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स्वामीनाथन की सिफ़ारिशें क्यों नहीं मानती सरकार?
महाराष्ट्र हो या मध्य प्रदेश, फिर चाहे उत्तर प्रदेश हो या तमिलनाडु किसान प्रदर्शन कर रहे हैं. कहीं किसान पर सूखे की मार है तो कहीं उसे अपनी फसलों का उचित दाम नहीं मिल रहा.
मध्य प्रदेश के मंदसौर में 7 जून को किसानों का प्रदर्शन हिंसक हो गया था और पुलिस की गोलीबारी में 5 किसानों की मौत हो गई थी.
ऐसे में फिर से प्रोफ़ेसर एमएस स्वामीनाथन की सिफ़ारिशों का चर्चा फिर से होने लगा है.
प्रोफ़ेसर स्वामीनाथन की अध्यक्षता में नवंबर 2004 को 'नेशनल कमीशन ऑन फारमर्स' बना था. दो सालों में इस कमेटी ने छह रिपोर्ट तैयार की.
स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें
- फ़सल उत्पादन मूल्य से पचास प्रतिशत ज़्यादा दाम किसानों को मिले.
- किसानों को अच्छी क्वालिटी के बीज कम दामों में मुहैया कराए जाएं.
- गांवों में किसानों की मदद के लिए विलेज नॉलेज सेंटर या ज्ञान चौपाल बनाया जाए.
- महिला किसानों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड जारी किए जाएं.
- किसानों के लिए कृषि जोखिम फंड बनाया जाए, ताकि प्राकृतिक आपदाओं के आने पर किसानों को मदद मिल सके.
- सरप्लस और इस्तेमाल नहीं हो रही ज़मीन के टुकड़ों का वितरण किया जाए.
- खेतीहर जमीन और वनभूमि को गैर-कृषि उद्देश्यों के लिए कॉरपोरेट को न दिया जाए.
- फसल बीमा की सुविधा पूरे देश में हर फसल के लिए मिले.
- खेती के लिए कर्ज की व्यवस्था हर गरीब और जरूरतमंद तक पहुंचे.
- सरकार की मदद से किसानों को दिए जाने वाले कर्ज पर ब्याज दर कम करके चार फीसदी किया जाए.
- कर्ज की वसूली में राहत, प्राकृतिक आपदा या संकट से जूझ रहे इलाकों में ब्याज से राहत हालात सामान्य होने तक जारी रहे.
- लगातार प्राकृतिक आपदाओं की सूरत में किसान को मदद पहुंचाने के लिए एक एग्रिकल्चर रिस्क फंड का गठन किया जाए.
28 फीसदी भारतीय परिवार ग़रीब रेखा से नीचे रह रहे हैं. ऐसे लोगों के लिए खाद्य सुरक्षा का इंतज़ाम करने की सिफारिश आयोग ने की.
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