय प्रिंटिंग प्रेस में मशीन ऑपरेटर के तौर पर काम करते हैं और भटकल में ही अपनी विधवा मां के साथ रहते हैं. वह याद करते हैं कि उनके बड़े भाइयों का उनसे बर्ताव अच्छा था, क्योंकि वह घर में सबसे छोटे थे. लेकिन पुलिस और एनआईए के अफ़सरों के उनके घर आने से जुड़े सवालों का जवाब देते हुए वह थोड़ा झुंझलाए हुए नज़र आते हैं.
सफ़वान कहते हैं, 'पुलिस और एजेंसियों के लोग आकर सवाल पूछते रहते हैं. अभी सात-आठ दिन पहले वो ये बताने आए थे कि शफ़ी के ख़िलाफ़ वॉरंट जारी किया गया है. वह चाहते थे कि हम उनसे संपर्क करने का ज़रिया बताएं. जब हमारे पास कोई कॉन्टैक्ट नहीं है तो हम कैसे दे सकते हैं.'
सफ़वान ने बताया कि 10 साल पहले जब शफ़ी दुबई के लिए गए थे तो शुरुआती दो साल तक वह संपर्क में रहे. लेकिन उसके बाद से उनसे किसी तरह का संपर्क नहीं रहा. वह कहते हैं, 'एनआईए हमसे उनके बारे में जानकारी लेने आती है, लेकिन उन्हीं लोगों से शफ़ी के बारे में जानकारी मिलती है.'
बताया जाता है कि शफ़ी अरमार और उनके बड़े भाई सुल्तान अरमार जब इंडियन मुजाहिदीन में थे, तब फंड के इस्तेमाल को लेकर उनकी यासीन भटकल और रियाज़ भटकल से कहासुनी हो गई थी और इसके बाद वह इस चरमपंथी संगठन से अलग हो गए थे.
इसके बाद अरमार बंधुओं ने अंसार-उल-तौहीद नाम से संगठन बनाया था और फिर इसे इस्लामिक स्टेट से जोड़ दिया था.
'कई नामों से करता है ऑपरेट'
एक पुलिस अधिकारी ने पहचान ज़ाहिर न करने की शर्त पर बताया, 'शफ़ी अरमार भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश में इस्लामिक स्टेट की भर्तियां करने वाला मुख्य शख़्स है. वह कई नामों से ऑपरेट करता है. एनआईए के दो मामलों में वो एक मॉड्यूल का चीफ हैंडलर है और उसका नाम यूसुफ-अल-हिंदी है. वह अंजान भाई, छोटे मौला जैसे नामों से भी जाना जाता है. उसके ऑपरेशन दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और हैदराबाद तक फैले हुए हैं.'
तो अमरीका की ओर से शफ़ी अरमार को 'विशेष तौर पर नामित ग्लोबल आतंकवादी' घोषित करने से भारत को क्या मिला?
एनआईए प्रवक्ता मित्तल कहते हैं, 'पहला असर यही होगा कि अब कोई शफ़ी से डील या कोई आर्थिक लेन-देन नहीं कर पाएगा. ये एक पाबंदी है. रेड कॉर्नर नोटिस की वजह से पहले ही उनकी यात्राओं पर प्रतिबंध है. कुल मिलाकर, एजेंसियों को इसका फ़ायदा होगा.'
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