बीफ़ पार्टी करवाने वाले IIT छात्र की बेरहमी से पिटाई

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- Author, इमरान क़ुरैशी
- पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
आईआईटी मद्रास के एक छात्र को कथित तौर पर 'बीफ़ फ़ेस्टिवल' कराने के लिए बुरी तरह पीटा गया है.
सूरज की आंख पर गंभीर चोट आई है. वह कैंपस में अंबेडकर-पेरियार स्टडी सर्कल से जुड़े हैं.
आरोप है कि मंगलवार को उन पर विरोधी छात्र समूह की ओर से हमला किया गया.
इस घटना पर केरल के मुख्यमंत्री पी विजयन ने भी प्रतिक्रिया की है और छात्र की पिटाई की निंदा की है और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री से ज़रूरी कार्रवाई करने का अनुरोध किया है.
विजयन ने फ़ेसबुक पर पोस्ट किया है, "ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक नौजवान की आँख पर ऐसी बुरी तरह हमला केवल इसलिए हुआ क्योंकि उसने बीफ़ खाया था. हमारा संविधान हमें हमारी पसंद का खाना खाने का अधिकार देता है. इसको लेकर असहनशीलता, दरअसल संविधान के प्रति असहनशीलता के जैसा है."

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हमले के चश्मदीद छात्र
अंबेडकर पेरियार स्टडी सर्कल के एक छात्र ने बताया, "उसकी आंख में गंभीर चोट लगी है. उस पर कॉलेज कैंटीन के पास हमला किया गया."
मेस में इस घटना के वक़्त मौजूद छात्रों में से एक अज़हर मोहिदीन ने बीबीसी हिंदी को बताया, हम सभी खा रहे थे जब सात-आठ लोग एक टेबुल के पास आए, उनमें से एक सीधा सूरज के पास गया और उससे पूछा कि क्या उसने बीफ़ फ़ेस्ट में हिस्सा लिया था.
"उसके बाद उसने कहा कि वहाँ बीफ़ खाने के बाद तुम शाकाहारी मेस में खा रहे हो. थोड़ी देर बाद सूरज के सिर के पीछे ज़ोर से मारा गया. उसके बाद उसके चेहरे और शरीर पर जगह-जगह हमला किया गया. उसके साथ आए दूसरे लोग भी मारने लगे. काफ़ी देर बाद उसके दोस्तों ने उसे वहाँ से हटाया."
अज़हर ने बताया कि इसके बाद उन्होंने और उनके कुछ दोस्तों ने सूरज को कैंपस के अस्पताल और फिर आई हॉस्पिटल पहुँचाया.
केंद्र सरकार के नए नियम के ख़िलाफ़ हुई थी पार्टी
'पशु बाज़ारों' और पशु क्रूरता को लेकर केंद्र सरकार ने हाल में नए नियम लागू किए थे जिनके विरोध में रविवार शाम यह बीफ़ पार्टी बुलाई गई थी.
23 मई को जारी किए गए सरकारी नोटिफिकेशन के मुताबिक, पशु बाज़ारों से ख़रीदे गए पशुओं को जान से नहीं मारा जा सकता. लेकिन मंगलवार को ही मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने इन नियमों पर रोक लगा दी है.
हालाँकि पर्यावरण मंत्रालय ने नए नियमों के बारे में ये कहा है कि इनसे अलग बूचड़खानों के लिए जानवर सीधे पशु फ़ार्म या इन्हें पाले वालों से खरीदे जा सकते हैं.
इन नियमों का दक्षिण भारत में ख़ास तौर पर विरोध हो रहा था. केरल में यूथ कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ताओं ने इसके ख़िलाफ़ सरेआम बछड़ा काटा था. जिसके बाद कांग्रेस को भी बैकफ़ुट पर आकर ऐसा करने वाले कार्यकर्ता को सस्पेंड करना पड़ा था.

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क्या कहना है पेरियार सर्कल का?
बीफ़ पार्टी के आयोजन के बाद पेरियार स्टडी सर्कल के प्रतिनिधि स्वामीनाथन से बीबीसी ने बात की थी.
उनका कहना था, "हममें से बहुत से छात्र किसान परिवारों से हैं. हम गायों-बैलों को पालना जानते हैं. जो नए नियम हैं वो किसानों के ख़िलाफ़ हैं. नए नियम लागू होने से किसान पशु नहीं पाल पाएंगे."
स्वामीनाथन का कहना है कि नए नियमों से बड़ी मीट कंपनियों को फ़ायदा होगा और मांस कारोबार पूरी तरह मल्टीनेशलन कंपनियों के हाथ में आ जाएगा.
वो कहते हैं, "किसान गायों और भैसों को सिर्फ़ तब ही बेचते हैं जब वो दूध देना बंद कर देती हैं. दूध देती हुई गाय या भैंस की हत्या कौन करेगा? और जब ये दूध नहीं देंगी तो इन्हें कौन पालेगा?"
केरल में सत्ताधारी मार्क्सवादी पार्टी के मुख्यमंत्री केंद्र सरकार के नए नियमों के ख़िलाफ़ खुलकर अपना विरोध दर्ज करवा चुके हैं.
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