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महाराष्ट्र- किसान सड़कों पर उतरे, ट्रक-टैंकर रोके, सामान गिराया
- Author, अश्विन अघोर
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
क़र्ज़ माफ़ी और कई अन्य मांगों को लेकर महाराष्ट्र के कई इलाकों में किसान संगठन प्रदर्शन कर रहे हैं.
प्रदर्शनकारी जगह-जगह बैरिकेड लगा कर कृषि उत्पादों को मंडी तक पहुंचने से रोक रहे हैं.
मुख्य मांगें, ख़ास बातें
- एक साल से किसानों की क़र्ज़ माफ़ी की मांग
- स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू हों
- कृषि उपज पर खर्चे से खरीद की कीमत डेढ़ गुना हो
- किसान क्रांति मोर्चा और स्वाभिमानी शेतकारी संगठन का आह्वान
- हड़तान पूरे राज्य में है और 37 किसान संगठन शामिल हैं
बीती 29 मई को देर रात मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से भी इन संगठनों के प्रतिनिधनियों की बैठक हुई लेकिन कोई हल नहीं निकला.
क्रांति मोर्चा के नेता जीवाजीराव सूर्यवंशी ने बीबीसी को बताया, "हमने अपनी मांगें राज्य सरकार के समक्ष रखी थीं, जो पूरी नहीं हुईं. एक जून की सुबह से राज्य के सभी हिस्सों में किसान हड़ताल पर हैं और कोई भी कृषि उत्पाद बाज़ार तक नहीं पहुंचा है. यह हड़ताल 4 जून तक जारी रहेगी."
पूरे राज्य में प्रदर्शन
गुरुवार को प्रदर्शनकारी नांदेड़, जलगांव, सांगली, सतारा, अहमदनगर, सोलापुर, पुणे और नासिक समेत राज्य के कई इलाकों में प्रदर्शन कर रहे हैं.
प्रदर्शनकारी सड़कों पर ट्रकों और अन्य वाहनों की चेकिंग कर रहे हैं और फल और सब्जी ले जाते हुए वाहनों को रोककर कृषि उत्पादों को सड़क पर गिरा रहे हैं.
कोल्हापुर के पास किसान प्रदर्शनकारियों ने वारना डेरी के दो टैंकरों को रोक कर उनके दूध को सड़क पर ही बहा दिया.
राज्य के सांगली, सातारा और अहमदनगर ज़िलों में कई ट्रकों और टैंकरों को जबरन रोका गया.
पुलिस ने आठ लोगों को इस तोड़फोड़ में हिस्सा लेने की वजह से हिरासत में लिया है.
'बातचीत के दरवाज़े बंद नहीं'
राज्य के कृषि मंत्री पांडुरंग फुंडकर ने किसान संगठनों से हड़ताल खत्म कर सरकार के साथ बैठकर बात करने की अपील की है.
फुंडकर ने कहा, "मैं मानता हूं कि एक बैठक विफल रही. लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि बातचीत के सारे दरवाजे ही बंद कर दिए जाएं."
उधर, शिवसेना सांसद संजय राउत ने किसानों की हड़ताल का समर्थन किया है और क़र्ज माफ़ी न करने के लिए फड़नवीस सरकार की आलोचना की है.
किसान क्रांति संगठन के संयोजक कुंजित शांताराम ने बीबीसी को बताया- "किसानों की हालत बहुत ख़राब है और उनकी स्थिति को सुधारने के लेकर सरकार कोई क़दम नहीं उठा रही."
उनके मुताबिक, "अभी प्याज की क़ीमत 4-5 रुपये किलो है लेकिन जब पैदावार अच्छी होती है तो यही प्याज 10 पैसे प्रति किलो में बिकता है जबकि इस पर प्रति किलो 9 रुपये की लागत आती है."
अपनी ही सरकार के ख़िलाफ़ गुस्सा
शेतकारी संगठन के नेता और एमएलसी सदाभाऊ खोत बीजेपी के नेतृत्व वाली फड़नवीस सरकार में राज्य मंत्री भी हैं.
असल में ये संगठन निर्दलीय के रूप में अपने उम्मीदवार चुनावों में खड़ा करता रहा है.
इस संगठन के अध्यक्ष राजू शेट्टी कोल्हापुर के पास हाथकनंगले संसदीय क्षेत्र से सांसद हैं.
लेकिन जबसे खोत फड़नवीस सरकार में मंत्री बने हैं, दोनों नेताओं में अनबन की ख़बर है.
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस प्रदर्शन में दोनों नेताओं के अनबन की भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता.
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